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कस्टडी में कैदी पर जुल्म: एसओ, एसआई पर केस दर्ज करने का आदेश

Tue, 14 Jun 2016 08:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 14 Jun 2016 08:48 AM IST
सार

  • प्रेमनगर थाने का मामला, डॉक्टरों की रिपोर्ट पर कोर्ट ने उठाए सवाल 
  • तीन डॉक्टरों से भी मांगा जवाब, कहा-क्यों न हो उन पर भी कार्रवाई 

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court order to register case on station officer and sub inspector.
court

विस्तार

पुलिस कस्टडी में आरोपी से मारपीट के मामले में अदालत ने एसएसपी देहरादून को प्रेमनगर थानाध्यक्ष यशपाल सिंह बिष्ट और विवेचक उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा दून अस्पताल के तीन डॉक्टरों डॉ. नवनीत बेदी, डॉ. निधि उनियाल और डॉ. चेतन गिरोटी से पांच दिन के भीतर जवाब तलब करते हुए कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट को गुमराह करने के लिए आठ जून को तैयार की गई सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।

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जमीन धोखाधड़ी और षड़यंत्र के आरोप में बड़ा भारूवाला क्लेमेंटाउन निवासी लियाकत अली ने 11 मई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सरेंडर किया। सरेंडर के दो हफ्ते बाद 24 मई को प्रेमनगर पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के लिए चार घंटे की रिमांड पर लिया।
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आरोप है कि रिमांड की अवधि समाप्त होने से कुछ देर पहले पुलिस ने आरोपी का प्रेमनगर के सरकारी अस्पताल में मेडिकल कराया और जेल में दाखिल कराने के बजाय थाने में ले जाकर मारपीट की। 30 मई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक द्विवेदी ने जिला कारागार का निरीक्षण किया तो पीड़ित के अधिवक्ता दीपक कुमार व पीड़ित ने अपने साथ घटी घटना से उन्हें अवगत कराया। 31 मई को आरोपी के परिजनों ने कोर्ट में आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया।

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हड्डी में था फ्रैक्चर और मेडिकल में बता दिया फिट

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पुलिस - फोटो : amar ujala

पीड़ित के अधिवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बर्मन ने मामले में एसएसपी को जांच कर सात जून 2016 तक रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कोर्ट से दो दिन का समय मांगने के बाद एसएसपी ने 10 जून को अदालत में जो जांच रिपोर्ट पेश की, उसमें पुलिस कस्टडी में मारपीट के आरोप निराधार बताए गए।

पुलिस ने दून अस्पताल के डॉक्टरों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अभियुक्त शारीरिक रूप से फिट है और उसे कोई चोट नहीं है। वहीं 25 मई को जिला कारागार में हुए मेडिकल के दौरान आरोपी के शरीर में चोट की बात साबित हुई। वरिष्ठ रेडियोलोजिस्ट डॉ. एसके झा की रिपोर्ट में भी लियाकत के दाएं हाथ की हड्डी फ्रैक्चर बताया गया।

प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बर्मन ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त की एक्सरे रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए लगता है कि डाक्टरों के पैनल ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुए उन्हें बचाने के आशय से रिपोर्ट तैयार की है। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

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