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Dehradun: पर्यावरणविद् बोले- जोशीमठ में विस्फोट से पहले कराया जाए परीक्षण, प्रभावितों की हो सुनवाई

Wed, 28 Aug 2024 08:57 AM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 28 Aug 2024 08:57 AM IST
सार

पर्यावरणविदों ने कहा कि जोशीमठ का क्षेत्र अतिसंवेदनशील है इसलिए यहां प्रोजेक्ट्स पर रोक लगनी चाहिए।

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Environmentalists said- testing should be done before the explosion in Joshimath Uttarakhand News in hindi
जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों एवं पर्यावरणविदों ने जोशीमठ में एनटीपीसी को विस्फोट करने और फिर काम शुरू करने की इजाजत देने से पहले परीक्षण कराने की मांग की है। पर्यावरणविद डाॅ. रवि चोपड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल, हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी नौटियाल ने प्रेसवार्ता में यह मुद्दा उठाया।

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इन्होंने कहा, जोशीमठ में एनटीपीसी का काम पुनः शुरू कराने से पहले प्रभावित लोगों की सुनवाई हो। स्वतंत्र वैज्ञानिकों से जांच कराई जाए। रवि चोपड़ा ने कहा, किसी प्रकार की जल्दबाजी हिमालय को नष्ट कर देगी। विकास के नाम पर विनाश की कहानी न लिखी जाए। रवि चोपड़ा जी ने कहा, सरकार प्रोजेक्टों के लिए विस्फोटकों का उपयोग करने की कोशिश कर रही है। यह अधिक खतरनाक हो सकती है। पीसी तिवारी ने कहा, यह प्रोजेक्ट्स नहीं शुरू किए जाने चाहिए। यह स्थान अत्यधिक संवेदनशील है। यहां जब भी भूस्खलन हुआ तो प्रकृति को नुकसान पहुंचा।
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जोशीमठ के स्थानीय नागरिक दीपक नागपाल ने कहा कि हाल के समय में कई विफलताएं सामने आई हैं। इससे पूरे घटनाक्रम में जवाबदेही और जिम्मेदारी की कमी स्पष्ट दिखी है। सीनियर अधिवक्ता बीपी नौटियाल ने बताया कि जोशीमठ जैसी जगह को नष्ट किया जा रहा है। जोशीमठ अत्यधिक संवेदनशील है। वहां कोई प्रोजेक्ट नहीं होने चाहिए। उत्तराखंड की पहाड़ियां अस्थिर हैं। यहां कोई बड़े प्रोजेक्ट नहीं किए जाने चाहिए।
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अनूप नौटियाल ने कहा, यह समस्या केवल जोशीमठ तक सीमित नहीं है। बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए है। इसे रोकने के लिए हमें कूटनीतिक रूप से लड़ाई लड़नी होगी और हमें अपने नेताओं का चयन भी इस आधार पर करना चाहिए। मैड संस्था से प्रिंस कपूर ने कहा, यह एक अत्यधिक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे सरकार के सामने उठाना आवश्यक है।

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