उत्तराखंड: राजाजी टाइगर रिजर्व में मार गिराया आदमखोर गुलदार, जिसने ली 21 लोगों की जान
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रायवाला में राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम ने गुलदार को मार गिराया है। दावा है कि चार साल में इसी गुलदार ने 21 लोगों की जान ली है। टीम ने बुधवार तड़के खांड गांव नंबर- तीन में नरभक्षी मादा गुलदार को गोली मारी।
इसके बाद आदमखोर के शव को मोतीचूर रेंज कार्यालय लाया गया। जहां पशु चिकित्सकों दल ने गुलदार का पोस्टमार्टम किया इसके बाद उसके शव को जंगल में दफना दिया है।
टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर के मुताबिक बुधवार सुबह करीब तीन बजे गुलदार को ट्रैस करते हुए उसके पीछे पार्क के शूटर डा. प्रशांत टीम के साथ खांड गांव नंबर- तीन में पहुंचे। इस दौरान गुलदार के गन प्वाइंट पर आने के बाद डा. प्रशांत ने गोली चलाई। पहली गोली लगते ही गुलदार ढेर हो गया।
निदेशक ने बताया कि गुलदार मादा है और उसकी उम्र करीब सात साल है। उसके पैर का दाहिना पंजा नहीं है। दावा किया कि आसान शिकार के तौर पर वह लोगों को निवाला बना रही थी। मादा गुलदार की लोकेशन अक्सर विभिन्न घटना स्थलों के आसपास मिली है, जिसकी पुष्टि रेंज के जंगल में आबादी और हाईवे किनारे लगाए कैमरा ट्रैप से हुई है। निदेशक सनातन ने बताया कि पशु चिकित्सकों के तीन सदस्यीय दल के माध्यम से गुलदार का पोस्टमार्टम कराकर उसे जंगल में दफना दिया गया है।
इन टीमों ने किया काम
गुलदार को मारने वालों में रिजर्व पार्क की शूटरों की टीम में डा. प्रशांत के अलावा जहीर बख्शी, सामर्थ सिंह, मंसूर आदि शामिल थे। जबकि पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सकों की टीम में पार्क की पशु चिकित्सक डा. अदिती शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी ऋषिकेश डा. राजेश रतूड़ी और डोईवाला से डा. बीके तोमर शामिल थे।
दूसरे नंबर पर थी मादा गुलदार
राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में कुल 13 गुलदार हैं। इनमें से पांच को रिजर्व पार्क प्रशासन पहले ही ट्रैंकुलाइज कर चुका है। जबकि लोगों पर हमले कर उन्हें मौत के घाट उतारने की आशंका में दो गुलदारों को चिह्नित किया गया था, जिसमें मादा गुलदार का नंबर दूसरा है। लिहाजा, अभी यह कह पाना मुश्किल है कि क्या वाकई मादा गुलदार ही लोगों को निवाला बना रही थी।
निदेशक के दावे पर सवाल
नरभक्षी गुलदार को मारने का दावा करने वाले निदेशक सनातन सोनकर की बातों पर यकीन करें, तो भविष्य में अब लोगों के ऊपर गुलदार का हमला नहीं होगा। मगर दूसरी ओर वह यह भी कह रहे हैं मादा गुलदार चिह्नित गुलदारों में दूसरे पर नंबर पर था। ऐसे में साफ है कि पहले नंबर पर चिह्नित गुलदार अभी भी मोतीचूर रेंज के जंगल में घूम रहा है। लिहाजा, दोबारा क्षेत्र में गुलदार के हमले की घटना नहीं होगी, यह दावा फिलहाल महज हवाई साबित होता दिख रहा है।
सड़क किनारे मिला गुलदार का शव
कलियर क्षेत्र के इमलीखेड़ा-भगवानपुर मार्ग पर बुधवार की सुबह ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक गुलदार का शव पड़ा देखा। तत्काल इसकी सूचना इमलीखेड़ा पुलिस को दी गई। गुलदार के शव मिलने की सूचना पर चौकी प्रभारी कुंवर राम आर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी।
सूचना मिलते ही रुड़की रेंजर मयंक कुमार व एसडीओ एनबी शर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीओ एनबी शर्मा ने बताया की गुलदार के मुंह और सिर पर चोट के निशान थे। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि रात के समय सड़क पार करते किसी वाहन की टक्कर से गुलदार की मौत हो गई। बताया कि गुलदार के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया।
घर के बरामदे में बंधे कुत्ते को गुलदार ने बनाया निवाला
श्रीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाजार में स्थित आवासीय भवन के बरामदे में बंधे कुत्ते को गुलदार ने निवाला बना दिया। वहीं इस घटना से शहर में दहशत है। शहरवासियों का कहना है कि गुलदार छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
मंगलवार देर रात बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक आवसीय भवन में बरामदे में बंधे कुत्ते को गुलदार ने निवाला बना दिया। भवन स्वामी प्रदीप मल्ल ने बताया कि पूर्व में भी कई बार उनके आवासीय भवन के आस-पास गुलदार देखा गया है। वहीं कुछ दिन पूर्व इसी मोहल्ले में एक बछड़े को गुलदार ने निवाला बनाया था।
स्थानीय निवासी धनवीर बुटोला ने कहा कि अक्सर यहां गुलदार को देखा गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गुलदार छोटे बच्चों पर हमला कर सकता है। वहीं वन क्षेत्राधिकारी अनिल भट्ट ने कहा कि मामले की जानकारी के लिए वन कर्मियों को भेजा गया है। लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।