{"_id":"5b72f3af42c7922a4d5483cb","slug":"crowd-beating-doctor-in-death-of-mother-and-newborn-baby","type":"story","status":"publish","title_hn":"बगैर एनेसथिसिया के ऑपरेशन, जच्चा-बच्चा की हुई मौत, भीड़ ने डॉक्टर का किया बुरा हाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बगैर एनेसथिसिया के ऑपरेशन, जच्चा-बच्चा की हुई मौत, भीड़ ने डॉक्टर का किया बुरा हाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर
Updated Tue, 14 Aug 2018 08:52 PM IST
विज्ञापन
डॉक्टर की पिटाई करती भीड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत से गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक डॉक्टर की बेरहमी से पिटाई कर दी। पुलिस ने डॉक्टर को बमुश्किल लोगों के चंगुल से छुड़ाया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए।
विज्ञापन
ग्राम लालढांग पीरुमदारा (नैनीताल) निवासी विजेंद्र की पत्नी सुमन (22) को 13 अगस्त की शाम प्रसव पीड़ा हुई। आशा कार्यकर्ता के सुझाव पर सुमन की सास दयावती, भाई चरन सिंह आदि ने उसे मुरादाबाद रोड स्थित सेवा अस्पताल में भर्ती कराया। शाम करीब आठ बजे प्रसूता का ऑपरेशन किया गया, लेकिन तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर घर चले गए। रात के तीसरे पहर महिला की भी हालत बिगड़ गई। परिजनों ने लगातार कॉल कर चिकित्सक को बुलाने का प्रयास किया, लेकिन कोई अस्पताल नहीं पहुंचा। महिला के परिजन उसे चामुंडा स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में मृतका के परिजन शव लेकर फिर सेवा अस्पताल पहुंच गए। जच्चा-बच्चा की मौत से परिजनों का आक्रोश भड़क उठा।
विज्ञापन
महिला के परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले किसी विशेषज्ञ द्वारा प्रसूता को एनेस्थिसिया नहीं दिया गया और न ही प्रसूता के जरूरी टेस्ट कराए गए। चिकित्सक द्वारा लापरवाही से किए गए ऑपरेशन से प्रसूता और उसके नवजात शिशु की मौत हुई है। सुबह करीब सात बजे दूसरा डॉक्टर अपने सहयोगी के साथ अस्पताल पहुंचा तो आक्रोशित परिजनों ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने डॉक्टर की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस दौरान महिलाओं ने भी डॉक्टर पर हमला बोल दिया। सूचना पर एसएसआई बच्ची सिंह बिष्ट, जयपाल सिंह, सुनील सिंह बिष्ट आदि पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने डॉक्टर को हमलावरों के चंगुल से छुड़ाया। इस दौरान पुलिस को भी मृतका के परिजनों का आक्रोश झेलना पड़ा। पुलिस ने चिकित्सकों के पैनल से मृतका व उसके नवजात शिशु का पोस्टमार्टम कराया।
विज्ञापन
मृतका के भाई ने सौंपी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ तहरीर
कुंडा थाने के ग्राम बसई निवासी चरन सिंह ने कहा कि लक्ष्मीपुर पट्टी निवासी आशा कार्यकर्ता ने सुरक्षित प्रसव कराने की बात कहकर उसकी बहन सुमन को सेवा अस्पताल में भर्ती कराया। उसने परिजनों को अस्पताल का कार्ड भी दिया। अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ ने पहले नार्मल डिलीवरी कराने की बात कही, बाद में ऑपरेशन करने की बात कहकर उनसे पांच हजार रुपये जमा करा लिए। ऑपरेशन के बाद चिकित्सक वहां से चला गया। बच्चे को एक नर्सिंग होम में दिखाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी बहन सुमन भी ऑपरेशन थियेटर की टेबल पर बेहोश पड़ी थी। उसे ऑपरेशन थियेटर से बेड पर शिफ्ट कराया। रात दो बजे उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर के न पहुंचने पर वह अपनी बहन को दूसरे अस्पताल ले गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर ने नहीं दी मरीज के इलाज की फाइल
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने पुलिस से कई बार डॉक्टर द्वारा इलाज के दौरान बनाई गई फाइल को अपने कब्जे में लेने का अनुरोध किया, लेकिन डॉक्टर ने इलाज की फाइल होने से इनकार कर दिया। फाइल को लेकर परिजनों की पुलिस ने भी नोकझोंक हुई, लेकिन पुलिस डॉक्टर से फाइल न ले पाई। परिजनों ने आशंका जताई कि मृतका के इलाज की फाइल में अस्पताल प्रबंधक हेरफेर कर सकते हैं। इधर, जिस अस्पताल में जच्चा बच्चे मरे वह अंदर से बेहद संकरा था। अस्पताल में छोटे-छोटे केबिन बनाए हुए थे। जिसमें मरीज अच्छे से सांस भी नहीं ले सकते। पुलिस के मुताबिक आईसीयू वार्ड में केवल एक एसी लगा था और वहां वेंटिलेटर तक की व्यवस्था नहीं थी।