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प्रिंसिपल ने छात्रा पर किए ऐसे जुल्म पढ़कर कांपेगी रूह, 8 पन्नों में पीड़िता ने लिखी दर्दनाक दास्तां

Wed, 09 Jan 2019 08:32 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 09 Jan 2019 08:32 AM IST
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KV principal brutally harassed girl in dehradun victim heart melting story
...दीदी मुझे छोड़ दो मुझे जोशीमठ जाना है। घर जाने दो मुझे...। प्रधानाचार्य से किशोरी ने यह गुहार कई बार लगाई थी, लेकिन उसे मुक्ति नहीं मिली।
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आयोग को लिखे आठ पन्नों के पत्र में किशोरी ने उस पर हुए हर जुल्म का विस्तार से जिक्र किया है। एक बार वह इतनी दुखी हुई कि उसने अपने हाथ की नस ही काट ली, ताकि वह इस ‘जंगल’ से निकलकर अपने घर पहुंच सके। कभी कुछ कहती तो प्रधानाचार्य उसे गालियां देती और उसके पिता के बारे में भी उल्टी सीधी टिप्पणी करती।

बच्ची को प्रधानाचार्य पढ़ाने के लिए अपने साथ लाईं थी। उसे कहीं दाखिला तो नहीं दिलाया, लेकिन उसने जो पहले पढ़ा लिखा तो वह उसके बुरे वक्त में काम आ गया। उसने आठ पन्नों के पत्र में डेढ़ साल तक हुए सभी जुल्मों की पूरी कहानी लिखी है। पत्र में उसने लिखा है कि अंशुम शर्मा उसे बात बात पर डांटती थी। एक दिन गलती से एक फोन कर बैठी तो अंशुम ने उस पर कई तरह के लांछन लगाए।
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कई बातें पत्र में ऐसी लिखी हैं जो समाचार में लिखने योग्य नहीं

एक दिन अंशुम ने आरोप लगाया कि वह उसके पति पर गलत निगाह रखती है। उनके सामने गंदे कपड़े पहनकर जाती है। इसका विरोध करने पर अंशुम ने उसे बहुत मारा। एक दिन गलती से एक कमरे में रखी प्रतिमा टूट गई तो अंशुम ने उसे डेढ़ घंटे तक गालियां दी और मारा पीटा।

कभी कुत्ते घूमाने को कहती थीं तो कभी पार्टी के बाद झूठे बर्तन धुलवाती थीं। तंग आकर जब उसने एक बार घर जाने को कहा तो वह उसे मनाने में लग गई। इसके बाद उसे तमाम धमकियां दी और उसे रोक लिया। इस तरह से उसने तकरीबन डेढ़ साल तक उसका उत्पीड़न किया। इसके अलावा भी उसने कई बातें पत्र में लिखी हैं जो समाचार में लिखने योग्य नहीं हैं।
(सभी बातें लड़की के पत्र के अनुसार)

डीजी साहब! कौन है जिम्मेदार एसपी या थाना

बालिका के साथ हुए इस उत्पीड़न में पुलिस का गैर जिम्मेदार रवैया भी सामने आया है। आयोग की सिफारिश पर चमोली के जोशीमठ थाना पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए।

इन बयानों में जांच अधिकारी ने सभी आरोपों की पुष्टि होने की बात भी कही। बावजूद इसके मुकदमा नहीं दर्ज किया गया। और तो और लड़की को देहरादून में रिपोर्ट दर्ज कराने को कह दिया गया। जबकि, स्पष्ट गाइडलाइन है कि महिला या बालिका के साथ हुए अपराध में कहीं भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

दरअसल, इस मामले में चमोली पुलिस ने हाल ही में मुख्यालय के उन आदेशों को भी धता बताया है जिसमें मुकदमा दर्ज न होने पर जिम्मेदारी तय करने को कहा गया था। नए साल पर पुलिस के मुखिया ने सर्कुलर जारी किया था कि इस साल की यही प्राथमिकता रहेगी कि गंभीर मामलों में तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए।
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जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद दून स्थानांतरित किया जा सकता था

इस गंभीर मामले में जोशीमठ पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया, जबकि सीधे जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद इसे देहरादून भी स्थानांतरित किया जा सकता था। जानकारों की मानें तो बयान दर्ज करने के बाद जोशीमठ पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज करना चाहिए था। ऐसे में अब यह मुख्यालय ही तय करेगा कि इस मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होगी एसपी चमोली की या फिर थाना जोशीमठ की। मामले में एसपी चमोली तृप्ति भट्ट से संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर संपर्क नहीं हुआ। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। 

 अभी मुझे आयोग का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। यदि ऐसी बात है तो मामला गंभीर है और इसकी गंभीरता से ही जांच की जाएगी। यदि कोई भी दोषी हुआ तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। 
- अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था)

ये था मामला

केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी की प्रधानाचार्य पर किशोरी के उत्पीड़न करने का आरोप लगा है। आरोप है कि वे चमोली जनपद की 15 वर्षीय लड़की को पालन पोषण करने के नाम पर यहां लाई थीं, लेकिन यहां उस पर तमाम जुल्म किए।

लड़की का आरोप है कि प्रधानाचार्य ने उस पर कई तरह के लांछन लगाए और बात-बात पर उससे मारपीट की। जैसे-तैसे लड़की प्रधानाचार्य के चंगुल से निकलकर अपने घर पहुंच गई। इसके बाद उसने अपने साथ हुई बर्बरता की कहानी बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बताई। आयोग ने चमोली पुलिस से मामले की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब आयोग ने प्रधानाचार्य को 17 जनवरी को तलब किया है। इसके साथ ही पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था को मामले में कार्रवाई कराने को कहा गया है। 

आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी की प्रधानाचार्य डॉ. अंशुम शर्मा करीब तीन साल पहले अपने रिश्तेदार के माध्यम से चमोली जोशीमठ से एक किशोरी को अपने साथ देहरादून लाईं थी। उन्होंने लड़की के परिजनों से वादा किया था कि वे उसे पढ़ाएंगी और शादी भी कराएंगी। आरोप है कि उन्होंने न उसका स्कूल में दाखिला कराया और न ही उसे घर पर पढ़ाया। उल्टे उसे प्रताड़ित करने लगीं।

करीब तीन माह पहले लड़की उनके चंगुल से छूटी तो उसने अपने एक परिचित के माध्यम से आयोग को शिकायत की। आयोग को भेजे पत्र में लड़की ने बताया कि अंशुम शर्मा उस पर अपने पति के संबंध में तमाम गंदे लांछन लगाती थी। कुछ कहने पर वे बेहद क्रूरतापूर्ण तरीके से मारने पीटने लगती थीं।

पुलिस ने जांच शुरू की और लड़की के बयान दर्ज किए

कई बार लड़की ने अपने घर जाने की सोची, मगर वह कोई न कोई बहाना बनाकर उसे रोक लेती थी। लड़की का आरोप है कि अंशुम शर्मा ने कई बार उससे मारपीट की और घर के काम आदि कराए। उन्होंने लड़की के पिता को लेकर भी कई बार टिप्पणी की। 

ऊषा नेगी ने बताया कि लड़की का पत्र मिलते ही उन्होंने चमोली पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा गया था। पुलिस ने जांच शुरू की और लड़की के बयान दर्ज किए। लेकिन, कोई कार्रवाई करने के बजाय उसे यह कहकर टरका दिया कि मामला देहरादून का है, तो वह मुकदमा भी देहरादून में ही दर्ज कराए। नेगी ने बताया कि पुलिस के इस गैरजिम्मेदार जवाब पर नाराजगी जताते हुए अब पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार को पत्र लिखा गया है। ताकि, आरोपी प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सके। 

हमें शिकायत मिली थी। इसके बाद चमोली पुलिस को जांच करने के लिए कहा गया, मगर चमोली पुलिस ने बच्ची को टरका दिया। उसके माता पिता के बयान भी दर्ज नहीं किए गए। अब प्रधानाचार्य को हमने 17 जनवरी को तलब किया है। 
-ऊषा नेगी, अध्यक्ष बाल अधिकार संरक्षण आयोग

मुझे अभी ऐसी किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। फिलहाल जानकारी ले रही हूं। इसके बाद ही कुछ बता पाऊंगी। 
- डॉ. अंशुम शर्मा, प्रधानाचार्य केवी ओएनजीसी
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