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कुपोषण मुक्ति अभियान: कक्षा नौ से 12 तक की बालिकाओं का होगा हीमोग्लोबिन टेस्ट
Wed, 04 Sep 2019 10:32 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 04 Sep 2019 10:32 AM IST
सार
- मुख्यमंत्री ने की कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरुआत
- 2022 तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को पक्के भवन उपलब्ध करा देने का संकल्प भी दोहराया
- अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने अति कुपोषित बालिका को लिया गोद
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सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत
विस्तार
कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरुआत करते हुए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को बड़ा एलान किया। कहा कि सरकार कक्षा नौ से 12 तक की बालिकाओं का हीमोग्लोबिन टेस्ट कराएगी, ताकि उनमें एनीमिया की असल स्थिति का पता चल पाए। सीएम ने 2022 तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को पक्के भवन उपलब्ध करा देने का संकल्प भी दोहराया। कुपोषण मुक्ति अभियान और पोषण माह सितंबर के तहत सीएम ने अति कुपोषित बालिका को गोद लिया। स्पीकर, विभागीय मंत्री, विधायक, मेयर के साथ ही शासन के अफसरों ने भी अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया।
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सीएम आवास में जनता दर्शन हॉल में मंगलवार को यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि हमें समाज की शक्ति को पहचानना चाहिए। कोई भी समस्या दूर की जा सकती है अगर सही तरीके से नियोजन किया जाए और समाज को इसमें जोड़ा कर उसे पर्सनल टच दिया जाए। उन्होंने पिथौरागढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी समाज का सहयोग लेकर बालिका लिंगानुपात में काफी सुधार आया है।
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स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि कुपोषण से मुक्ति की चुनौती स्वीकार कर हम आगे बढ़ेंगे। बच्चा स्वस्थ पैदा हो, इसके लिए मां का स्वस्थ रहना जरूरी है। महिला सशक्तीकरण और बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यदि कुपोषण से लड़ना है, तो इसकी शुरूआत गर्भवती महिला से होनी जरूरी है। उनको पर्याप्त पोषण मिले, इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में उनका पंजीकरण होना जरूरी है। मसूरी विधायक गणेश जोशी ने विभाग से कुपोषित बच्चों की सूची देने के लिए कहा, ताकि पूरे विधानसभा क्षेत्र में वह तमाम लोगों की मदद से काम कर सके। दून के मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि कुपोषण एक बहुत बड़ा अभिशाप है। इसकी मुक्ति के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत हैं।
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मैदानी जिलों में पहाड़ से कहीं ज्यादा कुपोषण
- महिला सशक्तीकरण और बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि पहाड़ की तुलना में मैदान में कुपोषण की समस्या कहीं ज्यादा है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा 7978, हरिद्वार में 4952, नैनीताल में 1354 और देहरादून में 1123 कुपोषित बच्चे हैं।
ओबराय को अमर उजाला से मिली सूचना
- प्रमुख व्यवसायी और गीता भवन संस्था से जुडे़ राकेश ओबराय ने कार्यक्रम में 100 कुपोषित बच्चों को गोद लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उन्हें अमर उजाला पढ़कर कुपोषण के खिलाफ अभियान की जानकारी हुई है। उन्होंने कहा कि गोद लेने की संख्या को और बढ़ाया जाएगा।
किसने लिया बच्चों को गोद
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल, मंत्री रेखा आर्या, विधायक गणेश जोशी, मेयर सुनील उनियाल, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, सचिव भूपिंदर कौर औलख, सचिव आरके सुधांशु, सचिव नितेश झा, सचिव शैलेश बगोली, सचिव सौजन्या, सचिव हरबंस सिंह चुघ, सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि, प्रभारी सचिव पंकज पांडे, सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी, सचिव बीएस मनराल, सचिव बीके संत, अपर सचिव एचसी सेमवाल
पोषण अभियान के ये बताए पांच सूत्र
महिला सशक्तीकरण और बाल विकास सचिव सौजन्या ने बताया कि मार्च 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की गई। साथ ही अभियान के तहत वर्ष 2022 तक छह साल तक की आयु के बच्चों में कुपोषण का स्तर 38.4 से घटाकर 25 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने पोषण अभियान के तहत पांच सूत्रों का जिक्र किया। पहला सूत्र है पहले सुनहरे 1000 दिन। दूसरा सूत्र है पौष्टिक आहार। तीसरा अनीमिया प्रबंधन। चौथा डायरिया प्रबंधन और पांचवा स्वच्छता और साफ सफाई।