दुश्मन को फंसाने के लिए कराया अपने खास का कत्ल, जुर्म की ये दास्तां है सबसे अजीब
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उत्तरांखड के जसपुर में एक आदमी ने दुश्मन को फंसाने के लिए अपने खास की जान ले ली। घटना का खुलासा होने के बाद से परिवारजन सकते में हैं।
दया हत्याकांड के खुलासे में चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ। वारदात में घायल लब्बा ने काशीपुर के ब्लॉक प्रमुख का फंसाने के लिए अपनी बहन के ससुर की सुपारी देकर हत्या करा दी।
संदेह न हो इसके लिए उसने अपने ऊपर भी हमला करवाया, लेकिन पुलिस ने पांच दिन में भी मामले का खुलासा कर मुख्य अभियुक्त लब्बा समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तीन तमंचे, एक पिस्टल बरामद की है।
साक्ष्यों के आधार पर लब्बा की संलिप्तता सामने आई
कोतवाली में आयोजित पत्रकार वार्ता में घटना का खुलासा करते हुए एसएसपी सदानंद दाते ने बताया 25 मई की दोपहर 11 बजे ग्राम मिलक सीपका पतरामपुर निवासी दया सिंह की दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
उस समय दया के बेटे का साला मानपुर काशीपुर निवासी देवेंद्र सिंह उर्फ लब्बा वहां मौजूद था, गोली लगने से वह भी घायल हो गया था। मृतक की पत्नी ने दो अज्ञात हमलावरों के खिलाफ तहरीर दी थी।
सीओ राजेश भट्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन किया गया था। जांच में पता चला कि मृतक दया सिंह को 315 बोर के तमंचे से तीन गोलियां मारी गई थीं, जबकि उसके रिश्तेदार लब्बा को 0.32 बोर के पिस्टल से ऐसे स्थान पर गोली मारी गई थी जिससे उसकी मृत्यु होने की संभावना नहीं थी। उसे आंशिक रूप से घायल किया गया था। साक्ष्यों के आधार पर लब्बा की संलिप्तता सामने आई।
पुलिस टीम को ढाई हजार रुपये इनाम देने की घोषणा
29 मई को मुखबिर की सूचना पर देवेंद्र सिंह लब्बा, शंकर उर्फ रवि शर्मा निवासी बाबरखेड़ा थाना कुंडा, नरेंद्र शर्मा निवासी ग्राम भिक्की थाना सिकोड़ा मुजफ्फरनगर, अलीम निवासी मोहल्ला किला मंगलौर हरिद्वार को भोगपुर डाम के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में उन्होंने बताया कि काशीपुर के ब्लॉक प्रमुख गुरमुख सिंह ने वर्ष 2002 में अपने भतीजे की हत्या के आरोप में देवेंद्र सिंह उर्फ लब्बा को जेल भिजवाया था। इस मामले में लब्बा खुद को निर्दोष समझता था। वह गुरमुख सिंह से बदला लेना चाहता था। इसीलिए उसने बेकसूर दया सिंह की हत्या कराकर ब्लॉक प्रमुख को फंसाने की साजिश रची।
लब्बा कुछ दिन पूर्व जमानत पर आया था। जेल में रहते हुए सजायाफ्ता कैदी कलीम से उसकी दोस्ती हो गई। जमानत पर आने के बाद भी वह तारीखों पर कलीम से मिलता रहा। कलीम ने ही अपने भाई अलीम, शंकर उर्फ रवि शर्मा, नरेंद्र शर्मा से मिलवाया था और हथियार उपलब्ध कराए थे। एसएसपी ने पुलिस टीम को ढाई हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
शूटरों को दी थी 10 लाख की सुपारी
शूटरों ने तीन बार रेकी की थी
देवेंद्र सिंह उर्फ लब्बा घटना से तीन दिन पूर्व दया सिंह के घर पहुंच गया था। शूटरों ने उसके घर की तीन बार रेकी की थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचे और पिस्टल और बाइक संख्या यूके 06 एल-9443 बरामद की है। लब्बा को दो गोली मारी गई थी। उस पर काशीपुर जसपुर थाने में तीन अभियोग, शंकर उर्फ रवि शर्मा पर हत्या, हत्या के प्रयास के तीन मुकदमे, नरेंद्र शर्मा पर हत्या, हत्या के प्रयास के पांच मुकदमे व अलीम पर देहरादून में दो मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी देवेंद्र सिंह उर्फ लब्बा ने अपने ऊपर 0.32 बोर पिस्टल से दो गोलियां चलवायी थीं। हत्या के बाद आरोपी भोगपुर डाम की ओर फरार हो गए थे।
मृतक की पत्नी ने लगाई सुरक्षा की गुहार
मृतक की पत्नी भजन कौर ने हत्या के आरोपी देवेंद्र सिंह उर्फ लब्बा के परिजनों से सुरक्षा किए जाने की पुलिस को तहरीर दी है। भजन कौर ने कहा कि उसके पति की हत्या के बाद रात को देवेंद्र सिंह के परिजन उसके घर आए और कहा कि वह अपनी तहरीर वापस ले ले। रिश्तेदारी का मामला है, इसे घर पर ही निपटा लेंगे। तहरीर वापस लेने को मना करने पर वह चले गए। 26 मई की रात को फिर आए और उसे उठाकर ले जाने का प्रयास किया। शोर मचाने पर ग्रामीण आ गए और उन्हें बचाया। आरोपी फरार हो गए। एसएसपी सदानंद दाते ने आश्वस्त दिया कि उसकी और उसके परिवार की सुरक्षा की जाएगी। उसके दोनों पुत्रों को शस्त्र के लाइसेंस दिए जाएंगे।