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उत्तराखंड : जुड़वा बच्चों की मौत के बाद चार अस्पतालों के धक्के खाकर प्रसूता ने भी तोड़ा दम, बैठी मजिस्ट्रियल जांच

Sat, 13 Jun 2020 12:41 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 13 Jun 2020 12:41 AM IST
सार

  • सीएमओ ने मामले में बैठाई जांच, कहा- दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
  • खून की कमी बताई जा रही वजह, नौ जून को घर पर प्रसव के बाद हुई थी जुड़वा बच्चों की मौत

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Dehradun news: After the death of twins, woman also died after being went in four hospitals
doon hospital - फोटो : File Photo

विस्तार

जुड़वा बच्चों की मौत के बाद चार अस्पतालों में इलाज के लिए धक्के खाने के बाद प्रसूता ने भी दून अस्पताल में दम तोड़ दिया। राजधानी में हुई इस घटना को बड़ी लापरवाही मानते हुए सीएमओ डॉ.बीसी रमोला ने जांच बैठा दी है। महिला ने दो दिन पहले घर पर ही जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था, जिनकी मौत हो गई थी। इस मामले में मामले में जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

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जानकारी के मुताबिक देहराखास निवासी एक 24 वर्षीय महिला की दून अस्पताल के आईसीयू में मौत हो गई। महिला अस्पताल में गंभीर स्थिति में लाई गई थी। बताया जा रहा है कि खून की कमी के चलते उसकी मौत हुई है। महिला कोरोनेशन और फिर गांधी अस्पताल से रेफर होकर दून अस्पताल लाई गई थी।

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कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया

दून अस्पताल में डाक्टरों ने महिला को कोरोना संदिग्ध नहीं बताते हुए नॉन कोविड हायर सेंटर रेफर कर दिया था। बताया जा रहा है कि महिला की डिलीवरी नौ जून को घर पर ही हुई थी। उसने जुड़वा बच्चों जन्म दिया था, जिनकी मौत हो गई थी। महिला के शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया है।

वहीं, कोरोना जांच के लिए उसका सैंपल लिया गया है। सीएमओ डॉ.बीसी रमोला ने बताया कि जहां तक उन्हें जानकारी मिली है, महिला को कोरोनेशन, गांधी अस्पताल, दून अस्पताल और एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। महिला को इलाज क्यों नहीं मिल पाया और किस स्तर पर चूक हुई, इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कोविड और नोन कोविड के फेर में गई प्रसूता की जान

कोरोना महामारी के खौफ के बीच कोविड और नॉन कोविड के फेर में मरीजों की जान खतरे में है। देहराखास कि प्रसूता की मौत ने राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां मरीज अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं तो दूसरी ओर सामान्य गर्भवतियों के लिए दून अस्पताल के दरवाजे बंद हैं। गांधी शताब्दी अस्पताल में गर्भवतियों की डिलीवरी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

दरअसल, कोरोना महामारी के बीच दून अस्पताल को कोविड हॉस्पिटल घोषित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी निर्णय लिया कि गर्भवतियों की डिलीवरी गांधी शताब्दी अस्पताल में कराई जाएगी। दून अस्पताल में केवल उन्हीं गर्भवती की डिलीवरी कराई जाएगी, जो या तो किसी पाबंद इलाके से आएगी या कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव होगी। इन नियमों के फेर में रोजाना गर्भवती महिलाएं अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं।

लेकिन, उन्हें कोविड और नॉन कोविड के नाम पर अस्पतालों के चक्कर कटाए जा रहे हैं। उधर, गांधी शताब्दी अस्पताल में कम संसाधनों के बीच गर्भवती महिलाओं को तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। इन सबके बावजूद राजधानी में गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं बन पाई है।

आखिर घर में क्यों हुआ प्रसव?

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक देहराखास की महिला नौ जून को गांधी शताब्दी अस्पताल डिलीवरी के लिए पहुंची थी। लेकिन यहां उसे यह कहकर वापस भेज दिया कि अभी डिलीवरी में समय है। महिला घर गई तो प्रसव हो गया।

प्रसव के बाद जुड़वा बच्चों की घर पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घर पर डिलीवरी की वजह से महिला में खून की कमी हो गई और यही उसके लिए जानलेवा साबित हुई। नौ जून को हुए घटनाक्रम में ही लापरवाही की कहानी छिपी हुई है। इस संबंध में महिला के पति से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल बंद आ रहा था।

डीएम ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

जुड़वा बच्चों और प्रसूता की मौत के मामले में जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी एडीएम प्रशासन को सौंपी गई है। साथ ही घटना के दौरान मौजूद लोगों से सात दिन के भीतर कार्यालय में आकर बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है। 

नौ जून को देहराखास निवासी महिला ने घर पर जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया था। वहीं तबीयत बिगड़ने पर परिजन महिला को दून अस्पताल ले गए थे। डॉक्टरों ने महिला के कोरोना संदिग्ध न होने की बात कहते हुए नॉन कोविड अस्पताल रेफर कर दिया था।

इस पर परिजन महिला को कोरोनेशन, गांधी अस्पताल, और एक निजी अस्पताल ले गए। इस बीच कोविड-नान कोविड के चक्कर में महिला को किसी भी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया गया और उसकी हालत बिगड़ती चली गई। गांधी अस्पताल से महिला को फिर से दून अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 

शुक्रवार जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने एडीएम प्रशासन अरविंद पांडेय को जांच अधिकारी बनाया है। वहीं, एडीएम प्रशासन ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को घटना के कारणों की जानकारी है और वह सात दिन के भीतर अपने बयान दर्ज करा सकता है।

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