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Haridwar: बारिश से गंगा में बहकर आ गई शहर की गंदगी, एक घंटे तक बहती रही काली धारा

Fri, 28 Jun 2024 11:02 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 28 Jun 2024 11:02 PM IST
सार

हालत यह रहे कि उत्तरी हरिद्वार के विभिन्न नाले और जल निकास के तमाम रास्तों से गंदगी और कूड़ा बहकर सीधे गंगा में समाहित हो गया। पहाड़ों में हुई बारिश के बाद से जो गंगा मटमैली धारा लेकर बह रही थी, वह पूरी तरह काली दिखी।

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Haridwar News Due to rain garbage of city flowed into Ganga black stream kept flowing for an hour
हरिद्वार में गंगा का पानी मटमैला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां गंगा की पवित्रता और स्वच्छता को लेकर शासन और प्रशासन कितना गंभीर है, इसकी हकीकत शुक्रवार को हुई हल्की बारिश से ही सामने आ गई। लगा। महज आधे घंटे की बारिश से शहर की सारी गंदगी गंगा में समा गई। इस करीब आधे घंटे तक गंगा की धारा काली हो गई। विभिन्न घाटों पर स्नान कर रहे श्रद्धालु गंगा की काली धारा देख घाटों किनारे बैठ गए। करीब एक घंटे तक गंदगी की काली धारा बहती रही।

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हालत यह रहे कि उत्तरी हरिद्वार के विभिन्न नाले और जल निकास के तमाम रास्तों से गंदगी और कूड़ा बहकर सीधे गंगा में समाहित हो गया। पहाड़ों में हुई बारिश के बाद से जो गंगा मटमैली धारा लेकर बह रही थी, वह पूरी तरह काली दिखी।
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गंगा की स्वच्छता और संरक्षण को लेकर किस हद तक लापरवाही बरती जा रही है इसका नजारा ललतारौ पुल से देखा जा सकता है। नगर के बीच से होकर आ रहे नाले में गंदगी बहकर सीधे गंगा में गिर रहा है। इसी तरह मोहल्ला कस्साबान, ज्वालापुर क्षेत्र और उत्तरी हरिद्वार से बहकर गंदा पानी सप्तऋषि के पास गंगा में विलीन हो रहा है।

कहने को चार एसटीपी, वर्तमान में सभी फेल
गंगा में नगर क्षेत्र से बहकर गिरने वाले नाले और नालियों के दूषित पानी को शोधित करने की योजना पूरी तरह ध्वस्त है। कहने को धर्मनगरी में कुल पांच एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित है। इनमें 18 एमएलडी, 27 एमएलडी और 68 एमएलडी जगजीतपुर में, 18 और 14 एमएलडी सराय में एसटीपी स्थापित हैं। इन एसटीपी में दूषित जल को पहुंचाने के लिए पंपिंग स्टेशन भी लगाए गए हैं। हालत यह है कि नगर क्षेेत्र से निकले गंदे पानी को न तो पंपिंग कर एसटीपी पहुंचाया जा रहा है। वहीं, एसटीपी भी पूरी तरह फेल है। शुक्रवार की बारिश के बाद गंगा जिस तरह से गंदगी के साथ बही एसटीपी और पंपिंग स्टेशन के संचालन को लेकर भी सवाल उठने लगे। जिला गंगा संरक्षण समिति के सदस्य रामेश्वर गौड़ का कहना है कि यह एसटीपी दस मिनट की बरसात नहीं झेल सकते हैं। सभी एसटीपी बनने के करीब एक वर्ष बाद ही ओवरफ्लो होने लगे। वर्तमान में सभी एसटीपी की हालत यही है, जबकि शहर में कई किलोमीटर सीवर लाइन डाली जा रही है। एसटीपी के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं बन रही है।

गंगा की स्वच्छता को लेकर धरने पर बैठे
गंगा की स्वच्छता को लेकर शासन-प्रशासन को जगाने दिल्ली से आई साध्वी गीतांजलि और समाजसेवी भीमगोडा निवासी सुभाषचंद नगर निगम परिसर में ही धरने पर बैठ गए हैं। साध्वी गीतांजलि का कहना है कि यदि गंगा के अस्तित्व को लेकर समाज नहीं जागा तो वह दिन दूर नहीं है जब सभी जीवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदू सनातन संस्कृति में गंगा का वह स्थान है, जिसके बराबर किसी का नहीं है। उन्होंने कहा कि नगरों से गंदगी सीधे गंगा में डालना आस्था के साथ ही जीवनदायिनी के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। समाजसेवी सुबाषचंद का कहना है कि वह कई वर्षों तक गंगा घाट को पॉलीथिन मुक्त कराने और सीवर जैसी गंदगी को गंगा में जाने से रोकने लिए अभियान चलाए। इसका अब तक कोई सार्थक परिणाम नहीं मिला। दोनों ने कहा कि यदि गंगा की स्वच्छता को लेकर कदम नहीं उठाया गया तो उनका आंदोलन लगातार चलता रहेगा।

शासन स्तर पर मामले को उठाएंगे श्रीगंगा सभा के पदाधिकारी
श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि सरकार ने हजारों करोेड़ की योजना गंगा की स्वच्छता के लिए बनाई, लेकिन लापरवाह अधिकारियों के चलते योजनाएं मूर्त रूप नहीं ले पा रही हैं। गंगा की स्वच्छता की अनदेखी पूरी तरह हिंदू धर्म की आस्था पर चोट पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाने की जरूरत है। गंगा की स्वच्छता को लेकर शासन स्तर पर भी मामले को उठाया जाएगा।

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