देहरादूनः इधर...फैला है शातिर साइबर ठगों का जाल, उधर...पुलिस लाचार, खास रिपोर्ट
- रोज लुट रही लोगों की खूनपसीने की कमाई, छोटे मामलों का संज्ञान नहीं लेती पुलिस
- साइबर सेल में रोजाना पहुंच रहे 15 से 20 मामले, लोगों को भेज दिया जाते है थाने
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लूट और चोरी की घटना को लेकर तो हल्ला मच जाता है, लेकिन साइबर ठगी के मामलों कहीं चूं तक नहीं होती। आलम यह है कि साइबर ठग रोजमर्रा आम लोगों के खातों से सात से आठ लाख रुपये खातों उड़ लेते हैं।
अधिकांश घटनाओं के पुलिस रिकार्ड में नहीं आ पाने के कारण न तो इनकी किसी तरह की समीक्षा हो पा रही है और न ही जवाबदेही तय हो पा रही है। सूत्रों की मानें तो विभिन्न माध्यमों से पुलिस के पास रोजमर्रा ठगी के 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं, जो जांच के नाम पर फाइलाें में सिमटकर रह जाते हैं। कुछ पीड़ित तो पुलिस के झंझट से बचने के लिए सामने ही नहीं आते।
बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर देहरादून में प्रदेश का पहला साइबर थाना खोला गया था, लेकिन वह लोगों की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है। चुनिंदा बडे़ मामलों को छोड़कर इस थाने में छोटे मामलों का संज्ञान ही नहीं लिया जाता है। शिकायत लेकर आने वालों को जिले के साइबर सेल अथवा थाने की राह दिखा दी जाती है।
सीमित साधन होने के कारण साइबर सेल उस तत्परता से काम नहीं कर पाता, जिसकी जरूरत है। शासन से लेकर पुलिस अफसर साइबर अपराधों को लेकर चिंता जताने में पीछे नहीं हैं, लेकिन ठगी के शत-प्रतिशत मामलों को दर्ज कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। नतीजा यह है कि साइबर ठगों का शिकार होने के बाद आम लोग अपनी किस्मत को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पाते।
सूत्रों के मुताबिक देहरादून जिले में रोजमर्रा बैंक खाताें से रकम उड़ाने की 15 से 20 शिकायतें मिल रही हैं। शातिर साइबर ठग लोगाें को झांसा देकर उनके बैंक खातों में सेेंधमारी कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक रोजमर्रा सात से आठ लाख रुपये ठगे जा रहे हैं।
ठगी के नए हथकंडों के बीच साइबर ठगाें को बैंक अधिकारी बनकर खाते और डेबिट या क्रेडिट कार्ड के गोपनीय नंबर अथवा ओटीपी नंबर जानने का खेल सबसे ज्यादा रास आ रहा है। हैरत की बात यह है कि ठगी का शिकार होने वाले अधिकांश लोग शिक्षित हैं। यह स्थिति तब है, जब सिविल पुलिस से लेकर साइबर थाना पुलिस जागरूकता अभियान चला रही है।
साइबर ठगी की शिकायताें के निस्तारण के लिए जिले स्तर पर साइबर सेल गठित है। जांच के बाद संबधित थाने को एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की जाती है। थाना प्रभारियाें को साइबर ठगी की घटनाओं को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
- अरुण मोहन जोशी, डीआईजी देहरादून
साइबर ठगी से बचने को जागरूकता जरूरी है। इसके लिए साइबर थाना पुलिस की ओर से स्कूलों के अलावा सरकारी दफ्तरों और प्राइवेट संस्थानों में जागरूकता गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई है। बराबर बताया जा रहा है कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों से खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी नहीं मांगता है। बावजूद इसके लोग झांसे में आ जाते हैं।
- रिद्धिम अग्रवाल, डीआईजी, स्पेशल टास्क फोर्स
ताजा घटनाएं
- शहर के त्यागी रोड निवासी राजेन्द्र सिंह के खाते से धोखाधड़ी कर 57999 रुपये निकाल लिए गए।
- पटेलनगर के शिवालिक एंकलेव निवासी मौहम्मद इसान के खाते से 53 हजार रुपये उड़ा लिए गए।
- शहर के चुक्खूवाला निवासी आलोक सकलानी के खाते से 99455 रुपये साइबर ठगाें ने उड़ाए लिए।
- सालावाला निवासी सुशील के खाते से धोखाधड़ी कर एक लाख 40 हजार 396 रुपये निकाले।
आपकी जागरूकता ही आपका सबसे बड़ा बचाव
-किसी भी व्यक्ति को फोन पर अपने एटीएम और बैंक खातों की डिटेल ना बताएं। बैंक कभी भी आपको को एटीएम कार्ड बंद होने संबंधी फोन नहीं करता है।
-अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड का नंबर, पासवर्ड, सिक्योर पिन, सीवीवी नंबर किसी से शेयर ना करें।
-लाटरी जीतने और इंश्योरेंस की रकम दो गुना करने जैसे फोन कॉल अथवा ईमेल आने पर कोई भी जानकारी और धनराशि किसी को न दें।
-किसी भी सोशल मीडिया, मैसेंजर जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप या किसी भी अज्ञात नंबर से फोन कॉल आने पर अपनी व्यक्तिगत सूचनाओं को शेयर ना करें।
-अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड्स को नियमित अंतराल पर बदलते रहें। अवांछनीय मैसेज और लिंक पर क्लिक ना करें।
ऑनलाइन महत्वपूर्ण कार्य करते समय हमेशा सिक्योर वेबसाइट का ही प्रयोग करें।