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पश्चिमी विक्षोभ में बाधा से ग्लेशियरों को नुकसान
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 15 Nov 2016 10:27 AM IST
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गंगोत्री क्षेत्र के ग्लेशियरों के निर्माण में सहायक वेस्टरलीज हवाएं (पश्चिमी विक्षोभ) रास्ते में ही ठिठकने लगी हैं। इससे गंगोत्री क्षेत्र का वातावरण बदलने लगा है।
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वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानिकों ने गंगोत्री क्षेत्र के पानी की जांच से यह खुलासा किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक तो गंगोत्री क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से ही बर्फबारी होती है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वेस्टरलीज हवाओं के आने का समय बदल रहा है। उन्होंने चिंता जताई है कि यदि इस बार दिसंबर में वेस्टरलीज हवाएं नहीं आईं तो गंगोत्री ग्लेशियर को और नुकसान होगा।
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गंगोत्री क्षेत्र के पानी की आइसोटोपिक जांच से खुलासा हुआ है कि गंगोत्री क्षेत्र भारतीय मानसून के शेडो जोन (अप्रभावी) में आता है। यहां दिसंबर में पड़ने वाली बर्फ और ठोस होकर ग्लेशियरों के निर्माण में सहायक होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक वेस्टरलीज हवाएं दो हजार किलोमीटर दूर भूमध्यसागर से यहां आती हैं लेकिन तापमान में हो रहा बदलाव इनके रास्ते में रुकावट बन रहा है। यदि वेस्टरलीज हवाएं देर से आईं तो यहां पड़ने वाली बर्फ बढ़े तापमान के कारण पिघल कर बह जाएगी।
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बीते 135 वर्षों में सितंबर 2016 रहा सबसे गर्म
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के गंगोत्री प्रभारी डॉ. समीर तिवारी ने कहा कि गंगोत्री क्षेत्र में तीन साल से अध्ययन जारी है। पाया गया है कि बीते 135 वर्षों में सितंबर 2016 सबसे गर्म रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस क्षेत्र में सही समय पर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने को लेकर आशंका है। यदि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने का समय बदला तो गंगोत्री क्षेत्र का पर्यावरण बिगड़ेगा।