वीकली संडे मार्किट मामला: शपथपत्र कोर्ट को गुमराह करने वाला, मेयर के खिलाफ अवमानना याचिका पर 27 को सुनवाई
मेयर अभिषेक रुहेला ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन किए जाने संबंधी शपथपत्र पेश किया था। इसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के अधिक्वता ने कहा कि अभी तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुनवाई के दौरान मेयर अभिषेक रुहेला ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन किए जाने संबंधी शपथपत्र पेश किया। इसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के अधिक्वता ने कहा कि अभी तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया है। वहीं, निगम ने अभी तक वहां से कूड़ा नहीं उठाया है। इसलिए इस जगह का निरीक्षण करने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया जाए ताकि पता चल सके कि कोर्ट के आदेश का पालन हुआ है या नहीं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि जो शपथपत्र कोर्ट में पेश किया गया है वह कोर्ट को गुमराह करने वाला है। पूर्व में कोर्ट ने आईएसबीटी हरिद्वार बाईपास रोड के समीप सप्ताहिक बाजार लगाने के लिए जिस भूमि का चयन किया था, उसे तीन सप्ताह के भीतर साफ कर साप्ताहिक बाजार लगाने के लिए उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे।
यह है मामला
देहरादून के वीकली संडे मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हीरा लाल ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि वह देहरादून के परेड ग्राउंड के पीछे और तिब्बती मार्केट के सामने 2004 से प्रत्येक रविवार को साप्ताहिक बाजार लगाते आ रहे हैं वहां तीन सौ से अधिक लोग दुकानें लगाते हैं और हर माह नगर निगम को तीन सौ रुपये प्रति दुकान के हिसाब से किराया भी देते आए हैं।
याचिका में कहा गया कि 2004 में जिलाधिकारी ने यह जगह उन्हें संडे बाजार लगाने के लिए दी थी लेकिन नगर निगम ने प्रशासन के साछ मिलकर जनहित याचिका में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए उन्हें वहां से हटा दिया और कुछ पहुंच वाले लोगों को नगर निगम ने अन्यत्र दुकानें लगाने के लिए जगह दे दी। याचिका में कहा गया कि संडे को पूरा बाजार बंद रहता है और ट्रैफिक भी कम रहता है, इसलिए वे संडे को परेड ग्राउंड के पीछे और तिब्बती बाजार के सामने साप्ताहिक बाजार लगाते आए हैं।
याचिका में कहा गया कि वे लोग खुद ही वहां पर साफ सफाई भी करते आए हैं। साप्ताहिक बाजार लगाने से गरीब लोगों को सस्ते में सामान मिल जाता है और कई लोगों को रोजगार भी मिलता है। वे महीने में चार दिन दुकान लगाते हैं। समिति का कहना था कि उनके नाम से एक अन्य समिति वहां फर्जी तरीके से नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर चल रही है जिसकी जांच कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।