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इंसान को इंसान बनाने वाली शिक्षा देना बेहद जरूरी: मोहन भागवत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sat, 24 Nov 2018 08:03 PM IST
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तंजलि गुरुकुलम् के उद्घाटन समारोह में मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि देश में केवल रोजगार देने वाली नहीं बल्कि इंसान को इंसान बनाने वाली शिक्षा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा के बल पर ही हम भारत को विश्वगुरु बना सकते हैं। वे शनिवार को पतंजलि योगपीठ की ओर से पतंजलि गुरुकुुलम् भवन के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि गुरुकुल अपने आप में एक विशिष्ट शब्द है। गुरुकुल में गुरु अपने छात्रों को अपना कुलवाहक मानकर तैयार करते हैं व दीक्षित कर उन्हें मनुष्य बनाते हैं। गुरुकुल में विद्यार्थियों को पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ मनुष्यता के गुण सिखाये जाते हैं। गुरुकुल में उत्कृष्ट यशस्वी प्रयोग निरंतर चलते रहने चाहिए। भागवत ने कहा कि पतंजलि गुुरुकुलम् से निकले छात्र गांव-गांव में गुरुकुलों की स्थापना करेंगे। यह गुरुकुल विद्या की गंगोत्री है। इस दौरान उन्होंने कहा कि जन्म-जन्मांतर के पुण्य कर्मों से मनुष्य देह प्राप्त होती है। इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। मनुष्य अपने कर्मों के ही श्रेष्ठ बन सकता है। जिसकी आत्मीयता का दायरा विश्वव्यापी हो गया, वह सर्वश्रेष्ठ मनुष्य है।
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जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि उपकरणों के युग में भी विवेकशील मानव ही श्रेष्ठ है। कृषि, स्वदेशी, योग, आयुर्वेद और शिक्षा के क्षेत्र में पतंजलि के प्रयोग दैवीय हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रयोग इस बात का प्रमाण है कि यहां भागवत सत्ता मौजूद है। आज घर-घर में पतंजलि के स्वदेशी उत्पाद पहुंच रहे हैं। पतंजलि ने सर्वप्रथम स्वदेशी को सर्वश्रेष्ठ विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मैं पतंजलि गुरुकुलम् में भारत का भविष्य देख रहा हूं। यहां पढ़ने वाले देश के भविष्य को गढ़ेंगे।
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उन्होंने कहा कि संस्कृत आज पूरे विश्व में प्रभावशाली भाषा के रूप में जानी जा रही है। अनेक देशों ने संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर दिया है, जिनमें जर्मनी, नीदरलैंड और उरुग्वे आदि प्रमुख हैं। इससे पूर्व सरसंघचालक मोहन भागवत ने पतंजलि अनुसंधान संस्थान, पतंजलि हर्बल गार्डन व पतंजलि गोशाला का भ्रमण कर वहां चल रहे कार्यों को देखा। उन्होंने पतंजलि हर्बल गार्डन में पौधा भी रोपा। कार्यक्रम में मुख्य केन्द्रीय प्रभारी साध्वी देवप्रिया, आचार्य प्रद्युम्न महाराज, डॉ जयदीप आर्य, राकेश कुमार, मुख्य महाप्रबंधक ललित मोहन, रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा, शिवालिकनगर नगर पालिका के चेयरमैन राजीव शर्मा, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, अजय सैनी आदि मौजूद रहे।
2050 तक भारत दोबारा विश्व गुरु बन जाएगा : रामदेव
कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि वे आशंकित रहते थे कि भारत की इस गौरवमयी संस्कृति व ऋषियों के वैदिक ज्ञान परंपरा का क्या होगा, लेकिन इन नन्हें ऋषि कुमारों को देखकर लगता है कि 2050 तक भारत दोबारा विश्व गुरु बन जाएगा। ऋषियों की संस्कृति को अंगीकार कर ये ऋषिपुत्र निश्चित ही भारतीय संस्कृति का गौरवमयी इतिहास रचेंगे। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह मात्र एक संस्था का उद्घाटन नहीं बल्कि एक संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रारंभ है। पतंजलि योगपीठ के माध्यम से अनेक क्षेत्रों जैसे योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि और स्वदेशी क्रांति के बाद अब शिक्षा क्रांति का शंखनाद हो रहा है। वैदिक गुरुकुलम् आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय, आयुर्वेद महाविद्यालय और पतंजलि गुरुकुलम् हमारी शिक्षा की क्रांति के प्रमुख चरण हैं।