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देहरादून: बाल आश्रमों में पड़ा छापा, मिली कपड़ों की दीवारें और तबेले में रह रहे थे बच्चे

Sun, 02 Jun 2019 01:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 02 Jun 2019 01:46 PM IST
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dehradun baal ashram children living in stables
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

राजधानी से सटे इलाके के दो बाल आश्रमों पर बाल आयोग की टीम ने छापा मारा। छापे के दौरान कपड़ों की दीवारें मिली। बालक-बालिकाओं को तबेले में रखा गया था।

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ऐसा नजारा देखकर बाल आयोग की अध्यक्ष बिफर गईं। उन्होंने तत्काल जिलाधिकारी को इन दोनों आश्रमों की एनओसी निरस्त करने के साथ ही एसडीएम को जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजने के आदेश दिए।
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मंगलवार को बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने सदस्य शैलेंद्र शेखर करगेती, सीमा डोरा, बचपन बचाओ आंदोलन के समन्वयक सुरेश उनियाल और एसडीएम विकासनगर जितेंद्र के साथ शिमला बाईपास स्थित हरिओम आश्रम और शिवओम आश्रम में छापा मारा। इस दौरान तमाम अव्यवस्थाएं सामने आईं।
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बालक-बालिकाओं के शयन कक्षों में दरवाजे नहीं

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आश्रम में 22 बालिकाएं और 17 बालक रह रहे हैं। बालक-बालिकाओं के शयन कक्षों में दरवाजे नहीं हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी समय इन कक्षों में घुस सकता है। शौचालय में एक कमरे में तीन सीट लगाई गई है।

चारदीवारी के नाम पर धोती और चुनरी लगाई गई है। टीम ने देखा कि कड़वापानी स्थित आश्रम में दस साल तक की बालक-बालिकाओं को रखा गया है जबकि इससे बड़ी 14 बालिकाओं को शिवओम आश्रम गुरुकुल छात्रावास शिवराज नगर बरवाला में रखा गया है। दोनों स्थानों पर एक जैसी स्थिति है।

बालिकाओं के आवास के पास गौशालाएं बनाई गई हैं, जिनसे बेहद गंदगी हो रही है। बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि जब आश्रम के प्रबंधक अनुपम आनंद गिरि और स्वामी अमित आनंद गिरि को व्यवस्था सुधारने को कहा गया तो वह दुर्व्यवहार एवं अभद्रता करने लगे।

आश्रम संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश

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आश्रम संचालकों ने कहा कि यहां जिले के अधिकारी आते रहते हैं। समाज कल्याण अधिकारी ने एनओसी दी हुई है। इसके अलावा बाल कल्याण समिति का भी यहां आना जाना लगा रहता है।

इस पर अध्यक्ष ने सभी अधिकारी से भी जवाब तलब करके तथा उप जिलाधिकारी विकासनगर को जांच रिपोर्ट डीएम को प्रेषित करने को कहा। उन्होंने बचपन बचाओ आंदोलन को आश्रम संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।

बाल आयोग अध्यक्ष ने जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन को दोनों आश्रमों की एनओसी निरस्त करने के आदेश दिए। उधर, इस मामले में आश्रम संचालकों से बात करने का प्रयास किया गया। कॉल किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। जब उनका पक्ष आएगा तो वह भी प्रकाशित किया जाएगा।

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