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दावा: त्यूणी में मुस्लिम वन गुर्जर के आठ परिवारों ने खाली किए मकान
Sat, 17 Oct 2026 08:25 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sat, 17 Oct 2026 08:25 PM IST
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जौनसार-बावर के त्यूणी तहसील क्षेत्र स्थित पुरटाड़ गांव में अनुसूचित जनजाति की भूमि से जुड़े विवाद में नया मोड़ आ गया। रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल ने दावा किया है कि शनिवार को मुस्लिम वन गुर्जर समुदाय के आठ परिवारों ने मकान खाली कर जमीन से अपना कब्जा छोड़ दिया है। संगठन इस क्षेत्र में भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए पिछले पांच साल से अभियान चला रहा है।
शनिवार को रुद्रसेना के संस्थापक राकेश तोमर उत्तराखंडी ने पुरटाड़ गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय किसान अजमेर सिंह चौहान ने कहा कि लंबे समय से उनकी जमीन पर दूसरे लोग काबिज थे, लेकिन संगठन की मुहिम के बाद अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में करीब 600 से 700 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों को लेकर मामला खासा गरमाया हुआ है।
संस्थापक राकेश तोमर ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार भूमि अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने मांग की कि जौनसार-बावर और देवघार के भूमिहीन मूल निवासी किसानों के लिए शासन ठोस योजना बनाए। साथ ही, वर्ष 1951-52 और 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए। संगठन का कहना है कि जिन मामलों में भूमि का नामांतरण या राजस्व प्रविष्टियां नियमों के विरुद्ध हुई हैं, उनकी सक्षम स्तर से जांच कराकर तत्काल कार्रवाई की जाए।
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यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में पूरी जानकारी लेने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। हालांकि, क्षेत्र में भूमि संबंधी मामले की जांच चल रही है। - राजेंद्र लाल, प्रभारी नायब तहसीलदार, त्यूणी
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शनिवार को रुद्रसेना के संस्थापक राकेश तोमर उत्तराखंडी ने पुरटाड़ गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय किसान अजमेर सिंह चौहान ने कहा कि लंबे समय से उनकी जमीन पर दूसरे लोग काबिज थे, लेकिन संगठन की मुहिम के बाद अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में करीब 600 से 700 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों को लेकर मामला खासा गरमाया हुआ है।
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संस्थापक राकेश तोमर ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार भूमि अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने मांग की कि जौनसार-बावर और देवघार के भूमिहीन मूल निवासी किसानों के लिए शासन ठोस योजना बनाए। साथ ही, वर्ष 1951-52 और 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए। संगठन का कहना है कि जिन मामलों में भूमि का नामांतरण या राजस्व प्रविष्टियां नियमों के विरुद्ध हुई हैं, उनकी सक्षम स्तर से जांच कराकर तत्काल कार्रवाई की जाए।
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यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में पूरी जानकारी लेने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। हालांकि, क्षेत्र में भूमि संबंधी मामले की जांच चल रही है। - राजेंद्र लाल, प्रभारी नायब तहसीलदार, त्यूणी