साली ने पहले जीजा के साथ बनाए शारीरिक संबंध फिर प्रेमी के साथ मिलकर कर दी हत्या
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साली ने पहले अपने जीजा के साथ शारीरिक संबंध बनाए। एक दिन जीजा ने उसे किसी और के साथ संबंध बनाते हुए देख लिया। फिर प्रेमी के साथ मिलकर साली ने जीजा को रास्ते से हटा दिया। जानिए, पूरी बात। क्या हुआ दोनों का अंजाम...
अवैध संबंधों के चलते रिश्ते के जीजा की हत्या में एक महिला समेत दो लोगों को आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) वरुण कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए मामले के विवेचक के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं।
पुलिस के मुताबिक दनकौर बुलंदशहर निवासी सुधीर पंडित 21 अप्रैल 2011 की रात एक महिला के साथ हरिद्वार के एक होटल में ठहरा था। अगले दिन देर रात साथ आई महिला होटल से गायब हो गई थी जबकि सुधीर कमरे में मृत पड़ा मिला था। मामले में 23 अप्रैल को होटल मैनेजर की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। तब होटल में महिला ने अपनी गलत आईडी देने के साथ ही सुधीर को अपना पति बताते हुए उसका नाम भी वीरपाल सिंह बताया था।
जीजा ने कहा था किसी और से संबंध मत बनाना
पुलिस की सूचना के बाद 25 अप्रैल 2011 को दनकौर बुलंदशहर निवासी प्रकाश शर्मा ने हरिद्वार पहुंचकर मृतक की पहचान अपने बेटे सुधीर पंडित के रूप में की थी और उसके साथ आई महिला को उसके रिश्ते की साली सुधा शर्मा बताया था।
पुलिस जांच में पता चला कि सुधीर के सुधा शर्मा के साथ अवैध संबंध थे। सुधा शर्मा के एक अन्य व्यक्ति योगेश कुमार शर्मा से भी संबंध बनाने से सुधीर नाराज था और इस बात पर उसने सुधा शर्मा को धमकाया भी था।
शासकीय अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि मामले से संबंधित मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाहों के बयान कराए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि सुधा शर्मा ने योगेश के साथ अवैध संबंधों के चलते षड्यंत्र रचकर सुधीर पंडित की हत्या की है।
न्यायालय ने अभियुक्त सुधा शर्मा पुत्री फकीरचंद निवासी कल्लूपुरा जिला गौतम बुद्ध नगर और योगेश पुत्र महेश चंद निवासी बड़ा केला थाना विजयनगर गाजियाबाद को मामले में दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने यह भी पाया कि विवेचक तत्कालीन उपनिरीक्षक प्रीति पाल रौतेला ने विवेचना के दौरान अभियुक्तगण को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर त्रुटियां की हैं। न्यायालय ने उनके आचरण पर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए हैं।