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सत्ता संग्राम 2019: गुरु बीसी खंडूड़ी और राजनीतिक शिष्य तीरथ सिंह के रिश्तों की दिलचस्प है कहानी

Thu, 11 Apr 2019 06:31 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विपिन बनियाल, अमर उजाला, देहरादून
विपिन बनियाल, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 11 Apr 2019 06:31 AM IST
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Lok sabha elections 2019 interesting history of bc khanduri and tirath singh rawat
बीसी खंडूड़ी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

लोकसभा का मौजूदा चुनाव पौड़ी गढ़वाल सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता बीसी खंडूड़ी की अग्निपरीक्षा से जुड़ा है। एक तरफ कांग्रेस से पुत्र मनीष खंडूड़ी तो दूसरी तरफ भाजपा से राजनीतिक शिष्य तीरथ सिंह रावत चुनाव मैदान में हैं। खंडूड़ी किसके पक्ष में काम करते हैं, किसके लिए कामना करते हैं, यह अनुत्तरित प्रश्न है। जबकि चुनाव के लिए अब बहुत ज्यादा दिन नहीं रह गए हैं। इन स्थितियों के बीच खंडूड़ी और उनके राजनीतिक शिष्य तीरथ सिंह रावत के रिश्तों की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। 

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तीरथ सिंह रावत

इस कहानी की अहम कड़ी 1996 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी है। जिसकी पृष्ठभूमि में उत्तराखंड राज्य नहीं, तो चुनाव का आंदोलन था। चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार बीसी खंडूड़ी का विरोध हुआ तो तीरथ सिंह रावत अपने साथ बदसलूकी की परवाह न करते हुए आंदोलनकारियों से भिड़ गए। दरअसल, राज्य आंदोलनकारी चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने वाले हर नेता का विरोध कर रहे थे। खंडूड़ी को नामांकन के दौरान आंदोलनकारियों ने घेरने की कोशिश की तो तीरथ उनकी ढाल बन गए। तीरथ इस पूरे चुनाव में खंडूड़ी के साथ साये की तरह मौजूद रहे। गुरु-शिष्य के अटूट रिश्ते की पटकथा यहीं से तैयार हुई। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद रिश्ते को परवान चढ़ते हुए फिर सबने देखा।

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गढ़वाल सांसद भुवन चंद खंडूड़ी

अपने राजनीतिक कैरियर में बीसी खंडूड़ी पांच बार सांसद रहे। लोकसभा के चार चुनावों में खंडूड़ी के चुनाव संयोजक तीरथ सिंह रावत ही रहे। दरअसल, वर्ष 1991 में जब पहली बार खंडूड़ी को गढ़वाल सीट से भाजपा का टिकट मिला। उस वक्त तीरथ भाजपा में नहीं थे। उस वक्त उनके पास अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी थी। तीरथ ने खंडूड़ी के लिए इस चुनाव में भी मेहनत की, लेकिन वह और उनके जोड़ीदार मौजूदा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत वर्ष 1996 में खंडूड़ी के सबसे ज्यादा करीब आए। इसके बाद तीरथ भी विद्यार्थी परिषद से भाजपा में शामिल हो गए थे।

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तीरथ सिंह रावत ने नामांकन दाखिल किया - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

इसके बाद हुए हर चुनाव में तीरथ सिंह रावत ही खंडूड़ी के चुनाव संयोजक रहे। संघ प्रचारक की पृष्ठभूमि वाले तीरथ सिंह रावत को वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में चौबट्टाखाल सीट से टिकट मिला और वह विधायक हो गए। इसी दौरान 2013 में वह खंडूड़ी की पहली पसंद होने के कारण भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी बन गए। विद्यार्थी परिषद के जमाने से तीरथ के करीबी रहे पौड़ी जिला भाजपा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विकास कुकरेती के अनुसार तीरथ सिंह रावत के जीवन पर बीसी खंडूड़ी की गहरी छाप रही है। उनके राजनीतिक कैरियर को खंडूड़ी ने ही आगे बढ़ाया है और तीरथ सिंह रावत भी उनके साथ हर स्थिति में चट्टान की तरह खडे़ रहे हैं।

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भाजपा के कद्दावर नेता बीसी खंडूड़ी के लिए तीरथ सिंह रावत की अहमियत का एक बड़ा उदाहरण वर्ष 1997 से जुड़ा है। इस समय लोकसभा के चुनाव घोषित हो चुके थे और गढ़वाल सीट पर भाजपा ने बीसी खंडूड़ी को प्रत्याशी बनाया था। लोकसभा के साथ ही उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्थानीय निकाय, पंचायतों से जुड़ी सीट के चुनाव भी हो रहे थे। खंडूड़ी ने तीरथ के टिकट के लिए पैरवी की, जबकि भाजपा का दूसरा धड़ा सुरेंद्र सिंह नेगी के पक्ष में था।

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