कैबिनेट के इस फैसले से युवाओं की बल्ले-बल्ले, पढ़ेंगे तो नहीं रहेगा खुशी का ठिकाना
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कैबिनेट ने युवाओं के लिए एक ऐसा फैसला लिया है जिसके बाद उनके लिए भविष्य संवारने के लिए खास मौके मिलेंगे। उत्तराखंड राज्य में स्टार्ट अप विकसित करने के लिए मंत्रिमंडल ने नई स्टार्ट-अप पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इस नीति से स्टार्ट अप उद्यमियों को इन्क्यूबेटर की सुविधा स्थापित करने पर सरकार की तरफ से प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इसके साथ ही कृषि, स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी, शिक्षा, पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, आयुर्वेद, फार्मास्युटिकल सेक्टर को फोकस एरिया में शामिल कर उद्यमियों को पॉलिसी का लाभ मिलेगा। स्टार्ट अप के प्रस्तावों पर उद्यमियों का चयन करने के लिए विभाग की ओर से राज्य स्टार्ट अप काउंसिल का गठन किया जाएगा।
राज्य में इन्क्यूबेशन व स्टार्ट अप क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के साथ तकनीकी शिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षित छात्रों को उद्यमी के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने जून-2017 में स्टार्ट अप नीति तैयार की थी लेकिन इन्वेस्ट इंडिया की ओर से उत्तराखंड में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने को नए सुझाव को शामिल कर नए सिरे से स्टार्ट अप बनाई है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस नीति को मंजूरी मिल गई।
नीति में स्टार्ट अप के लिए यह है खास
नीति में स्टार्ट अप के लिए यह है खास
काउंसिल के माध्यम से चयनित स्टार्ट अप को ‘ए’ श्रेणी के जिलों में व्यवसाय स्थापित करने के लिए मासिक भत्ता मिलेगा। इसमें सामान्य वर्ग को 10 हजार, एससी, एसटी, महिला, दिव्यांग वर्ग को 15 हजार (प्रति स्टार्ट अप) मासिक भत्ता एक साल तक दिया जाएगा। नए उत्पाद की मार्केटिंग के लिए सामान्य वर्ग के स्टार्ट अप को 5 लाख और एससी, एसटी व महिला वर्ग को 7.5 लाख तक की सहायता सरकार देगी।
एमएसएमई नीति के अनुसार स्टांप ड्यूटी में छूट भी मिलेगी। स्टार्ट अप उद्यमी की ओर से प्रदेश के भीतर ही माल की आपूर्ति करने पर एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति की जाएगी। मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटरों को तीन साल की अवधि तक संचालन एवं प्रबंधन खर्च के रूप में दो लाख प्रति वर्ष दिया जाएगा। स्टार्ट अप पॉलिसी अधिसूचना जारी होने के सात साल तक लागू रहेगी।
स्टार्ट अप के लिए ये शर्ते
स्टार्ट अप के लिए ये शर्ते
नीति में एक इकाई को स्टार्ट-अप माना जाएगा। पंजीकरण की तिथि से सात वर्ष की अवधि वाली फर्म, संस्था या कंपनी स्टार्ट अप के लिए पात्र होगी लेकिन जैव प्रौद्योगिकी सेक्टर के लिए यह अवधि पंजीकरण तिथि से 10 वर्ष तक होगी। सालाना टर्नओवर 25 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए। पहले मौजूद किसी व्यवसाय के विभाजन व पुनर्निर्माण के माध्यम से बनाई फर्म या संस्था को स्टार्ट अप नहीं माना जाएगा।
छह माह में होगी आइडिया चैलेंज प्रतियोगिता
उद्यमिता की भावना को विकसित करने के लिए नीति में आइडिया चैलेंज प्रतियोगिता आयोजित करने का प्रावधान किया गया। यह प्रतियोगिता राज्य के प्रत्येक मंडल में छह माह में कराई जाएगी। विजेता को 50 हजार का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ वार्षिक फेस्टिवल भी होगा। इसके साथ ही सरकार स्टार्ट अप पोर्टल व मोबाइल एप भी विकसित करेगी। इसमें नीति से संबंधित जानकारी दी जाएगी।