फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   kailash mansarovar yatra 2019 china officers and guide Rude behaviour pilgrims

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2019: तीर्थयात्री ने सुनाई आपबीती, चीनी अधिकारी और गाइड कर रहे ऐसा व्यवहार

Fri, 21 Jun 2019 05:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 21 Jun 2019 05:11 PM IST
विज्ञापन
kailash mansarovar yatra 2019 china officers and guide Rude behaviour pilgrims
हरिशरणम् जन के प्रमुख स्वामी राम गोविंद दास भाईजी - फोटो : अमर उजाला

तीसरी बार कैलाश मानसरोवर पहुंचे हरिशरणम् जन के प्रमुख स्वामी राम गोविंद दास भाईजी ने चीनी अधिकारियों और गाइड के व्यवहार को निराशाजनक बताया है। उन्होंने चीनी अधिकारियों के बातचीत के लहजे पर भी नाराजगी जताई।

विज्ञापन


यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि, इस कटु अनुभव को छोड़ दिया जाए तो बाबा के दर पर आना हमेशा सुखद होता है। बुद्ध पूर्णिमा पर स्नान करने के बाद भाईजी ने भोलेनाथ के ड्योढ़ी पर मत्था टेका। बताया कि यहां लगातार 22 घंटे से बर्फबारी हुई है।
विज्ञापन


भाईजी ने मानसरोवर से फोन पर हुई बातचीत में अमर उजाला को बताया कि इस बार वह काठमांडू के रास्ते नेपालगंज सिमिकोट, हिल्सा, तकलाकोट के रास्ते मानसरोवर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पहले से आवागमन की स्थिति काफी बेहतर हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पहले वह 2009 में नियालम, सांगा, प्रयाज के रास्ते कैलाश मानसरोवर आए थे। 2017 में तिब्बत की राजधानी ल्हासा के रास्ते यात्रा के लिए आए थे। भाईजी का कहना था कि अपने शहर से निकलने के बाद उन्होंने दस फरवरी से जगन्नाथपुरी में 108 दिवस तक रहकर भागवत प्रवास पूरा किया। यहां से कैलाश मानसरोवर जाने की इच्छा जाग्रत हुई। भगवान शिव की महिमा से वह केदारनाथ मंदिर में मत्था टेकने के बाद हल्द्वानी आएंगे।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल ने बर्फबारी के बीच लिपुपास से चीन तिब्बत सीमा में प्रवेश कर लिया है। चीनी सुरक्षा एजेंसियों के साथ यात्री सकुशल तकलाकोट पहुंच गए हैं। तकलाकोट से यात्री शनिवार को दार्चिन के लिए रवाना होंगे। 

कैलाश यात्रियों के इस पहले दल में 49 पुरुष और नौ महिलाओं सहित कुल 58 यात्री शामिल हैं। बृहस्पतिवार को यह दल रात ढाई बजे नाभीढांग से लिपुपास के लिए रवाना हुआ। आईटीबीपी के चिकित्सक डॉ. राहुल रावत के मुताबिक यात्रियों को बर्फबारी का भी सामना करना पड़ा। दल ने सुबह 7:15 बजे लिपु दर्रे को पार कर तिब्बत चीन सीमा क्षेत्र में प्रवेश किया।

आईटीबीपी सातवीं वाहिनी की मेडिकल, संचार और महिला कमांडो दस्ते ने यात्रियों को चीनी सुरक्षा एजेंसियों के सुपुर्द किया। लिपुपास में यात्रियों के वीजा, सामान आदि की जांच के बाद दल 8:15 बजे करीब 200 मीटर पैदल चल उसके बाद वाहनों में चीन की व्यापारिक मंडी तकलाकोट को रवाना हुआ।

11:15 बजे यात्री सकुशल तकलाकोट पहुंच गए। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार यात्री शुक्रवार को भी तकलाकोट में ही विश्राम करेंगे। शनिवार को यात्री दार्चिन को रवाना होंगे। उच्च हिमालयी क्षेत्र  लिपुपास में अभी तीन फीट तक बर्फ जमा है। बृहस्पतिवार सुबह भी बर्फबारी हुई। 

काठगोदाम पहुंचा कैलाश मानसरोवर यात्रियों का तीसरा दल

कैलाश मानसरोवर यात्रियों का तीसरा दल बृहस्पतिवार को दिल्ली से टीआरसी काठगोदाम पहुंचा। यहां निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया। बाद में यह दल अल्मोड़ा को रवाना हो गया।

टीआरसी प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे ने बताया कि दल में 56 यात्री हैं, जिनमें 36 पुरुष और 20 महिलाएं हैं। लाइजनिंग आफिसर केदार बुरांडी और भारती महापात्रा हैं। सबसे अधिक उम्र के यात्री फरीदाबाद निवासी प्रेम प्रकाश पसरीजा (66) और सबसे कम उम्र के यात्री बंगलूरू निवासी निलेश जगदीश जैन (25) हैं।

यहां पहुंचने पर शुभांशी पांडे, प्रियांशी पांडे, कुमकुम त्रिपाठी समेत निगम के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने तिलक लगाकर और फूल माला पहनाकर यात्रियों का स्वागत किया। इस दौरान यात्री बम-बम का उद्घोष करते रहे। दल में जल निगम हल्द्वानी में कार्यरत अधीक्षण अभियंता डीपी सिंह भी शामिल हैं, जो दूसरी बार यात्रा पर जा रहे हैं।

पंच कैलाश, पंच केदार और पंच बदरी की यात्रा कर चुके हैं नंद लाल
दिल्ली स्थित कस्टम विभाग से सेवानिवृत्त हुए नंद लाल (66) लगातार 9वीं बार कैलाश यात्रा पर जा रहे हैं। वर्ष 2013 में केदारनाथ हादसे के  कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा निरस्त होने का उन्हें मलाल है अन्यथा उनकी यह दसवीं यात्रा होती। नंद लाल अब तक पंच कैलाश (कैलाश मानसरोवर, आदि कैलाश, मणी महेश्वर, श्रीखंड कैलाश और किन्नर कैलाश) के अलावा पंच केदार (केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर) और पंच बदरी (बदरीनाथ, आदि बदरी, योग बदरी, ध्यान बदरी और भविष्य बदरी) की भी यात्रा कर चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed