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एम्स ऋषिकेश की पांचवीं मंजिल पर पेट्रोल की बोतल लेकर चढ़ा बुजुर्ग, पीछे है ये वजह

Tue, 16 Apr 2019 12:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 16 Apr 2019 12:06 PM IST
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Expelled old man on AIIMS rishikesh building with petrol bottle
पेट्रोल की बोतल लेकर छत पर चढ़ा बुजुर्ग - फोटो : अमर उजाला

एम्स से निष्कासित कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर एक व्यक्ति पेट्रोल की बोतल हाथ में लेकर एम्स की पांचवीं मंजिल पर चढ़ गया और आत्मदाह की धमकी देने लगा। इस बीच अन्य अनशनकारी एम्स प्रशासन से वार्ता कर निष्कासित कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। आखिरकार तीन चक्र की वार्ता के बाद तय हुआ कि 35 निष्कासित कर्मचारियों को दोबारा एम्स में आउटसोर्सिंग पर रखा जाएगा।

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दाताराम ममगाईं पुत्र स्व. गोविंद राम ममगाईं निवासी 14 बीघा, वार्ड नंबर आठ गली नंबर तीन सुबह साढ़े छह बजे एम्स की छत पर चढ़ गए और लगातार मांग करते रहे कि जिन कर्मियों को एम्स से निष्कासित किया गया है, उन्हें दोबारा बहाल किया जाए। ऐसा नहीं करने पर वह आत्मदाह कर लेगा। एम्स प्रशासन ने एसएसपी देहरादून सहित स्थानीय पुलिस प्रशासन को फैक्स भेजकर मामले संबंधी अवगत कराया। इसके बाद तहसीलदार रेखा आर्य और कोतवाल रितेश शाह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी बुलवाई गई। 
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काफी समझाने के बाद भी दाताराम अपनी मांगे पूरी हुए बिना नीचे उतरने को राजी नहीं हुए। इस बीच दर्जाधारी भगतराम कोठारी, मेयर अनिता ममगाईं सहित कई पार्षद भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे। इस दौरान वार्ताओं और नारों का दौर घंटो चलता रहा। प्रदर्शन के दौरान कुछ युवा तोड़फोड़ की फिराक में भी दिखे। उन्हें कोतवाल ने समझाकर शांत किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारी एम्स के फोटोग्राफर से भिड़ गए। हाथापाई की नौबत आने से पहले ही पुलिस ने हस्तक्षेप कर भीड़ को उग्र होने से रोका। इसके बाद वह अपराह्न 1:53 बजे नीचे उतरे। निष्कासित कर्मियों की बहाली की मांग को लेकर निष्कासित कर्मचारियों ने दर्जाधारी भगतराम कोठारी और मेयर अनिता ममगाईं के नेतृत्व में एम्स के डिप्टी डायरेक्टर अंशुमान गुप्ता के साथ अलग-अलग दौर में वार्ता की।

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वार्ता के बाद बन पाई सहमति 

छत से बुजुर्ग दाताराम को उतारने के बाद एम्स के अधीक्षण अभियंता पद स्थापना सुलेमान अहमद के साथ वार्ता कराई गई। इस दौरान तहसीलदार रेखा आर्य, कोतवाल रितेश शाह और एम्स के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। इस बीच इस बात को लेकर सहमति बनी कि निष्कासित 35 लोगों को बुधवार से आउटसोर्सिंग के तहत पुन: नियुक्ति दी जाएगी। फिलहाल अभी यह तय नहीं है कि 60 लोगों की स्थायी नियुक्ति तक अड़े अनशनकारी 35 लोगों की बहाली के बाद आंदोलन स्थगित करेंगे या नहीं। 

कोतवाल की सूझबूझ से पकड़ में आए दाताराम 
जब बुजुर्ग दाताराम एम्स की पांचवीं मंजिल से नहीं उतरे और ना ही किसी को अपने आसपास फटकने दिया। तभी कोतवाल रितेश शाह करीब डेढ़ बजे एम्स के पांचवे तल पर दबे पांव चढ़े। इसकी भनक दाताराम को भी नहीं लग पाई। इसी बीच कोतवाल रितेश शाह ने दाताराम को मौका पाकर दबोच लिया।  

मुख्यमंत्री से मिलीं मेयर, अवगत कराया
निष्कासित कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर एम्स प्रशासन से वार्ता करने के बाद मेयर अनिता ममगाईं देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मिली। इस दौरान उन्होंने पूरे घटनाक्रम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुलाकात के बाद मेयर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि वे एम्स निदेशक से खुद वार्ता करेंगे। हर संभव प्रयास किया जाएगा कि अनशन पर बैठे कर्मचारियों के साथ न्याय हो। 

शांतिभंग में दाताराम का किया चालान
कानून को अपने हाथ में लेने और शांतिभंग करने के आरोप में कोतवाल रितेश शाह ने छत पर चढ़े दाताराम ममगाईं का चालान काटा है। कोतवाल ने बताया कि दाताराम को उप जिलाधिकारी प्रेमलाल के सामने पेश किया है। 

70 प्रतिशत आरक्षण उत्तराखंड के लोगाें के लिए नहीं

एम्स के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने वालों की ओर से लगाए जा रहे तमाम आरोपों को एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलनरत लोगों की मांगे तथ्यहीन व गलत हैं। आउटसोर्स कर्मचारी एम्स संस्थान से सिर्फ उत्तराखंड के लोगों को हटाए जाने की बात कह रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं हैं। इनमें कई लोग गैर उत्तराखंड से भी हैं, जिनमें मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद और सहारनपुर के कर्मचारी शामिल हैं। एम्स केंद्रीय संस्थान है, इस लिहाज से इसमें 70 प्रतिशत आरक्षण उत्तराखंड मूल के लोगों के लिए नहीं हो सकता। लिहाजा इसके लिए पॉलिसी केंद्र सरकार ही बना सकती हैं। 

एम्स प्रशासन का तर्क है कि संस्थान में वर्तमान समय के दौरान कार्यरत कर्मचारियों में स्थानीय कर्मचारी 70 प्रतिशत से अधिक हैं। एम्स प्रशासन किसी भी अनैतिक दबाव में आकर मन मुताबिक भर्ती नहीं कर सकता। भर्ती निर्धारित सीटों से अधिक नहीं हो सकती है। हटाए गए अस्थायी कर्मियों को वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार को जो बुजुर्ग व्यक्ति संस्थान की छत पर चढ़े थे, वह एम्स में अपनी बेटियों की स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इनकी दोनों बेटियां एम्स की नियमित नर्सिंग पदों की परीक्षा में हर बार बैठीं हैं, लेकिन कभी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाईं। एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जितनी सीटों पर नियमित अभ्यर्थी ज्वाइन करेंगे, उतनी सीटों पर आउटसोर्स कर्मियों को हटाया जाएगा। जो कर्मचारी नर्सिंग व अटेंडेंट्स पदों से हटाए गए हैं वह पूर्णरूप से प्राइवेट कंपनी के अस्थायी कर्मचारी थे।

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