कारगिल विजय दिवस: शादी के दस दिन बाद ही सरहद पर चला गया था बेटा, कफन में लिपटकर लौटा था वापस
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देश के लिए शहीद होने वाले देहरादून के विजय सिंह भंडारी ने सेना में भर्ती होने वाली खबर से परिवार को बेखबर रखा था। सेना में भर्ती होने के कुछ दिन बाद उन्होंने घर में खुशखबरी सुनाई थी।
17 गढ़वाल बटालियन में तैनात जवान विजय सिंह भंडारी 25 की उम्र में ही कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। विजय 21 की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे। विजय के पिता भी सेना में थे। साल 2006 में पिता का भी निधन हो गया था। श्यामपुर, प्रेमनगर स्थित शहीद विजय के घर में उनकी मां तीन बेटियों की शादी के बाद अकेले ही रहती हैं।
शादी के बाद 10 दिन ही रह पाए थे घर
विजय सिंह भंडारी शादी होने के बाद 10 दिन ही घर में रह पाए थे। विजय की मां रामचंद्री देवी ने बताया कि कारगिल युद्ध होने के कारण विजय की छुट्टी निरस्त कर उन्हें बुला लिया गया था। विजय अपनी शादी के लिए दो महीने की छुट्टी पर घर आए थे।
मां को मिलती है 20 प्रतिशत पेंशन
विजय के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी घर छोड़ कर चली गई, लेकिन सरकार की ओर से विजय की पत्नी को पेंशन मिलने लगी। विजय की माता रामचंद्री देवी ने बताया कि बेटे की पेंशन का मात्र 20 प्रतिशत हिस्सा ही उन्हें मिलता है। जबकि विजय की पत्नी का उस घर से अब कोई नाता नहीं है।
अपने खर्च पर बनाया शहीद द्वार
विजय के शहीद होने के बाद पिता ने श्यामपुर, प्रेमनगर स्थित अपने आवास पर अपने खर्च से शहीद द्वार बनाया। साथ ही शहीद द्वार के पास पंचायती मिलन केंद्र भी बनवाया। विजय की मां रामचंद्री देवी ने बताया कि शहीद द्वार की मरम्मत अपने खर्च पर ही कराती हैं।
नहीं बना शहीद स्मारक
प्रेमनगर में 18 सितंबर को चले अतिक्रमण के महाअभियान में शहीद विजय सिंह के नाम का शहीद स्मारक भी तोड़ दिया गया था, लेकिन नौ महीने बीत जाने के बाद भी स्मारक नहीं बनाया गया। समाजसेवी बीरू बिष्ट ने बताया कि इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करने समेत जिलाधिकारी को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।