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पिता की शराब छुड़ाने को बेटी ने उठाई कांवड़, दिल्ली से पैदल पहुंची हरिद्वार

Wed, 12 Jul 2017 10:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की Updated Wed, 12 Jul 2017 10:27 AM IST
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fourteen year old girl become kanwar for her father
arti - फोटो : amarujala

पिता की शराब छुड़ाने के लिए एक 14 वर्षीय बेटी ने पहली बार कांवड़ उठाई है। उसे विश्वास है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से उसके पिता की नशे की लत छूट जाएगी और एक बार फिर से उसके घर में खुशियां आएंगी।

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यही कारण है कि मां के कहने पर वह दादी के साथ दिल्ली से पैदल हरिद्वार पहुंची और फिर जल भरकर लौट रही है।
 
दिल्ली निवासी बसंती-55 पिछले कई सालों से कांवड़ यात्रा कर रहीं हैं। भोलेनाथ के प्रति आस्था और विश्वास उसे हर साल दिल्ली से हरिद्वार ले आता है। उसने बताया कि बीमारी के कारण वह अक्सर परेशान रहती थी, लेकिन भोले की कृपा से न सिर्फ उसकी बीमारी ठीक हुई बल्कि नया जीवन भी मिला।
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यही कारण है कि पिछले 15 सालों से वह कांवड़ यात्रा कर रही है। पहली बार उसके साथ आई पोती आरती कहती है कि दादी और मां की प्रेरणा से उसने कांवड़ उठाई है। बताया कि पहले पिता भी कांवड़ लेकर हरिद्वार आते थे, लेकिन पिछले दो-तीन सालों से वह नशे के आदी हो चुके हैं।
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नशे के कारण परिवार बरबादी के कगार पर पहुंच गया है और घर में आर्थिक तंगी गहराती जा रही है। उसने कहा कि अब भगवान भोलेनाथ ही परिवार में फिर से खोई खुशियां वापस कर सकते हैं। यही कारण है कि कांवड़ लेकर वह पहली बार आई है। 

पति ने छोड़ा साथ अब भोलेनाथ की ही आस

fourteen year old girl become kanwar for her father
hasto - फोटो : amarujala

शादी के करीब दो साल बाद पति का साथ छूट गया, तब बेटी महज सात माह की थी। ऐसे में भोलेनाथ की कृपा से ही बेटी को पढ़ा लिखाकर बड़ा किया और फिर उसकी शादी की। यही नहीं एक गोद लिए बेटे का भी पालन पोषण किया। भोलेनाथ के आर्शीवाद से पिछले 20 साल से कांवड़ यात्रा कर रही हूं और जब तक जीवन है कांवड़ उठाती रहूंगी। यह कहना है कि दिल्ली करोलबाग गफ्फार मार्केट निवासी हस्तो-70 का।

दिल्ली से कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंची हस्तो ने बताया कि भोलेनाथ के प्रति उसकी आस्था अटल है। यही कारण है कि पिछले 20 सालों से वह कांवड़ यात्रा कर रही है। उसने बताया कि इससे उसे नई ऊर्जा और शक्ति मिलती है, जिससे वह किसी भी परेशानी का मुकाबला कर सकती है।

बताया कि भोलेनाथ की कृपा से ही सात माह की बच्ची को न सिर्फ पाल पोषकर बड़ा किया बल्कि इंटर तक शिक्षा दिलाई। इसके बाद उसकी शादी की। जीवन में अकेलापन दूर करने के लिए भोलेनाथ ने एक बच्चे को गोद में डाल दिया। फुटपाथ पर एक महिला की मृत्यु के बाद हस्तो ने बच्चे को अपना लिया।

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