दिल्ली विधानसभा चुनाव में में ‘आप’ की जीत, उत्तराखंड में भाजपा चौकस
- प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, नतीजों का प्रदेश की सियासत पर कोई असर नहीं
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत से प्रदेश के भाजपाइयों के चेहरे का रंग उतर गया है। इस बार वे दिल्ली की चुनावी जंग में उलटफेर के मंसूबे पाले बैठे थे। प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों, पदाधिकारियों व नेताओं को भी दिल्ली में प्रचार में उतारा गया था। लेकिन उनके प्रयास भाजपा को करारी शिकस्त नहीं बचा पाए।
भाजपा की इस हार ने उत्तराखंड भाजपा को भी चौकन्ना कर दिया है। हालांकि उसके नेता दावा कर रहे हैं कि उत्तराखंड की सियासत में इस हार का कोई असर नहीं होगा। लेकिन अंदरखाने वे हार से विचलित नजर आए। प्रदेश भाजपा कार्यालय में सुबह से ही पार्टी नेताओं की निगाहें टीवी पर लगी रही।
पार्टी की पराजय पर चुप्पी
वे यह उम्मीद कर रहे थे कि इस बार भाजपा की स्थिति पहले से सुधरेगी। लेकिन नतीजे कुछ और ही बयान करते रहे और नेताओं के चेहरे की मायूसी और अधिक घनी होती रही। पार्टी कार्यालय में प्रदेश भर जुटे जिलाध्यक्षों, जिला संयोजकों और जिला प्रभारियों ने भी पार्टी की पराजय पर चुप्पी साधे रखी।
जिन मुद्दों के कारण दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी से जुड़ी है उनको देखा जाना चाहिए। जिस तरह दिल्ली में आप ने खैरात बांटी है, वो दिल्ली के लिए कितना सफल होगा, यह सोचने का विषय है।
- त्रिवेंद्र रावत, मुख्यमंत्री
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों का उत्तराखंड की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहां के मुद्दे अलग थे। जब आम आदमी पार्टी की सरकार मुफ्त बिजली और पानी नहीं दे पाएगी, तो लोगों को सच्चाई पता चल जाएगी। मैंने जहां भी दौरे किए, वहां जनता में भाजपा को लेकर जबर्दस्त उत्साह है। 2022 के चुनाव में पार्टी भारी बहुमत से विजयी होगी।
- बंशीधर भगत, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा