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हिमालय दिवस 2019: हिमालयी संकल्प की जरूरत, अमर उजाला पड़ताल में सामने आई दस चुनौतियां

Mon, 09 Sep 2019 12:29 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 09 Sep 2019 12:29 PM IST
सार

-विशेषज्ञों ने सुझाए समाधान, कोशिश एकजुट होकर प्रयास करने की

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Himalaya Diwas 2019 Ten most dangerous challenges
फाइल फोटो

विस्तार

समय आ गया है कि हिमालय को उसकी समग्रता में समझा जाए और उसका सम्मान किया जाए। अमर उजाला की दस दिन की पड़ताल में यह साबित भी हुआ है। विशेषज्ञाें की मानें तो हिमालय का यह संकट इकहरा नहीं है। ग्लेश्यिर, नदी, पहाड़, रहन-सहन, आध्यात्मिकता से लेकर हिमालय का हर पहलू किसी न किसी कारण से प्रभावित है। यह भी सामने आया कि हिमालय भू क्षरण के गंभीर संकट का सामना करते हुए अपनी उर्वरा शक्ति खो रहा है। हिमालय ही है कि जो प्लास्टिक से लेकर हर तरह के कचरे का बोझ वहन करने को अभिशप्त हो रहा है। जरूरत है अब हिमालय दिवस पर हिमालय के  सामने उभरकर आ रही चुनौतियों को स्वीकार करने और उनके समाधान के लिए कमर कस कर उठ खड़े होने की।   

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चुनौती नंबर एक: सामूहिक सहयोग की भावना चाहता है हिमालय
हेस्को के संस्थापक निदेशक अनिल जोशी के साक्षात्कार से यह स्पष्ट हुआ था कि हिमालय को अब मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामूहिकता की दरकार है। बकौल अनल जोशी, ‘सरकारों को समझना होगा कि सतत विकास, तभी होगा जब मूल में संरक्षण की भावना हो’। हिमालय की 90 प्रतिशत पर्यावरणीय सेवाओं का उपयोग मैदानी क्षेत्रों के लोग करते है। हिमालय की उदारता को स्वीकार करते हुए उन्हें मुखर होकर हिमालय के पक्ष में आवाज उठानी चाहिए। 
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चुनौती नंबर दो: हिमालय में फूलों, पौधों से लेकर तितलियों के संसार पर संकट
उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के सचिव एसएस रसाईली ने साफ कहा था कि जैव विविधता संरक्षण के लिए बहुत देर कर दी गई है। जैव विविधता है तो जीवन है। संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की गति बढ़ानी होगी और किसी भी तरह के विकास में कोशिश होनी चाहिए कि जैव विविधता को नुकसान कम से कम हो। 
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चुनौती नंबर तीन: वन्यजीवों को उनके ही घर में चुनौती दे रहा है मानव
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस सथ्या कुमार ने कहा था कि वन्यजीवों की स्थानीय प्रजातियों पर खासा संकट है। विकास की चाहत में बड़े बांध और अन्य परियोजनाओं ने वन्यजीवों को संकट में डाल दिया है। मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का एक कारण यह भी है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ रहा है।

चुनौती नंबर चार: हिमालय में जल संकट के संकेत, होना होगा सचेत
वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. डीपी डोभाल के मुताबिक, ग्लेशियर मौसम को नियंत्रित भी करते हैं। मुसीबत यह है कि ग्लेशियरों को कम समझा गया। हमारी निर्भरता ग्लेशियरों पर बहुत ज्यादा है। हिमालय के कई क्षेत्र जल संकट का सामना कर रहे हैं।

चुनौती नंबर पांच: अध्यात्म और योग की थाती को सहेजकर रखना होगा

फोटो वाले बाबा के रूप में जाने जाते स्वामी सुंदरानंद के मुताबिक, हिमालय से ही विश्व में आध्यात्मिक पर्यटन की शुरूआत हुई। हिमालय अनंत प्रेरणाओं का स्रोत है। इस प्रेरणा स्रोत से शक्ति हासिल करने के लिए परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना में निहित दृष्टि को फिर से पाना होगा।

चुनौती नंबर छह: हिमालय को ग्रीन रोड की दरकार
लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर एचके उप्रेती के मुताबिक, हिमालय में सड़क विनाश नहीं विकास का प्रतीक होनी चाहिए। सड़कें इस तरह से बने कि उनके बनने में ऊर्जा का कम से कम उपयोग हो। जल प्रबंधन से लेकर अन्य जरूरतों का ध्यान रखा जाए।

चुनौती नंबर सात: हिमालय को क्लीन टूरिज्म की दरकार
इंडियन प्रोफेशनल राफ्टर एसोसिएशन के महामंत्री मंजुल रावत के मुताबिक, अनियंत्रित पर्यटन हिमालय को नुकसान पहुंचा रहा है। राज्य गठन के बाद से अब तक प्रदेश में एक भी नया पर्यटन स्थल विकसित नहीं हुआ। पर्यटकों की संख्या बढ़ने को ही पर्यटन का विकास नहीं कह सकते। पर्यटन के बढ़ने का मतलब है कि उसमें स्थानीय भागीदारी अधिक हो।

चुनौती नंबर आठ: हिमालय खो रहा अपनी उर्वरा शक्ति
भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. डीवी सिंह के मुताबिक, भू क्षरण हिमालय की गंभीर समस्या है और उत्तराखंड इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित है। भू क्षरण जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन को बढ़ा भी रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए भू प्रबंधन बहुत जरूरी है।

चुनौती नंबर नौ: सुरक्षा की पुरानी पंरपरा दरकिनार, नई अपनाने को नहीं तैयार
आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला के मुताबिक, हिमालय और आपदा का आपस में गहरा नाता है। आपदाओं से निपटने के लिए लोगों ने कई तरीके अपनाए थे। इन  तरीकों को अपनाना होगा और सुरक्षा को हमे अपनी आदत बनाना होगा।

चुनौती नंबर दस: हिमालय की सेहत से हो रहा खिलवाड़ 
गति फाउंडेशन के संस्थापक डा. अनूप नौटियाल के मुताबिक, हमने हिमालय को कूड़ाघर बना दिया है। कूड़े की समस्या से निपटने के लिए सरकार, समाज और कारपोरेट को मिलकर काम करना होगा।

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