फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   family quarrel can be possible due to mental disorder.

आपका घर टूटने के पीछे कहीं ये 'बीमारी' तो नहीं

Sat, 25 Jul 2015 09:02 AM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 25 Jul 2015 09:02 AM IST
विज्ञापन
family quarrel can be possible due to mental disorder.

क्या इन दिनों आपके घरेलू झगड़े बढ़ गए हैं तो इसके पीछे कोई 'बीमारी' भी वजह हो सकती है।

विज्ञापन


अगर ऐसा है तो एक बार क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह जरूर ले लें। इसके पीछे वजह पति-पत्नी किसी में भी डिसऑर्डर (मानसिक बीमारी) होना हो सकता है।

महिला हेल्पलाइन में आने वाले मामलों में इन दिनों ऐसी वजह भी ढूंढी जा रही है। ऐसे खास मामलों को बृहस्पतिवार के दिन ऐच्छिक ब्यूरो में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के सामने रखा जा रहा है।

हेल्पलाइन में आने वाले मामलों में पति-पत्नी दोनों का ही व्यवहार देखा जाता है। इसके साथ ही उनके हाथों और उंगलियों को स्पर्श करके भी इस बात का पता लगाया जा सकता है कि उन्हें कौन सा डिसऑर्डर है। उसी के आधार पर उनकी काउंसिलिंग की जाती है। साथ में दवाईयां भी खिलाई जाती हैं। ऐच्छिक ब्यूरो में ऐसे विशेष केस सुने जाते हैं।
विज्ञापन


इन मामलों को सुनने के लिए हेल्पलाइन प्रभारी के साथ ही क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट को भी यहां बिठाया जाता है। पहली काउंसिलिंग में पति-पत्नी का व्यवहार समझने की कोशिश की जाती है। दूसरी काउंसिलिंग से उनका ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

ये हैं कुछ खास डिसऑर्डर

family quarrel can be possible due to mental disorder.

- सिजोफिनिया डिसऑर्डर- ऐसा व्यक्ति बार-बार हाथ झटकता है। ऐसे व्यक्ति को लगता है कि जब भी कहीं चार लोग बैठे बात कर रहे हैं तो वे उसके बारे में ही कर रहे हैं।

- ओसीडी (ओवर कंपलसिव डिसऑर्डर)- ऐसा व्यक्ति बार-बार हाथ धोने या सफाई करने में ही लगा रहता है। उसके हाथों को देखकर यह साफ पता लग जाता है।

- हाईपर एक्टिव डिसऑर्डर- ऐसा व्यक्ति एक बात से सीधे उसके निर्णय पर पहुंच जाता है। यानी एक बात के साथ आगे का परिणाम खुद ही तय कर लेता है।

- एडजस्टमेंट डिसऑर्डर- बात करने पर ऐसे लोगों के बारे में जाना जा सकता है। जो कि दूसरे व्यक्ति के साथ एडजस्ट करने में हमेशा दिक्कत महसूस करते हैं।

- बाईपोलर डिसऑर्डर- इसमें एक ही पल में व्यक्ति बहुत सकारात्मक होता है और दूसरे ही पल में बेहद नकारात्मक बातें करने लगता है।

- मैनिक डिसऑर्डर- ऐसा व्यक्ति चोरी करने लगता है। उसे इस बात का एहसास कराना होता है, कि वह गलत कर रहा है।
- एल्कोहलिक डिसआर्डर- यह शराब पीने वालों को होता है। ऐसे लोगों के हाथों में काफी वाइब्रेशन होने लगते हैं।

हेल्पलाइन में आने वाले 30 प्रतिशत मामले ऐसे ही हैं। ऐसे लोगों को काउंसिलिंग की बेहद जरूरत होती है। हम दवाईयां भी देते हैं। ऐसे व्यक्तियों को अधिकतर व्यस्त रखने की कोशिश करते हैं। कुछ ना कुछ ऐसा काम दे दिया जाता है, जिसे वह करते रहें। इन डिसऑर्डर को दूर करने का सबसे बेहतर तरीका व्यस्तता ही है।
- डॉ. मुकुल, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट

ऐसे मामलों को हम बृहस्पतिवार के दिन ऐच्छिक ब्यूरो में रखते हैं। हम मामला सुनकर साधारण काउंसिलिंग करते हैं तो क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट अपने हिसाब से मामलों को समझते हैं। पहली काउंसिलिंग हम खुद कर मामले को समझ लेते हैं। इसके बाद ही टीम के सामने मामला लाया जाता है।
- दीपिका राणा, प्रभारी, महिला हेल्पलाइन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed