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रुड़की: रवासन पर झूला पुल होता तो नहीं जाती छात्र की जान, बरसात के दिनों में नदी ने अब तक कई जिंदगियां लील ली

Sat, 05 Sep 2026 04:11 PM IST
Renu Saklani संजय अग्रवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, लालढांग। (रुड़की)
संजय अग्रवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, लालढांग। (रुड़की) Published by: Renu Saklani Updated Sat, 05 Sep 2026 04:11 PM IST
सार

बरसात में उफनती रवासन नदी ग्रामीणों के लिए हर साल खतरा बन जाती है। नदी पर सुरक्षित आवाजाही का इंतजाम नहीं होने से हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है।

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Missing student body found case Roorkee Demand for a Suspension Bridge Over Ravsan River Remains Unfulfilled
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

रसूलपुर में रवासन नदी पर झूला पुल होता तो किशोर की जान नहीं जाती। रवासन नदी पर झूला पुल बनाने की मांग ग्रामीण वर्षों से करते आ रहे हैं लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही है। रवासन नदी में बहने की यह पहली घटना नहीं है। बरसात के दिनों में रवासन नदी ने अब तक कई जिंदगियां लील ली हैं।

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अभी हाल ही में 19 अगस्त को रसूलपुर निवासी प्रदीप पुत्र शेखर उम्र तीस वर्ष शाम को घर से गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा तो उसके परिवार के लोगों ने काफी ढूंढा। परिवार के लोगों को रवासन नदी में बहने की आशंका जताई।

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रसूलपुर मीठीबेरी ग्राम पंचायत के रसूलपुर, आर्यनगर, रसूलपुर गोठ के लोगों की ओर से वर्षों से रसूलपुर में झूला पुल की मांग की जा रही है। बरसात के दिनों में रवासन नदी का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों को सात से दस किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि रसूलपुर, रसूलपुर गोट व आर्यनगर की लगभग सात हजार की आबादी वाले इन गांव से लालढांग की दूरी मात्र एक से चार किलोमीटर है।

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इसमें रवासन नदी बीच में पड़ती है। इन गांव का मुख्य बाजार, स्वास्थ्य सेवाएं, बैंक आदि कार्यों के लिए लालढांग आना जाना रहता है। सामान्य दिनों में नदी में पानी बहुत कम रहता है। इससे ग्रामीण आसानी से नदी में आवागमन करते हैं। लेकिन बरसात में नदी के उफान के चलते ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। नदी को पार करने पर खतरा बना रहता है। शुक्रवार को हुई छात्र की दर्दनाक मौत से रवासन नदी पर झूला पुल की मांग जोर पकड़ने लगी।

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