आपका घर टूटने के पीछे कहीं ये 'बीमारी' तो नहीं
क्या इन दिनों आपके घरेलू झगड़े बढ़ गए हैं तो इसके पीछे कोई 'बीमारी' भी वजह हो सकती है।
अगर ऐसा है तो एक बार क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह जरूर ले लें। इसके पीछे वजह पति-पत्नी किसी में भी डिसऑर्डर (मानसिक बीमारी) होना हो सकता है।
महिला हेल्पलाइन में आने वाले मामलों में इन दिनों ऐसी वजह भी ढूंढी जा रही है। ऐसे खास मामलों को बृहस्पतिवार के दिन ऐच्छिक ब्यूरो में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के सामने रखा जा रहा है।
हेल्पलाइन में आने वाले मामलों में पति-पत्नी दोनों का ही व्यवहार देखा जाता है। इसके साथ ही उनके हाथों और उंगलियों को स्पर्श करके भी इस बात का पता लगाया जा सकता है कि उन्हें कौन सा डिसऑर्डर है। उसी के आधार पर उनकी काउंसिलिंग की जाती है। साथ में दवाईयां भी खिलाई जाती हैं। ऐच्छिक ब्यूरो में ऐसे विशेष केस सुने जाते हैं।
इन मामलों को सुनने के लिए हेल्पलाइन प्रभारी के साथ ही क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट को भी यहां बिठाया जाता है। पहली काउंसिलिंग में पति-पत्नी का व्यवहार समझने की कोशिश की जाती है। दूसरी काउंसिलिंग से उनका ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है।
ये हैं कुछ खास डिसऑर्डर
- सिजोफिनिया डिसऑर्डर- ऐसा व्यक्ति बार-बार हाथ झटकता है। ऐसे व्यक्ति को लगता है कि जब भी कहीं चार लोग बैठे बात कर रहे हैं तो वे उसके बारे में ही कर रहे हैं।
- ओसीडी (ओवर कंपलसिव डिसऑर्डर)- ऐसा व्यक्ति बार-बार हाथ धोने या सफाई करने में ही लगा रहता है। उसके हाथों को देखकर यह साफ पता लग जाता है।
- हाईपर एक्टिव डिसऑर्डर- ऐसा व्यक्ति एक बात से सीधे उसके निर्णय पर पहुंच जाता है। यानी एक बात के साथ आगे का परिणाम खुद ही तय कर लेता है।
- एडजस्टमेंट डिसऑर्डर- बात करने पर ऐसे लोगों के बारे में जाना जा सकता है। जो कि दूसरे व्यक्ति के साथ एडजस्ट करने में हमेशा दिक्कत महसूस करते हैं।
- बाईपोलर डिसऑर्डर- इसमें एक ही पल में व्यक्ति बहुत सकारात्मक होता है और दूसरे ही पल में बेहद नकारात्मक बातें करने लगता है।
- मैनिक डिसऑर्डर- ऐसा व्यक्ति चोरी करने लगता है। उसे इस बात का एहसास कराना होता है, कि वह गलत कर रहा है।
- एल्कोहलिक डिसआर्डर- यह शराब पीने वालों को होता है। ऐसे लोगों के हाथों में काफी वाइब्रेशन होने लगते हैं।
हेल्पलाइन में आने वाले 30 प्रतिशत मामले ऐसे ही हैं। ऐसे लोगों को काउंसिलिंग की बेहद जरूरत होती है। हम दवाईयां भी देते हैं। ऐसे व्यक्तियों को अधिकतर व्यस्त रखने की कोशिश करते हैं। कुछ ना कुछ ऐसा काम दे दिया जाता है, जिसे वह करते रहें। इन डिसऑर्डर को दूर करने का सबसे बेहतर तरीका व्यस्तता ही है।
- डॉ. मुकुल, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट
ऐसे मामलों को हम बृहस्पतिवार के दिन ऐच्छिक ब्यूरो में रखते हैं। हम मामला सुनकर साधारण काउंसिलिंग करते हैं तो क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट अपने हिसाब से मामलों को समझते हैं। पहली काउंसिलिंग हम खुद कर मामले को समझ लेते हैं। इसके बाद ही टीम के सामने मामला लाया जाता है।
- दीपिका राणा, प्रभारी, महिला हेल्पलाइन