सनसनीः कीमती सींग के लिए मार दिए 100 हिरन
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राजधानी देहरादून में तस्करी को लाए जा रहे डेढ़ कुंतल हिरन के सींग धारा चौकी पुलिस ने बरामद किए। साथ ही दो तस्करों को भी रंगे हाथों पकड़ा।
पकड़े गए सींगों के लिए कम से कम 100 हिरनों का शिकार किया गया होगा। इसमें काफी संख्या में ताजा सींग भी थे।
मंगलवार दोपहर बाद धारा चौकी पुलिस को ट्रैफिक इंडिया संस्था की ओर से सूचना मिली कि दून हिरन के सींग तस्करी के लिए लाए जा रहे हैं।
राजपुर रोड स्थित एक वैडिंग प्वाइंट के समीप तस्कर किसी का इंतजार कर रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने जाल फैलाया और इन्हें दबोच लिया। सब इंस्पेक्टर अमन चड्ढा, कांस्टेबल मुकेश बंगवाल और संजय रावत ने मौके से बिहारीगढ़ के निकट जिला हरिद्वार के हरीपुर टोंगिया गांव निवासी निसार और मेहरबान को रंगेहाथ दबोच लिया।
मार्केट में कीमत 12 लाख
दोनों आरोपी माल को कट्टों में भरकर लाए थे, जिन्हें पुलिस ने सील कर दिया। पकड़े गए माल में न केवल बारहसिंगा के सींग हैं बल्कि कई और हिरन के छोटे एवं बड़े सींग भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी तादाद में हिरनों के सींग इकट्ठे करने के लिए करीब 100 हिरनों का शिकार किया गया होगा। इसमें शामिल कुछ ताजा सींग भी थे, जो खून से लथपथ नजर आ रहे थे।
माना जा रहा है कि कुछ ताजा शिकार करने के बाद भी सींग इस सप्लाई में भेज दिए गए होंगे। जानकारों का कहना है कि मार्केट में हिरन के सींगों का उपयोग न केवल दवाईयों बल्कि सजावटी सामान और हथियारों के हत्थे बनाने में किया जाता है।
दून में यह करीब आठ हजार रुपए प्रति किलो के दाम पर बेचने के लिए लाए जा रहे थे। इस लिहाज से माल की कीमत करीब 12 लाख रुपए आंकी जा रही है।
देहरादून पुलिस भी उलझी
माल बरामद करने के बाद इतनी बड़ी तादाद में सींगों को देखकर पुलिस भी उलझ गई। पहले तो करीब तीन घंटे तक पुलिस खुद कागजी कार्रवाई के लिए मशक्कत करती रही।
रात करीब दस बजे जैसे ही इसकी सूचना वन महकमे को लगी तो उनकी टीम भी मौके पर पहुंच गई। बाद में एक ओर पुलिस संस्था का नाम हटाने की कोशिश करती रही तो दूसरी ओर वन महकमे की टीम भी श्रेय लेने के प्रयास में लग गई।
शिकारी पकड़ने में विभाग नाकाम
प्रदेश में बड़े पैमाने पर वन्य जीवों का शिकार चल रहा है। विभाग की ओर से एंटी पोचिंग सेल तो बनाई गई है, लेकिन इसमें केवल एक अधिकारी है।
उनके पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही लोग। ऐसे में शिकार और तस्करी के मामलों पर कार्रवाई करने या रोक लगाने में वन विभाग नाकाम नजर आ रहा है।
कौन है मास्टरमाइंड
यहां एक बात और अहम है कि इतने बड़े पैमाने पर तस्करी का मास्टर माइंड कौन है। दरअसल पकड़े गए दो तस्कर बार-बार किसी बोहरा नाम के व्यक्ति का नाम ले रहे थे। हालांकि यह अभी पुलिस की पूछताछ और जांच के बाद ही तय हो पाएगा कि असली दोषी कौन है।