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Kisan Andolan in Uttarakhand : कृषि कानून के खिलाफ किसानों का राजभवन कूच आज, भानियावाला में पुलिस से तीखी नोकझोंक

Sat, 23 Jan 2021 08:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 23 Jan 2021 08:01 PM IST
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kisan andolan in uttarakhand latest news: farmers rajbhawan march in dehradun
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई - फोटो : amar ujala

दिल्ली में लंबे समय से आंदोलनरत किसानों के समर्थन में जिले के सैकड़ों किसानों ने शनिवार को ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर राजभवन कूच किया। इस दौरान पुलिस ने जगह-जगह अवरोध लगाकर प्रदर्शनकारी किसानों को राजभवन जाने से रोका। इससे पुलिस और किसानों में तीखी नोकझोंक भी हुई। काफी देर की मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा।

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शनिवार को कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर दून में सैकड़ों किसानों और उनके समर्थकों ने अलग-अलग स्थानों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से राजभवन के लिए कूच किया। हरिद्वार, रुड़की, विकासनगर, डोईवाला और ऋषिकेश आदि क्षेत्रों से किसान राजधानी के लिए रवाना हुए। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही शहर के भीतर और बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर दी।
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साथ ही ट्रैफिक को भी कई स्थानों पर डायवर्ट किया गया। डोईवाला से आने वाले किसानों को पुलिस ने मोहकमपुर के पास रोक लिया। कई किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। इस पर पुलिस और किसानों में तीखी झड़प हुई। इसी तरह आशारोड़ी बॉर्डर और सेलाकुई में भी किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की होती रही।
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किसान हर हाल में राजभवन का घेराव करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए किसानों को रोक दिया। पुलिस बार-बार प्रदर्शनकारी किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का अनुरोध करती नजर आई। वहीं, गांधी पार्क से एसएफआई और अन्य संगठनों ने राजपुर रोड होते हुए राजभवन कूच किया। पुलिस ने हाथीबड़कला बैरिकेडिंग पर कार्यकर्ताओं को रोक दिया। यहां भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान को ज्ञापन देने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।

कई संगठन हुए शामिल

राजभवन कूच में किसान सभा, किसान यूनियन, सीटू, महिला समिति, एसएफआई, महिला मंच, बीज बचाओ आंदोलन, वन जन श्रमिक यूनियन, वन गुर्जर यूनियन, सर्वोदय मंडल, किसान यूनियन (सतबीर आर्य) आदि संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। 

इन्होंने किया संबोधित 

कूच के दौरान जगह-जगह आयोजित सभाओं को संयुक्त किसान मोर्चा उत्तराखंड के संयोजक मंडल के सुरेंद्र सिंह सजवाण, किसान सभा के महामंत्री गंगाधार नौटियाल, कोषाध्यक्ष शिवप्रसाद देवली, कमरूद्दीन, सर्वोदय मंडल के हरबीर कुशवाहा, बीज बचाओ आंदोलन के बीजू नेगी, किसान यूनियन के सतबीर सिंह, दौलत कुंवर, वन गुर्जर यूनियन के मुस्तफा चोपड़ा, सीटू के अध्यक्ष राजेंद्र नेगी, जिला महामंत्री लेखराज, महिला समिति की महामंत्री दमयन्ती नेगी आदि ने संबोधित किया।

देहरादून नहीं जा पाए किसान, हाईवे किया जाम 

राजभवन घेराव के लिए देहरादून कूच करने निकले रुड़की के किसानों की अमानतगढ़ चेक पोस्ट पर उत्तराखंड पुलिस से नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। बैरिकेडिंग तोड़कर यहां से किसान किसी तरह आगे बढ़े तो करीब दो किमी दूर बिहारीगढ़ में यूपी पुलिस ने रोक लिया। इस दौरान भड़के किसानों ने हाईवे पर दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया।

नारेबाजी के बीच पांच घंटे तक हाईवे जाम रहा। शाम करीब साढ़े तीन बजे देहरादून और हरिद्वार के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाया। इसके बाद उन्होंने मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। शाम करीब चार बजे किसानों के लौटने पर हाईवे पर आवाजाही बहाल हुई।

शनिवार सुबह करीब दस बजे भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ता मंगलौर गुड़ मंडी पर एकत्र हुए। यहां से सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली और गाड़ियों से दिल्ली-देहरादून हाईवे के रास्ते दून कूच किया। जैसे ही किसान अमानतगढ़ चेक पोस्ट पर पहुंचे तो पहले से मुस्तैद उत्तराखंड और यूपी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस से धक्कामुक्की कर किसान बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े तो लगभग दो किमी आगे यूपी पुलिस ने फिर से उन्हें रोक लिया। भड़के किसानों ने जमकर नारेबाजी की और हाईवे पर दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान सहारनपुर-रुड़की-देहरादून हाईवे पर लंबा जाम लग गया। 

प्रदेश अध्यक्ष चौधरी विनय कुमार ने कहा कि किसान शाम तीन बजे तक एडीएम देहरादून का इंतजार करेंगे। अगर वह मौके पर ज्ञापन लेने नहीं आए तो देहरादून के लिए कूच करेंगे। इसके बाद शाम करीब साढ़े तीन बजे एडीएम देहरादून बीर सिंह बुदियाल और एडीएम हरिद्वार भगवत किशोर मिश्रा मौके पर पहुंचे। किसानों को समझाने के बाद उन्होंने ज्ञापन लिया। इसके बाद किसान लौट गए और करीब चार बजे हाईवे पर यातायात सुचारु हो गया। इस दौरान चौधरी चरण सिंह, जगपाल सिंह, विजय शास्त्री, सचिन कुमार, सुरेश सिंह, संजय सिंह, विनय चौधरी, नूर हसन, इकबाल चौधरी, रामपाल, राहुल सिंह, प्रेम सिंह, सतेंद्र सिंह मौजूद रहे।

कृषि कानून रद्द करने की उठाई मांग 

ज्ञापन में किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार ने फसलों का रेट दोगुना करने, बिजली फ्री देने का वादा किया था, लेकिन नेताओं ने 17 साल में 10 बार अपना वेतन कई गुना कर लिया है और किसान की हालत जस की तस है। इसके बाद किसानों के सिर पर कोरोना काल में तीन काले कानून थोप दिए गए। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान करीब 100 किसान शहीद हो गए। आजाद भारत में इससे बड़ा दुर्भाग्य कोई हो नहीं सकता। किसानों ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की स्वीकृति प्रदान करें।

उकिमो ने हरिद्वार के रास्ते किया कूच

उत्तराखंड किसान मोर्चा ने हरिद्वार के रास्ते देहरादून कूच किया। सैकड़ों की तादाद में किसान शनिवार सुबह 11.30 बजे बेलड़ा में एकत्र हुए और देहरादून के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें ज्वालापुर में ही रोक लिया। इस दौरान किसानों की पुलिस के साथ जमकर धक्कामुक्की हुई। इससे पहले बेलड़ा में किसानों को संबोधित करते हुए मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड़ ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के विरोध में काम कर रही है।

भाजपा सरकार नहीं चाहती कि किसान आत्मनिर्भर बने। इसलिए कृषि कानून जबरदस्ती थोपे जा रहे हैं। जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, प्रदर्शन जारी रहेगा। इस मौके पर महकार सिंह, चौधरी राजेंद्र सिंह, धर्मवीर प्रधान, मोहम्मद आजम, मोहम्मद जाबिर, आकिल हसन, राजपाल सिंह, तेजबीर सिंह, दुष्यंत, नरेंद्र चौधरी, सतबीर सिंह, सतबीर प्रधान मौजूद थे।

राजभवन जा रहे किसानों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर राजभवन घेराव करने जा रहे हरिद्वार को किसानों की रैली को पुलिस ने रानीपुर झाल के पास रोक लिया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस के रोकने पर गुस्साये किसान वहीं धरन पर बैठ गए। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी किसानों को मनाने में सफल रहे। किसानों के धरना समाप्त करने के बाद यातायात सामान्य हुआ।
 
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत शनिवार को उत्तराखंड किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड़ के नेतृत्व में किसान नारसन बार्डर पर एकत्र हुए। किसान यहां से नारेबाजी करते हुए रुड़की और बेलड़ा गांव पहुंचे। बेलड़ा पहुंचते ही किसानों का काफिला काफी बड़ा हो गया। किसानों की रैली जैसे ही रानीपुर झाल पर पहुंचे तो यहां पर पहले से ही तैनात पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने बैरियर लगाकर उनको रोक लिया। किसानों ने बैरियर को हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया तो उनकी पुलिस से नोकझोंक व धक्कामुक्की हो गई। इसके बाद किसान हाईवे पर ही धरने पर बैठ गए और प्रदेश व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इस मौके पर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड़ ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को ठगने का काम कर रही है। केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश का अन्नदाता दुख व विनाश के चक्रव्यूह में फंस गया है। केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से किसानों व आम लोगों को ठगने की तैयारी कर रही है। जहां एफसीआई को खत्म करके केंद्र सरकार अंबानी और अडानी के हाथ सब कुछ देकर किसानों का गला घोंट रही है, वहीं गरीबों से सस्ते राशन की सुविधा छीनने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून खत्म कर केंद्र सरकार एमएसपी को कानून का दर्जा दे।

करीब तीन घंटे बाद किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसके बाद किसान सड़क से उठ गए। इस दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष मौ. आजम, जिलाध्यक्ष महकार सिंह, तहसील अध्यक्ष आकिल हसन, चौधरी धर्मवीर सिंह प्रधान, चौधरी राजपाल सिंह, तेजबीर सिंह, जितेंद्र मुखिया, अनिल सैनी, सोहनवीर सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सरदार जसबीर सिंह, दुष्यंत चौधरी, सतवीर प्रधान, कामिल प्रधान, नरेंद्र कुमार, मोनू प्रधान, सुधीर कुमार, सोनू कुमार आदि मौजूद रहे।  

तीन घंटे तक एक तरफ चला यातायात 

पुलिस ने रानीपुर झाल के पास किसानों के आने की सूचना मिलने पर पहले ही बैरिकेडिंग लगा दी थी। किसान सड़क पर बैठ गए। इसके चलते पुलिस ने हाईवे पर एक तरफ ही यातायात को संचालित किया। करीब तीन घंटे तक एक तरफ ही यातायात चलता रहा। करीब बीस मिनट किसानों ने दोनों तरफ का यातायात रोक दिया था। 

30 से अधिक ट्रैक्टर 

राजभवन का घेराव करने के लिए जा रहे किसान 30 से अधिक ट्रैक्टरों में सवार थे। इसके साथ ही कई लग्जरी कार भी  थी। 

26 जनवरी को किसान दिल्ली कूच करेंगे। जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 
- गुलशन रोड, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तराखंड किसान मोर्चा

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