एक्सक्लूसिव: सितारगंज के सलमता में लगेगा उत्तराखंड का पहला सामुदायिक बायोगैस प्लांट
- 20 परिवारों को मिलेगी घरेलू गैस के साथ ही जैविक खाद
- घरों तक बिछाई जाएगी पाइप लाइन, गोबर के अनुपात में मिलेगी खाद
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केंद्र सरकार की गोबर धन (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो एग्रो रिसोर्स धन) योजना के तहत उत्तराखंड का पहला सामुदायिक बायो गैस प्लांट सितारगंज के सलमता गांव में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। बायोगैस प्लांट के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है और राज्य सरकार को बजट भी मिल चुका है। प्लांट से मिलने वाली गैस से 20 परिवारों के घर के चूल्हे जलने के साथ ही उन्हें खेती के लिए जैविक खाद भी मिलेगी।
दरअसल सरकार ने पशुपालन और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोबर धन योजना शुरू की है। इसके तहत हर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत बायोगैस प्लांट लगाए जाने हैं। योजना के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायत में 200 से 500 मवेशी होने के साथ संबंधित पंचायत का प्रस्ताव भी जरूरी है।
इस योजना में प्रदेश के पहले बायोगैस प्लांट के लिए सितारगंज के सलमता गांव का चयन किया गया है। बायोगैस प्लांट के लिए एक ग्रामीण ने 50 गुणा 50 फुट जमीन दान में दी है। इस जमीन पर 60 घनमीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट के लिए रोजाना 10 क्विंटल गोबर की जरूरत होगी।
योजना के दायरे में आने वाले 20 परिवारों को गैस कनेक्शन के साथ ही गोबर के अनुपात में खाद दी जाएगी। इसके लिए हर परिवार के घर तक गैस पहुंचाने के लिए लाइन भी बिछाई जाएगी।
गैस का इस्तेमाल लोग खाना पकाने के लिए कर सकेंगे। स्वजल के परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी ने बताया कि गांव के 100 परिवारों ने प्लांट के लिए गोबर देने की हामी भरी है। इन परिवारों को गोबर के अनुपात में प्लांट से मिलने वाली जैविक खाद दी जाएगी।
गोबर की तुलना में बेहतर होती है खाद
गोबर धन योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभाग को सहयोग कर रही ग्रामीण विकास एवं शोध संस्था के निदेशक बीएन सिंह ने बताया कि योजना में पाइप लाइन से लाभान्वित परिवारों के घरों तक गैस पहुंचाई जाएगी। प्लांट से निकलने वाली सेलरी (खाद) में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटॉस की मात्रा गोबर की तुलना में डेढ़ गुना अधिक होती है। जैविक खेती में सेलरी का प्रयोग करना किसानों के लिए बेहद लाभदायक रहता है।
और गांवों से भी मिले प्रस्ताव
परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में सलमता गांव का चयन किया गया है। सितारगंज विकासखंड के ही करघटिया, बिचुवा और रुद्रपुर के खमिया नंबर एक गांव से भी बायो गैस संयंत्र के प्रस्ताव मिले हैं। दूसरे चरण में इन गांवों में बायो गैस संयंत्र लगाने को लेकर स्वीकृति लेने सहित अन्य कार्यवाही की जाएगी।
ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में कमेटी करेगी संचालन
बायोगैस प्लांट स्थापित होने के बाद उसके संचालन के लिए ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। परियोजना निदेशक के अनुसार जिन 20 परिवारों को घरेलू गैस मिलेगी, वो हर महीने तय अंशदान जमा करेंगे। यह अंशदान प्लांट की मरम्मत और अन्य कार्यों में खर्च होगा।
सितारगंज के सलमता गांव में लगने वाले सामुदायिक बायोगैस प्लांट को राज्य स्तर से स्वीकृति मिल चुकी है और केंद्र से राज्य सरकार को बजट भी मिल चुका है। इस प्लांट को स्थापित करने में 22.44 लाख रुपये खर्च होंगे और जमीन भी मिल चुकी है। तीन महीने में ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक, स्वजल