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किन्नर अखाड़े को लेकर अखाड़ा परिषद में विवाद, महंत हरिगिरी बोले-वचन नहीं तोड़ सकता भले पद छोड़ना पड़े

Sun, 03 Jan 2021 07:48 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 03 Jan 2021 07:48 PM IST
सार

  • किन्नर अखाड़े के कुंभ में रोक लगाने पर महामंत्री ने अखाड़ा परिषद के खिलाफ खोला मोर्चा

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Kumbh Mela 2021: Dispute in Akhara parishad after Kinnar Akhara Declared Fake
पत्रकार वार्ता करते महंत हरिगिरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किन्नर अखाड़े को लेकर अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भीतर ही विवाद खड़ा हो गया है। एक जनवरी को प्रयागराज में हुई परिषद की बैठक में किन्नर अखाड़े को फर्जी बताने और कुंभ में उनके प्रवेश पर रोक के फैसले ने तूल पकड़ लिया। इस मामले को लेकर परिषद के दो बड़े पदाधिकारी आमने-सामने आ गए हैं।

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अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनकी ओर से जूना अखाड़े के साथ शाही स्नान के लिए 2019 में प्रयागराज में वचन दिया है।
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वह अपनी दी जुबान नहीं तोड़ सकते और किन्नर अखाड़े के साथ नहीं छोड़ सकते हैं। इसके लिए भले ही उनको अखाड़ा परिषद से निकाला जाए या फिर उनको महामंत्री पद से इस्तीफा देना पड़े।
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श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि अनुबंध के तहत किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े का अंग था और है, आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि अनुबंध से पहले किन्नर अखाड़े ने जूना अखाड़े के साथ आने की इच्छा जताई थी।

इस मामले में उनकी ओर से अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और संतों से कई दौर की वार्ताएं हुई। उनकी सहमति के बाद ही अनुबंध हुआ। उन्होंने कहा कि अब हरिद्वार कुंभ में उनके शाही स्नान पर रोक लगाने का निर्णय उनकी समझ से बाहर है।

अन्य अखाड़ों की तरह ही शाही स्नान करेगा किन्नर अखाड़ा

श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि जैसे अन्य अखाड़े शाही स्नान करते हैं, वैसे ही किन्नर अखाड़ा भी अपने बैनर के साथ स्नान करेगा, ताकि उनकी पहचान बनी रहे। इसके लिए फिर से अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और संतों से वार्ता की जाएगी। कोई रास्ता नहीं निकलता है तो वह किन्नर अखाड़े का साथ नहीं छोड़ेंगे और अपनी जुबान से नहीं पलटेंगे। इसके लिए परिषद उनको निकाल ही क्यों न दें। 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की प्रयागराज में हुई बैठक में महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि शामिल नहीं हो सके थे। बैठक में किन्नर अखाड़े का कोई प्रस्ताव नहीं आया। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि किसी भी नए अखाड़े के पंजीकरण पर रोक लगाई जाए। किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े में समाहित है। कुंभ में जूना अखाड़े किन्नर अखाड़े को शाही स्नान कराए या नहीं उनकी मर्जी है। इसमें परिषद का कोई हस्तक्षेप नहीं है। जहां तक कुंभ के शाही स्नान की बात है वो 13 अखाड़े करेंगे और 14वें किसी अखाड़े को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। 
- श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद 

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