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कुमाऊं विश्वविद्यालय का अजब गजब कारनामा, स्नातक पास चार लाख और सीनेट में सदस्य 667
नवीन सक्सेना, अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:37 PM IST
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कुमाऊं विश्वविद्यालय में उत्तीर्ण स्नातकों की संख्या चार लाख से अधिक है लेकिन सीनेट में पंजीकृत स्नातक सदस्यों की संख्या मात्र 667 ही है।
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सीनेट में सदस्य न बढ़ने देने को विश्वविद्यालय का एक गुट वर्षों से सक्रिय है। इसके पीछे कारण यह है कि अगर सीनेट में सदस्य संख्या बढ़ी तो सालों से कब्जा जमाए बैठे लोगों का चुनावी समीकरण भी बिगड़ जाएगा। यही वजह है कि 667 सीनेट सदस्यों में से निर्वाचित 15 प्रतिनिधि ही कार्य परिषद के लिए चार सदस्यों का चुनाव करेंगे ।
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कुविवि की सीनेट चुनाव प्रक्रिया विवादों में फंस गई है, बावजूद इसके विश्वविद्यालय खामियों पर परदा डालने की कोशिश में लगा है। सीनेट सदस्य बनने के लिए विवि ने न तो कभी व्यापक स्तर पर महाविद्यालयों में प्रचार किया और न ही पंजीकृत स्नातकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत से पूछने पर मालूम चला कि इस वर्ष स्नातक फाइनल की परीक्षा में करीब 24 हजार विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। इस आधार पर अगर हम 20 वर्षों का हिसाब जोड़े तो यह संख्या चार लाख से अधिक ही होगी लेकिन सीनेट में पंजीकृत स्नातकों की संख्या हर साल घट रही है। इसमें बाहरी स्नातकों को घुसने का मौका ही नहीं मिलता।
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कुमाऊं के महाविद्यालयों को कोई सूचना नहीं
कुमाऊंभर में 47 राजकीय महाविद्यालय हैं। किसी भी महाविद्यालय के छात्रों को ही नहीं बल्कि अधिकतर शिक्षकों तक को कुविवि में सीनेट कोर्ट (विश्वविद्यालय सभा) के चुनाव की जानकारी नहीं है।
विदेश में रहने वाले कैसे बनाए सदस्य, हो रही जांच
सीनेट में पंजीकृत स्नातक सदस्यों में विदेश में रहने वाले लोगों को कैसे सदस्य बना दिया गया, इसकी जांच कराई जा रही है। मतदाता सूची में जो पता दर्शाया गया है, उन पर कौन रह रहा है, इसकी रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। सूची में कई सदस्यों के एक ही पते कैसे दर्ज हैं, इसे भी दिखवाया जा रहा है।
- महेश कुमार, कुलसचिव, कुविवि नैनीताल
मतदाताओं के पते का होना चाहिए सत्यापन : हुकुम सिंह कुंवर
हल्द्वानी। कुमाऊं विवि सीनेट कोर्ट के सदस्य हुकुम सिंह कुंवर का कहना है कि जब से विश्वविद्यालय बना है बारी -बारी कुछ लोग ही कार्य परिषद में काबिज होते रहे हैं। विवि में साल दर साल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या कम होना भी इसी का कारण है। उन्होंने सीनेट चुनाव में धांधली रोकने के लिए मतदाताओं के पते का सत्यापन कराने की मांग की है।