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Kisan Andolan : सीमा पर बैरिकेड तोड़कर दिल्ली को कूच कर गए उत्तराखंड के किसान, भारी फोर्स तैनात

Fri, 25 Dec 2020 11:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 25 Dec 2020 11:20 PM IST
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kisan andolan in uttarakhand news: udham singh nagar kisan delhi march, police force deployed at rampur border
काशीपुर में किसानों ने पुलिस का घेरा तोड़ा - फोटो : amar ujala

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करने के लिए शुक्रवार को तड़के से ही जिले भर से किसान रवाना होने लगे लेकिन जगह-जगह पुलिस भी किसानों को रोकने के लिए मुस्तैद रही। बैरियरों पर किसानों की पुलिस से तीखी झड़प हुई। सितारगंज में ट्रैक्टर चढ़ाकर बेरिकैडिंग तोड़ दिए, इस बीच झनकईया थानाध्यक्ष, एसएसआई और एक कांस्टेबल घायल हो गया। सिसईखेड़ा में बेरिकेडिंग तोड़कर आए ट्रैक्टर-ट्रॉली से नानकमत्ता के थानाध्यक्ष कमलेश भट्ट के दाहिने हाथ और बायें पैर पर चोट लगी। नानकमत्ता में झड़प के दौरान एसओ की वर्दी फट गई। बाजपुर में भी बेरिकेडिंग तोड़कर किसानों के 400 वाहनों का जत्था दिल्ली कूच कर गया। इसके अलावा कई जगहों पर पुलिस के रोके जाने पर किसान अपने वाहन छोड़कर पैदल ही चल दिए। 

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रुद्रपुर के किसानों के दिल्ली कूच के एलान के बाद शुक्रवार तड़के चार बजे से ही रामपुर सीमा पर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया। जिले से यूपी और दिल्ली जा रहे सभी चारपहिया वाहनों के नंबर पुलिस ने दर्ज किए। इस दौरान कुछ वाहन स्वामियों से पुलिस की नोकझोंक भी हुई। सुबह करीब 10 बजे दिल्ली कूच कर रहे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंग्रेज सिंह और अन्य किसानों को पुलिस ने रामपुर सीमा पर रोक लिया। इस दौरान कुछ किसानों की पुलिस अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई।
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विरोध स्वरूप किसानों ने हाईवे पर ही धरना शुरू कर दिया, जिससे रामपुर सीमा के दोनों तरफ जाम लग गया। वाहनों को रोके जाने के बाद किसान पैदल ही यूपी की सीमा में प्रवेश कर गए। रुद्रपुर की यूपी सीमा से सटे मलसी गांव, रामनगर आदि गांवों से करतारपुर, सुवा नगला होते हुए रुद्रपुर और किच्छा के सैकड़ों किसानों ने यूपी की सीमा में प्रवेश किया। दोनों राज्यों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर यूपी और उत्तराखंड की पुलिस फोर्स तैनात नहीं रही, जिस कारण किसानों को यूपी में प्रवेश करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। 
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इधर, एनएच-74 से सटे यूपी के डिबडिबा गांव से भी रुद्रपुर और गदरपुर के कई किसान दिल्ली रवाना हुए। पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़, पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा, कांग्रेस नगर अध्यक्ष जगदीश तनेजा, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष संदीप चीमा समेत कई कार्यकर्ता भी इन्हीं मार्गों से दिल्ली रवाना हुए। इसकी भनक लगने पर डिबडिबा गांव से एनएच-74 पर पुलिस फोर्स तैनात की गई लेकिन तब तक सभी किसान व कांग्रेस कार्यकर्ता यूपी की सीमा में प्रवेश कर चुके थे। इधर, एसपी सिटी देवेंद्र पींचा ने कहा कि रामपुर सीमा से यूपी प्रवेश कर रहे किसानों के वाहनों को रोका लेकिन वह पैदल ही चले गए। 

दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेरिकेडिंग तोड़कर भागीं

सितारगंज में शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसान पीलीभीत मार्ग स्थित एक धार्मिक स्थल पर एकत्र हुए। यहां से किसानों ने दिल्ली के लिए कूच किया लेकिन किसानों को आरके ढाबा के पास पुलिस ने बेरिकेडिंग कर रोक लिया। इस पर किसानों ने पीएम मोदी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और वहीं धरने पर बैठ गए। इसी बीच खटीमा और नानकमत्ता की तरफ से आए किसान भी वहां पहुंचकर धरने में शामिल हो गए। 

किसानों के काफिले को देख सीओ सुरजीत कुमार, एसडीएम मुक्ता मिश्र, खटीमा सीओ नरेश ठाकुर, खटीमा एसडीएम निर्मला बिष्ट, नानकमत्ता के थानाध्यक्ष कमलेश भट्ट, झनकइया के दिनेश फर्त्याल समेत भारी पुलिस फोर्स तैनात हो गया। सीओ व एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर वापस भेजने की कोशिश की लेकिन चालकों ने ट्रैक्टर नहीं रोके और बेरिकेडिंग तोड़ते हुए निकल गए। पुलिस ने कुछ दूर तक दोनों वाहनों पर डंडे बरसाए लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े।

दोनों वाहनों की चपेट में आकर यहां एसएसआई सुधाकर जोशी, झनकइया के थानाध्यक्ष दिनेश फर्त्याल और उनका गनर ताजुद्दीन घायल हो गए। वहीं सिसईखेड़ा में बैरीकेटिंग तोड़कर आए ट्रैक्टर-ट्रॉली से नानकमत्ता के थानाध्यक्ष कमलेश भट्ट को भी दाहिने हाथ व बायें पैर में चोट लगी। सभी को सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। 

इधर, हाईवे पर किसानों ने करीब एक घंटे तक धरना भी दिया। एसडीएम निर्मला बिष्ट व सीओ मनोज ठाकुर ने किसानों को फिर समझाया। इस पर किसान धरने से तो उठ गए लेकिन दिल्ली जाने के लिए पैदल ही रवाना हो गए। सीओ सुरजीत कुमार ने बताया कि बेरिकेडिंग तोड़कर भागी दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पता लगाया जा रहा है, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहां यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष गुरसाहब सिंह गिल, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष करन जंग, नगराध्यक्ष हरपाल सिंह, शाकिर अली, किसान रेशम सिंह, सरताज अहमद, संदीप बावा, करमजीत सिंह, बूटा सिंह, जसवीर सिंह, मुख्त्यार अंसारी, बलजिंदर सिंह, तरसेम सिंह, नत्थू यादव आदि थे। 

बेरिकेडिंग तोड़ने की निंदा 
भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष गुरसाहब सिंह गिल ने बैरीकेटिंग तोड़ने की घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि किसानों के जत्थे में घुसे बाहरी अराजक तत्वों ने बेरिकेडिंग तोड़ दी, जिसकी हम निंदा करते हैं। पुलिस प्रशासन से किसानों का कोई झगड़ा नहीं है, जो ट्रैक्टर-ट्रॉली बेरिकेडिंग तोड़कर भागी हैं, वह बाहरी क्षेत्र की थीं और यहां के किसानों की कोई भूमिका नहीं है। 

नानकमत्ता में नोकझोंक में एसओ की वर्दी फटी, सितारे नोचे

किसानों के दिल्ली कूच की खबर मिलते ही थानाध्यक्ष कमलेश भट्ट फोर्स थाना क्षेत्र की सीमा स्थित सिसईखेड़ा गांव में बेरिकेडिंग पर पहुंच गए और किसानों को दिल्ली कूच करने से रोक दिया। आक्रोशित किसानों ने चक्का जाम कर दिया। स्थिति बेकाबू होने की सूचना पर खटीमा एसडीएम निर्मला बिष्ट, सीओ मनोज कुमार ठाकुर भी मौके पर पहुंचे लेकिन उनके समझाने पर भी किसान नहीं माने।

इसके बाद किसान बेरिकेडिंग तोड़ते हुए सितारगंज की ओर की सीमा में प्रवेश करने लगे। सीओ और एसओ ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे उलझ पड़े और खींचातानी में एसओ की वर्दी फट गई और उस पर लगे स्टार भी नोच डाले गए। वहां भारतीय किसान यूनियन के खटीमा  ब्लॉक अध्यक्ष गुरसेवक सिंह, लखविंदर सिंह लक्खा, मनदीप सिंह, मिथुन राणा, बलविंदर सिंह, कर्मजीत सिंह, जसविंदर सिंह, सोनी सिंह, चंद्रपाल सिंह, भुवन सिंह आदि थे। 

काशीपुर में भी किसानों और पुलिस में नोकझोंक 
यहां सुबह किसानों का जत्था ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, निजी वाहनों से काशीपुर से रवाना हुआ। जसपुर में धर्मपुर चौकी के सामने किसान नेताओं की पुलिस के साथ नोकझोंक हुई। हल्दुआ शाहू और कुंडा चौराहे पर भी किसानों को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन किसान मानव श्रृंखला बनाकर पुलिस की नाकेबंदी से निकल गए। सुबह करीब नौ बजे बड़ी संख्या में किसान आईजीएल तिराहे पर पहुंच चुके थे। वहां पुलिस और पीएसी कर्मियों ने बेरिकेडिंग लगाकर किसानों का रास्ता रोक दिया। विरोध में किसानों ने नारेबाजी कर भाकियू (यूथ विंग्स) के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में सड़क पर धरना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद उग्र हुए किसान बेरिकेडिंग तोड़कर गाड़ियों के साथ आगे बढ़ गए। परमानंदपुर मोड़ के पास पुलिस ने किसानों को फिर घेर लिया। परमानंदपुर में एसओ आईटीआई विद्यादत्त जोशी ट्रैक्टर के आगे लेट गए। उनके साथ अन्य पुलिस कर्मियों ने भी ट्रैक्टर के आगे डेरा डाल दिया।

पुलिस अधिकारियों ने हाथ जोड़कर किसानों से आगे न बढ़ने की अपील की लेकिन किसान नेता उल्टे पुलिस अधिकारियों से सहयोग की अपेक्षा करते नजर आए। सूचना पर एसडीएम गौरव कुमार, सीओ अक्षय प्रहलाद कोंडे, कोतवाल संजय पाठक, आईटीआई थानाध्यक्ष विद्यादत्त जोशी पुलिस फोर्स के मौके पर पहुंचे लेकिन किसानों का काफिला पुलिस से धक्कामुक्की करते हुए बाजपुर की ओर रवाना हो गया। 

यहां एएसपी राजेश भट्ट के नेतृत्व में बड़ी तादाद में पुलिस व पीएसी जवानों ने दिल्ली जा रहे किसानों के काफिले को काफी देर रोके रखा। इस दौरान कई बार किसानों का धैर्य टूटा। आखिरकार किसान खेतों के रास्ते यूपी सीमा में प्रवेश कर गए। यूपी बॉर्डर पर भी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन कुछ देर तकरार के बाद किसान मुरादाबाद की ओर रवाना हो गए। कुछ अन्य जगहों पर भी किसानों ने संपर्क मार्गों का सहारा लिया। दिल्ली कूच करने वालों में भाकियू नेता रविंद्र सिंह राणा, करम सिंह पड्डा, प्रेम सहोता, प्रीतम सिंह, राजू छीना, प्रभजोत सिंह, वीरजोत, बब्बू, गुरप्रीत सिंह गोपी आदि थे। 

ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाल-बाल बचे पुलिस कर्मी

आईजीएल तिराहे पर पुलिस के घेरे को तोड़ने के प्रयास में ट्रैक्टर की चपेट में आने से कई पुलिस कर्मी बाल-बाल बच गए। ट्रैक्टर पर काबू पाने के प्रयास में कांस्टेबल विनय कुमार की अंगुली में चोट लग गई। स्थिति काबू करने के लिए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ट्रैक्टर बंद कर दिया। चालक को ट्रैक्टर से उतारने के प्रयास में उसकी पगड़ी ढीली हो गई। इससे किसान भड़क उठे। उन्होंने सरकार और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 

बाजपुर : गुस्साए किसान बेरिकेडिंग तोड़कर रवाना हुए
कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में चल रहे आंदोलन के समर्थन में बाजपुर, जसपुर और काशीपुर के सैकड़ों किसान राज्य सीमा पर बेरिकेडिंग तोड़कर कूच कर गए। हालांकि पुलिस प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

शुक्रवार निर्धारित कार्यक्रम के तहत दोराहा स्थित एक होटल परिसर में जसपुर, काशीपुर और बाजपुर क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए। यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली, कार सहित करीब 400 वाहनों में सवार होकर किसान दिल्ली गुरुद्वारा सिंह सभा के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा और गुरुद्वारा नानकसर ठाठ के मुख्य सेवादार बाबा प्रताप सिंह के नेतृत्व में दिल्ली के लिए रवाना हुए। रामपुर-मुरादाबाद रोड राज्य सीमा पर पुलिस प्रशासन ने सीमेंटेड डिवाइडर और मिट्टी से भरी दो ट्रैक्टर-टॉलियों को सड़क पर आड़े-तिरछे खड़ाकर पूरी तरह से नाकेबंदी कर रखी थी। यहां किसानों के पहुंचने पर उनकी पुलिस अधिकारियों से नोकझोंक हो गई।

भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष करम सिंह पड्डा, दिल्ली गुरुद्वारा सिंह सभा के अध्यक्ष मनजिदर सिंह सिरसा, नानकसर ठाठ गुरुद्वारे के बाबा प्रताप सिंह सहित 10-12 किसानों ने एसएसपी दलीप सिंह कुंवर से वार्ता की। किसानों ने कहा कि आंदोलन में जाने से रोकने का पुलिस प्रशासन को कोई अधिकार नहीं है। घंटाभर का समय बीतने पर किसानों को पुलिस अधिकारियों की तरफ से कोई संतोषजक जवाब नहीं मिला।

इस पर किसान भड़क गए और कुछ किसानों ने सड़क किनारे एक खेत से होकर वाहनों को निकालने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें घेराबंदी कर रोक दिया। इसके बाद किसानों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार किसान नारेबाजी करते हुए बार्डर लगाई गई बेरिकेडिंग को तोड़ते हुए निकल गए। उसके बाद अन्य किसानों का काफिला भी निकलना शुरू हो गया, फिर पुलिस प्रशासन भी उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। वहां पालिकाध्यक्ष गुरजीत सिंह गित्ते, विजेंद्र डोगरा, सुरेंद्र नामधारी, दलजीत सिंह रंधावा, अजीत प्रताप सिंह रंधावा, सतनाम सिंह ढिल्लो, कुलविंदर सिंह किंदा, हरमीत सिंह नीटू, हरमीत सिंह बैचड़, राजेंद्र सिंह नामधारी, सुखदेव सिंह, राजेंद्र सिंह, कुवंरजीत सिंह पूनिया आदि सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।

यूपी सीमा पर खड़े रहे कुछ किसानों के वाहन 
दिल्ली कूच कर रहे कुछ किसानों के वाहन रामपुर सीमा पर भी खड़े नजर आए। कुछ किसान कुछ दूर पैदल चलने के बाद इन्हीं वाहनों से दिल्ली के निकल गए जबकि रामपुर सीमा पर रोके गए कुछ किसानों ने अपने वाहनों को संपर्क मार्गों से यूपी की सीमा में प्रवेश करवाया लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इसे भांप नहीं सके। 

एंबुलेंस को रास्ता देकर निकाला
आरके ढाबा के पास पुलिस और किसानों के बीच नोकझोंक के दौरान 108 सेवा एंबुलेंस जाम में फंस गई। इस पर पुलिस और किसानों ने तत्काल ही एंबुलेंस को रास्ता देकर किच्छा की ओर रवाना किया। 

एसपी सिटी और सीओ से किसानों की कहासुनी 

दिल्ली जाने से रोकने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। इस दौरान एसपी सिटी और सीओ से उनकी कहासुनी हुई। हंगामा बढ़ने पर किसान रामपुर सीमा पर ही धरने पर बैठ गए। बाद में पैदल सीमा को पार कर यूपी पहुंच गए और वाहनों में सवार होकर दिल्ली के लिए निकल पड़े। सीमा पर तैनात भारी पुलिस फोर्स किसानों को नहीं रोक सका। इधर, हंगामे की आशंका को देखते हुए किसानों के सीमा पर पहुंचने से पहले पुलिस ने सड़क के दोनों ओर पड़े पत्थरों को उठवा दिया। हाल में रंपुरा पुलिस चौकी में हुए पथराव के बाद पुलिस ने एहतियातन यह कदम उठाया था। सीमा पर एडीएम जगदीश कांडपाल, प्रभारी एसडीएम जयकिशन सिंह, तहसीलदार डॉ. अमृता शर्मा, कोतवाल एनएन पंत, ट्रांजिट कैंप थाना प्रभारी ललित मोहन जोशी, एसआई भगवान गिरी गोस्वामी समेत कई मौजूद रहे। 

दिल्ली-यूपी के लिए तीन घंटे बाधित रही बस सेवा
किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए सुबह तड़के ही रामपुर सीमा पर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया था। इसका रोडवेज बसों के संचालन पर असर पड़ा। किसान आंदोलन के चलते बसों को लौटाए जाने की आशंका से रोडवेज डिपो से सुबह के समय एक-दो बसें ही संचालित हुईं। किसानों के रामपुर बॉर्डर पर कुछ देर तक चले धरने के कारण जाम को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने इंदिरा चौक से वाहनों का रूट डायवर्ट करते हुए वाया काशीपुर भेजा।

इसके बाद रुद्रपुर डिपो से करीब तीन घंटे तक बसों का संचालन रोक दिया गया। दोपहर एक बजे बाद बसें संचालित हुईं। सहायक महाप्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि स्थानीय रूटों पर बसों का संचालन पूर्ववत जारी रहा। इधर, रामपुर सीमा पर किसानों के पहुंचते ही रामपुर-रुद्रपुर नेशनल हाईवे का रूट बदल दिया गया। रुद्रपुर से रामपुर जाने वाले वाहनों को पुलिस ने इंदिरा चौक से गदरपुर को भेजा। करीब एक घंटे बाद सामान्य रूट का संचालन किया गया। 

किसानों के निकलने के बाद पहुंचा आंसू गैस दस्ता
किसानों का दिल्ली कूच विफल करने के लिए बुलाया गया आंसू गैस दस्ता कई घंटे देरी से पहुंचा। तब तक किसान पुलिस का घेरा तोड़कर आगे बढ़ चुके थे। किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस दस्ते को बुलाया था। दस्ते के आने की उम्मीद में पुलिस और पीएसी के जवानों ने किसानों को आईजीएल तिराहे और परमानंदपुर में उलझाए रखा। पुलिस की रणनीति किसानों पर बल प्रयोग करने की बजाय उन्हें आंसू गैस से तितर-बितर करने की थी। सुबह करीब साढ़े 10 बजे आंसू गैस दस्ता साजो सामान के साथ आईटीआई थाने पहुंचा। लेकिन किसानों के जाने के बाद दस्ते के पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने नाराजगी जताई। 

दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष ने तराई में डाला डेरा

किसानों के दिल्ली कूच को सफल बनाने के लिए दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष मंजिंदर सिंह सिरसा तीन दिनों से तराई में डेरा डाले हुए थे। इस दौरान उन्होंने कई स्थानों पर किसानों के साथ अलग-अलग बैठक कर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की। बृहस्पतिवार रात एएसपी राजेश भट्ट, बाजपुर के प्रभारी कोतवाल सर्वेश पंवार सिरसा से मिलने बाजपुर पहुंचे।

उन्होंने सिरसा से किसानों का दिल्ली कूच टालने का अनुरोध किया। सिरसा ने एएसपी से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को अपना आंदोलन जारी रखने की अनुमति दी है। ऐसे में पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें दिल्ली कूच से किस नियम के तहत रोका जा ारहा है। कोविड का हवाला दिए जाने पर सिरसा ने कहा है कि किसान यूपी होकर दिल्ली जा रहे है, वहां के सीएम हजारों लोगों की रैली कर रहे है। ऐसे में कोविड के बहाने किसानों को उनके अधिकारों से वंचित नही किया जा सकता। सिरसा और अन्य किसान नेता पुलिस अधिकारियों की इस बात पर भड़क गए कि आंदोलन के लिए किसानों को गुमराह किया जा रहा है। सिरसा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को भाजपा की भाषा बोलना शोभा नही देता।

गदरपुर से सैकड़ों किसानों ने किया दिल्ली कूच 
पुलिस की ओर से दिल्ली कूच करने से रोकने के काफी प्रयास के बावजूद यहां के किसान बड़ी संख्या में डेरा कार सेवा के प्रमुख बाबा अनूप सिंह के साथ दिल्ली रवाना हुए। इधर, सीमांत गांवों ग्राम अलखदेवी, अब्दुल्ला नगर और रतनपुरा की सीमा स्थित संपर्क मार्गों पर पुलिस प्रशासन ने बृहस्पतिवार रात से ही बेरिकेडिंग कर दी थी। शुक्रवार को किसान नेता राजेंद्र पाल सिंह, इंद्रपाल संधू, सुभाष बेहड़, प्रीत ग्रोवर, के नेतृत्व में किसान अपने निजी वाहनों व ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर गदरपुर के गुरुद्वारा साहिब गुरु सिंह सभा से ग्राम नवाबगंज स्थित गुरुद्वारा हरगोविद साहिब के लिए निकले लेकिन उन्हें पुलिस ने रतनपुरा सीमा पर रोक दिया गया। इसके बाद वह रुद्रपुर पहुंचे और डिबडिबा गांव से दिल्ली रवाना हुए। वहां पर गुरविंदर सिंह विर्क, सिद्धार्थ भुसरी, मनोज गुंबर, हैप्पी विर्क, धर्मवीर रंधावा, गुरमीत सिंह, करनैल सिंह, सिमरन संधू, विक्रम सिंह, गुरमुख सिंह, अजय बठला, जयपाल सिंह, हरविंदर सिंह, अमर सिंह, मंगल सिंह थे। 

दिनेशपुर में पूर्व विधायक को हिरासत में लेने का विरोध
दिल्ली कूच करने से पहले शुक्रवार सुबह पुलिस ने गदरपुर के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रेमानंद महाजन, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री ममता हालदार और यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित भुल्लर को उनके समर्थकों के साथ घर में ही हिरासत में लेकर नजर बंद कर दिया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। देर शाम को पुलिस ने सभी कांग्रेसियों को रिहा कर दिया। (संवाद) 

किसानों को बिजनौर से भेजना चाहती थी पुलिस
पुलिस अधिकारियों ने किसानों पर वाया बिजनौर दिल्ली जाने के लिए दबाव बनाया लेकिन किसान रामपुर-मुरादाबाद होते हुए दिल्ली जाने की जिद पर अड़ गए। भाकियू नेता रविंद्र राणा ने कहा कि बिजनौर की ओर से दिल्ली जाने पर पुलिस अधिकारियों ने किसानों को न रोके जाने की बात भी कही थी।

पुलभट्टा पर दो घंटे तक किसानों का हंगामा 

 दिल्ली कूच कर रहे सितारगंज और नानकमत्ता के किसानों को पुलिस प्रशासन ने पुलभट्टा और रुद्रपुर रोड स्थित टोल प्लाजा पर रोक दिया। यहां एएसपी देवेंद्र पींचा, एडीएम जगदीश कांडपाल, प्रभारी एसडीएम मुक्ता मिश्रा, सीओ सुरजीत कुमार, पुलभट्टा थानाध्यक्ष विनोद जोशी भारी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे लौट जाएं लेकिन किसान नहीं माने। इस दौरान हुए हंगामे में पुलभट्टा पर दो घंटे तक जाम लगा रहा। 

प्रशासन की सख्ती के बाद किसानों के जत्थे अलग-अलग होकर लिंक मार्गों से दिल्ली कूच कर गए। इनमें से कुछ किसान बहेड़ी की ओर कूच कर गए। वहां कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह संधू, गणेश उपाध्याय, कंवलजीत सिंह बठला, जगरूप सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संजीव कुमार सिंह, बंटी पपनेजा, फिरदौस सलमानी, अरुण तनेजा आदि थे। इधर, पुलभट्टा पर लगे जाम में 108 सेवा की दो एंबुलेंस भी करीब आधे घंटे तक फंसी रहीं। बाद में पुलिस ने इन वाहनों को किसी तरह निकाला।

वहीं, दिल्ली कूच के लिए ग्राम मलसा गिरधरपुर से भी काफी संख्या में किसान रवाना हुए। मलसा निवासी लक्षमण दास बांगा ने बताया कि वह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ के साथ शुक्रवार सुबह ही दिल्ली पहुंच गए थे। उनके साथ तीरथ मुंजाल, राकेश खुराना, मंगल सिंह आदि थे। सुरेश पपनेजा ने बताया कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हजारों किसान डटे हैं। 

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