Coronavirus in Uttarakhand : कोविड-19 के बढ़ते खतरे के बीच 28 लाख बच्चों-बुजुर्गों को सुरक्षा चक्र में रखना चुनौती
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उत्तराखंड में कोविड-19 महामारी के बढ़ते खतरे के बीच 28 लाख 84 हजार से अधिक बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षा चक्र में रखने की बहुत बड़ी चुनौती है। पिछले 20 दिनों में 250 से अधिक कोरोना पॉजिटिव के ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनके संक्रमण का स्रोत नहीं मिल पाया है। ऐसे हालातों में कोरोना संक्रमण के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माने जाने वाले वृद्धों और बच्चों को लेकर और अधिक चौकस रहने की जरूरत है।
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प्रदेश सरकार जनता से बुजुर्गों और बच्चों का खास ख्याल रखने के लिए लगातार आह्वान कर रही है, लेकिन खासतौर पर बुजुर्गों के लिए मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार करने के लिए सरकार के स्तर पर अभी और प्रयास किए जाने की जरूरत है। खासतौर पर उन बुजुर्गों के लिए जिन्हें जरूरी कामों से घरों से बाहर निकलना पड़ रहा है। उनकी सुविधा के लिए सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े स्थलों पर अभी भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष 80 वर्षीय पीडी गुप्ता कहते हैं, मेरे पास एटीएम नहीं है। मुझे अपनी पेंशन लेने बैंक जाना होता है। लेकिन बैंक में सीनियर सिटीजन के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि सरकार बार-बार बुजुर्गों की चिंता करने की बात कह रही है। बैंकों को सरकार की ओर से निर्देश हों कि वे ऐसी व्यवस्था करें कि सीनियर सिटीजन को कतार में न खड़ा होने पड़े।
वरिष्ठ नागरिक गुप्ता कोई अकेले नहीं हैं, ऐसी परेशानी का सामना करने वाले उन जैसे लाखों बुजुर्ग हैं। अर्थ एवं संख्या विभाग की सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 900809 बुजुर्ग हैं। इनमें 676014 बुजुर्ग गांवों में निवास कर रहे हैं।
आबादी में बड़ी संख्या एकाकी बुजुर्गों की
इस आबादी में बड़ी संख्या एकाकी बुजुर्गों की भी हैं। उन्हें भोजन, पेंशन, दवा और अन्य जरूरी चीजों के लिए घर से बाहर निकलना पड़ रहा है। रिटायर्ड इंजीनियर योगेंद्र सिंह कहते हैं, कोरोना काल में बुजुर्गों और बच्चों को सलामती के लिए सरकार को कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
कुछ ऐसी ही चिंता नौ साल तक के बच्चों को लेकर भी है। प्रदेश में इस आयु वर्ग के 19 लाख 83 हजार 665 बच्चे हैं। बच्चों के मामले में सरकार ने जरूर कुछ ठोस कदम उठाए। मसलन, स्कूल बंद किए। नौ साल से कम आयु के बच्चों वाले सरकारी अधिकारी कर्मचारियों को दफ्तर आने से छूट दी गई। लेकिन गरीब और निचले तबके में बच्चों को संक्रमण से बचाने के उतने गंभीर उपाय नदारद हैं।
60 वर्ष व उससे ऊपर की आयु की आबादी
09 लाख से अधिक 60 व उससे ज्यादा आयु के
6.76 लाख बुजुर्ग राज्य के गांवों में निवास कर रहे
2.24 लाख बुजुर्ग शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे
19.83 लाख नौ वर्ष तक की आयु के बच्चों की आबादी
9.24 लाख की आबादी प्रदेश में चार वर्ष तक के बच्चों की है
10.58 लाख की जनसंख्या पांच से नौ वर्ष की आयु के बच्चों की है
स्रोत: अर्थ एवं संख्या विभाग की सांख्यिकी रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार, कोविड-19 महामारी में सबसे अधिक संवेदनशील बुजुर्ग और बच्चे हैं। राज्य में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। अकेले देहरादून में 250 में से 70 प्रतिशत ऐसे मामले हैं, जिनके संक्रमण का स्रोत नहीं है। जाहिर है कि खतरा उनके लिए बढ़ा है, जो ज्यादा संवेदनशील हैं। इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के सुरक्षा चक्र और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
- अनूप नौटियाल, समाजसेवी एवं विश्लेषक