मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: अपराध जगत में सुनील राठी को यहां से मिला कुख्यात का तमगा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने पिता और भाई की हत्या का बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में आए सुनील राठी ने रुड़की में कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया।
राठी के गुर्गों ने वर्ष 2011 में रुड़की जेल के बाहर डिप्टी जेलर नरेंद्र सिंह की हत्या की थी। इसके बाद सुपारी लेकर हत्या कराने में उसका नाम चलने लगा। वर्ष 2014 में रुड़की में जेल के बाहर विरोधी गैंग पर गोलीबारी करवा अपने वर्चस्व कायम किया। उसकी गैंग में कई शार्प शूटर हैं, जिनकी मदद से राठी जेल से अपना नेटवर्क आपरेट करता है। कअब बागपत जेल में माफिया डॉन बजरंगी की हत्या से एक बार फिर सुर्खियों में आया है।
जुर्म की दुनिया में दबदबा कायम करने के लिए बागपत के सुनील राठी के नाम के आगे रुड़की में ही कुख्यात का तमगा लगा। अपने पिता और भाई की हत्या के बाद पढ़ाई बीच में छोड़कर सुनील राठी ने सोमपाल भाटी से बदला लेने की ठानी और अपराध की दुनिया को अपना लिया।
जेल के अंदर से अपना गिरोह सक्रिय रखा
इसी के साथ उसने हरिद्वार जिले में अपने पैर पसारने शुरू किए और हत्या की सुपारी लेने लगा, लेकिन वर्ष 2000 में पुलिस ने उसे हरिद्वार के कनखल की शिवपुरी कालोनी से गिरफ्तार कर लिया। उसने जेल के अंदर से अपना गिरोह सक्रिय रखा।
12 सितंबर 2011 की सुबह रुड़की जेल के बाहर बदमाशों ने डिप्टी जेलर नरेंद्र सिंह खंपा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। जिसमें कुख्यात सुनील राठी की भूमिका सामने आई और उसे षडयंत्र में शामिल होने पर आरोपी बनाया। रुड़की में हुई डिप्टी जेलर की हत्या से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना राठी
राठी पुलिस प्रशासन के लिए आतंक का पर्याय बन गया। यही नहीं इसके बाद सुनील राठी ने फिर से शार्प शूटरों के जरिए रुड़की जेल को निशाना बनाया।
जेल से छूटकर बाहर आ रहे अपने प्रतिद्वंदी कुख्यात चीनू पंडित और उसके साथियों पर गोलियां चला दी। घटना में चीनू पंडित तो बाल-बाल बच गया, लेकिन उसके तीन साथियों की मौत हो गई थी। इसके बाद चीनू पंडित ने सुनील राठी और उसकी मां राजबाला, शॉर्प शूटर कुख्यात देवपाल राणा, सुशील गुर्जर, सतीश राणा, अरविंद और सुनील राणा के खिलाफ कोतवाली गंगनहर में मुकदमा दर्ज कराया था।
इस घटना के बाद से सुनील राठी उसका नेटवर्क एक बार फिर उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया। सुनील राठी का नाम हरिद्वार और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में यदा-कदा फिरौती, रंगदारी, हत्या के मामलों में प्रमुखता से छाने लगा।