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Dehradun News: पैदा होते ही बच्चों को खिलानी पड़ रही विटामिन-डी की दवा
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बच्चों के पैदा होते ही उनमें विटामिन-डी की कमी मिल रही है। ऐसे में उन्हें जन्म से लेकर एक वर्ष तक विटामिन-डी की दवा खिलानी पड़ रही है।
जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे कुल 100 में से 70 बच्चाें में विटामिन-डी की कमी मिल रही है। चिकित्सकों ने इसके लिए खासी चिंता जाहिर की है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप स्वरूप के मुताबिक बच्चों में विटामिन-डी की कमी के कई कारण सामने आ रहे हैं। इसमें जन्म से पहले अगर मां गर्भावस्था के दौरान खानपान और शारीरिक गतिविधियों का सही ढंग से ध्यान नहीं रखती है, तो इसका भ्रूण पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है।
उधर, जन्म के बाद अगर बच्चे को बाहरी वातावरण से दूर रखा जाए या पर्याप्त पोषक तत्व न दिए जाएं तो ऐसी स्थिति में भी बच्चों में विटामिन-डी की कमी आ जाती है। ओपीडी में आने वाले 70 प्रतिशत बच्चों में विटामिन-डी की कमी मिल रही है। संवाद
पिछले 10 वर्षों में बदली जीवनशैली से बढ़ रही परेशानी
चिकित्सक के मुताबिक आज से करीब 10 वर्ष पूर्व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का चलन बेहद कम था। ऐसे में बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन सिर्फ बाहरी शारीरिक गतिविधियां ही थीं। ऐसे में बच्चे हर मौसम के प्रति अनुकूल होते थे। उनको पर्याप्त मात्रा में धूप भी मिलती थी, लेकिन आज मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों के चलन ने बच्चों की बाहरी गतिविधियों को सीमित कर दिया है। इसके अलावा असंतुलित खानपान भी बच्चों में विटामिन-डी की कमी का बड़ा कारण बनता है।
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बचाव के उपाय
1- गर्भवतियों के शरीर में आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा रखें।
2- बच्चों को आउटडोर गेम्स का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करें।
3- बच्चों के भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा का ध्यान रखें।
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जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे कुल 100 में से 70 बच्चाें में विटामिन-डी की कमी मिल रही है। चिकित्सकों ने इसके लिए खासी चिंता जाहिर की है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप स्वरूप के मुताबिक बच्चों में विटामिन-डी की कमी के कई कारण सामने आ रहे हैं। इसमें जन्म से पहले अगर मां गर्भावस्था के दौरान खानपान और शारीरिक गतिविधियों का सही ढंग से ध्यान नहीं रखती है, तो इसका भ्रूण पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है।
उधर, जन्म के बाद अगर बच्चे को बाहरी वातावरण से दूर रखा जाए या पर्याप्त पोषक तत्व न दिए जाएं तो ऐसी स्थिति में भी बच्चों में विटामिन-डी की कमी आ जाती है। ओपीडी में आने वाले 70 प्रतिशत बच्चों में विटामिन-डी की कमी मिल रही है। संवाद
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पिछले 10 वर्षों में बदली जीवनशैली से बढ़ रही परेशानी
चिकित्सक के मुताबिक आज से करीब 10 वर्ष पूर्व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का चलन बेहद कम था। ऐसे में बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन सिर्फ बाहरी शारीरिक गतिविधियां ही थीं। ऐसे में बच्चे हर मौसम के प्रति अनुकूल होते थे। उनको पर्याप्त मात्रा में धूप भी मिलती थी, लेकिन आज मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों के चलन ने बच्चों की बाहरी गतिविधियों को सीमित कर दिया है। इसके अलावा असंतुलित खानपान भी बच्चों में विटामिन-डी की कमी का बड़ा कारण बनता है।
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बचाव के उपाय
1- गर्भवतियों के शरीर में आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा रखें।
2- बच्चों को आउटडोर गेम्स का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करें।
3- बच्चों के भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा का ध्यान रखें।