'जो कानून पहले से है उसे फिर बनाने चले CM रावत'
बेनामी और आय से अधिक संपत्ति रखने वालों के खिलाफ कानून बनाने की बात कर रही उत्तराखंड की हरीश सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद बीसी खंडूड़ी ने आईना दिखाया।
जनरल खंडूड़ी ने कहा कि हरीश सरकार जो कानून बनाने की बात कर वाहवाही लूट रही है, वह कानून तो भाजपा सरकार ने अक्टूबर 2011 में ही बनाकर लागू कर दिया था। दरअसल पूर्व सीएम व पौड़ी सांसद बीसी खंडूड़ी ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कांग्रेस सरकार के इस कथन पर आश्चर्य होता है कि राज्य में भ्रष्टाचारियों द्वारा अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त कर सरकार में निहित करने के लिए कानून बनेगा।
यह भ्रम की स्थिति है, सरकार को ही यह नहीं पता कि सूबे में कौन कानून लागू है और कौन नहीं। इस कानून को भाजपा सरकार ने लागू करने के लिए विशेष न्ययालय अधिनियम बनाया था। इस न्यायालय में भ्रष्टाचार के मुकदमों की तेजी से सुनवाई होनी थी।
इस आशय का शासनादेश 12 अक्टूबर 2011 को जारी हो चुका है। जनरल ने यह भी कहा कि पिछले दिनों जो घटनाक्रम राज्य में हुआ उसने देश भर में प्रदेश को बदनाम कर दिया है।
भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग के सचिव पर आरोप लगना राज्य के लिये शर्मनाक है। लेकिन अब तो यह विभाग ही खत्म होता नजर आ रहा है। लोकायुक्त कानून, ट्रांसफर एक्ट को खत्म कर दिया, सेवा का अधिकार निष्प्रभावी है। फिर कौन से भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार कानून ला रही है।
यदि कानून लागू है, उसे ही आपरेशनल करेंगे : हरीश
जनरल बीसी खंडूड़ी के इस खुलासे पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पलटवार करने के बजाय सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुझे अफसरों ने इसकेबारे में कभी बताया नहीं, यदि कानून बना हुआ है तो उसे ही आपरेशनल कर दिया जाएगा।
और, यदि जरूरत पड़ेगी तो आवश्यकतानुसार संशोधित कर लागू कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेनामी संपत्ति और लोक सेवकों के पास आय से अधिक संपत्ति के मद्देनजर सरकार यह कानून बनाना चाहती है। ऐसे लोक सेवक जिनके पास आय से अधिक संपत्ति है, उसे भी जब्त किया जाएगा।
इसके लिए अलग से एक एनफोर्समेंट एजेंसी का गठन होगा। क्योंकि पुलिस की जो एसआईटी गठित की गई थी, वह बहुत प्रभाव नहीं छोड़ सकी। इसलिए मैंने अफसरों को निर्देशित किया है कि एक खाका तैयार करे, ताकि भविष्य में बेनामी और आय से अधिक संपत्तियों का आवागमन रोका जा सके।