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...जब इस निर्दलीय नेता की सभा में जनसैलाब देख चौंक गई थीं इंदिरा गांधी, गोपनीय ढंग से सुना था भाषण

Fri, 15 Mar 2019 04:00 AM IST
shubham विपिन बनियाल/अमर उजाला, देहरादून
विपिन बनियाल/अमर उजाला, देहरादून Published by: shubham Updated Fri, 15 Mar 2019 04:00 AM IST
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Lok sabha Elections 2019 Uttarakhand 1982 indira gandhi interesting fact flashback
इंदिरा गांधी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में 1982 के उपचुनाव जैसा चुनाव कभी नहीं हुआ। एक तरफ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, तो दूसरी तरफ पर्वत पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा। कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार बतौर चंद्रमोहन सिंह नेगी सामने थे, लेकिन चुनाव में प्रतिष्ठा इंदिरा गांधी की जुड़ गई थी। दूसरी तरफ, कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय ताल ठोक रहे हेमवती नंदन बहुगुणा के समर्थन में पूरा पहाड़ ही चुनाव में खड़ा हो गया था। 

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दून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में बहुगुणा की चुनावी सभा हुई, तो इस कदर जनसैलाब उमड़ पड़ा कि पांव रखने के लिए जमीन नहीं बची। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जो फीडबैक दिया, उसने उन्हें चौंका दिया था।
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कहा तो ये भी गया कि बहुगुणा का भाषण सुनने के लिए इंदिरा गोपनीय ढंग से दून पहुंची थीं। परेड ग्राउंड के एक स्थान पर उनका हेलीकाप्टर उतरा था और वहीं से उन्होंने बहुगुणा का पूरा भाषण सुना था।

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कांग्रेस से बगावत करके तत्कालीन गढ़वाल सांसद हेमवती नंदन बहुगुणा ने 1982 में पार्टी और संसद की सदस्यता दोनों ही छोड़ दी थी। पूरे देश की निगाह इस 1982 के उपचुनाव पर टिक गई थी।

एक तरफ सत्ता का प्रभाव था, तो दूसरी तरफ, जनता का समर्थन। दिलचस्प लड़ाई हुई और हेमवती नंदन बहुगुणा चुनाव जीत गए। इससे पहले, सियासी घमासान इस कदर चला कि पूरा देश नतीजे पर टकटकी लगाए देखता रहा।

दून की रैली के फीडबैक का भी असर रहा कि इंदिरा गांधी ने चुनाव में यहां कोई रैली नहीं की। इसके विपरीत, गढ़वाल के एक दर्जन इलाकों में इंदिरा गांधी की सभाएं हुई थीं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ.आरपी रतूड़ी को अच्छे से याद है कि बहुगुणा की रैली में अपार भीड़ उमड़ी थी। वह बताते हैं-मैं भले ही कांग्रेसी था, लेकिन रैली को देखने के लिए उस दिन परेड ग्राउंड पहुंचा था। ऐसी भीड़ उमड़ी थी, जिसे उन्होंने आज तक नहीं देखा है।

इंदिरा मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों ने उस चुनाव में पहाड़ का चप्पा-चप्पा छान मारा था। तत्कालीन गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह कोटद्वार के एक गुरुद्वारे में कई दिन रहे थे। दून के कांग्रेस भवन में भी वह कई दिन डेरा डाले रहे थे।

कांग्रेस के नेता राजेश शर्मा के अनुसार, उस दौरान पार्टी कार्यालय में गजब की रौनक रही थी। ऐसी रौनक किसी चुनाव में नहीं दिखी। कांग्रेस शासित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दून के कई वार्ड आवंटित किए गए थे।

इस उपचुनाव में गढ़वाल के अन्य जिलों में बहुगुणा का प्रदर्शन शानदार रहा था, लेकिन देहरादून के भीतर कांग्रेस से उन्हें कड़ी टक्कर मिली थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र आर्य याद करते हुए कहते हैं-1982 का चुनाव बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण था। उस वक्त के नेताओं के व्यक्तित्व का जनता पर किस कदर प्रभाव था, इसके साफ दर्शन हुए।

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