फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Government Land Auction will held in uttarakhand on circle Rate Soon

उत्तराखंड: अब जरूरतमंदों को मिल सकेगी सरकारी भूमि, सर्किल रेट के आधार पर होगी नीलामी

Wed, 22 Jan 2020 10:24 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 22 Jan 2020 10:24 AM IST
सार

  •  सरकारी भूमि के बंदरबांट पर रोक लगाने की तैयारी
  •  राजस्व विभाग ने तैयार किया नई नीति का प्रस्ताव

विज्ञापन
Government Land Auction will held in uttarakhand on circle Rate Soon
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

प्रदेशभर में उपलब्ध खाली सरकारी भूमि अब जरूरतमंदों को मिल सकेगी। इसके लिए राजस्व विभाग ने नई नीति तैयार की है। इसके तहत टेंडर जारी होंगे और न्यूनतम बोली सर्किल रेट के आधार पर तय की जाएगी।

विज्ञापन


प्रदेश में पिछले 19 साल से चल रहे सरकारी भूमि की बंदरबांट पर सरकार ने अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत जरूरतमंद लोगों को समान रूप से सरकारी जमीन लेने का मौका भी मिलेगा। सरकारी जमीन का जिले स्तर पर रजिस्टर बनेगा और भूमि आवंटन के लिए टेंडर निकाला जाएगा।
विज्ञापन


प्रदेश सरकार इस समय निजी क्षेत्र में लोगों को गवर्मेंट ग्रांट एक्ट सहित अन्य कई तरीकों से पट्टे आदि पर भूमि उपलब्ध कराती है। सरकार के इन फैसलों पर अकसर सवाल भी उठते रहे हैं। लोग इसे सरकारी भूमि की बंदरबांट भी कहते रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


शासन का मानना है कि इस नई नीति से लोगाें को सरकारी भूमि पाने का समान अवसर मिलेगा। नीति में स्पष्ट रूप से इसकी व्यवस्था की जा रही है। इससे सरकार को दोहरा फायदा होगा। पहला यह कि जिले स्तर पर यह स्पष्ट हो पाएगा कि कहां कितनी सरकारी भूमि उपलब्ध है। दूसरा यह कि सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।

नई नीति में ये होगी व्यवस्था

- जिले स्तर पर डीएम सरकारी भूमि को चिह्नीत करेंगे और रजिस्टर तैयार कराएंगे।
- जिलाधिकारी एक कमेटी का गठन करेंगे। 
- यह कमेटी रजिस्टर में दर्ज भूमि का सार्वजनिक रूप से प्रकाशन कराएगी और इच्छुक लोगों से आवेदन मांगेगी।
- भूमि की न्यूनतम दर सर्किल रेट के आधार पर तय होगी।

प्राथमिकता भी तय होगी
लोगों को जमीन देने की प्राथमिकता तय होगी। इसमें भूमि के उपयोग का प्रावधान, मसलन उद्योग, जैविक खेती आदि भी देखा जाएगा। राज्य सरकार अपनी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को वरीयता देगी। यह भी देखा जाएगा कि परियोजना कितने समय में पूरी होगी। इससे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। अधिक लोगों को रोजगार देने वाली परियोजनाओं को आगे रखा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि सरकार को इससे राजस्व का कितना फायदा होगा।

क्यों पड़ी जरूरत

सरकारी भूमि को निजी क्षेत्र को देने की स्थिति में प्रदेश सरकार की नीति के पारदर्शी न होने का आरोप लगता रहा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी इसमें सरकार को पारदर्शी नीति बनाने का आदेश जारी किया था।

इसी दबाव में सरकार को अब यह नीति बनानी पड़ रही है। शासन के सूत्रों का कहना है कि इस नीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उच्च स्तर पर मंथन जारी है और नीति को मंत्रिमंडल के समक्ष भी रखा सकता है। 

सरकारी भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से कई आदेश अलग-अलग समय में जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के आधार पर ही शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। शासन स्तर पर यह मामला विचाराधीन है। नीति को अंतिम स्वरूप मिल जाने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। इतना जरूर है कि निर्णय जल्द से जल्द लेने की कोशिश की जा रही है।
- सुशील कुमार, सचिव राजस्व

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed