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दुपहिया पर पीछे बैठे बच्चों को भी हेलमेट से छूट नहीं

Sat, 07 Jul 2018 02:12 AM IST
Updated Sat, 07 Jul 2018 02:12 AM IST
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दुपहिया पर पीछे बैठे बच्चों को भी हेलमेट से छूट नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वाले पांच साल से अधिक के बच्चे भी अब हेलमेट लगाएंगे। इसके साथ ही चौपहिया वाहनों पर क्रश गार्ड (एक्स्ट्रा फ्रंट गार्ड) लगाने वालों की भी खैर नहीं होगी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद यातायात पुलिस ने प्रदेशभर में अभियान चलाकर नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की बात कही है। इसके अलावा प्रभावित करने वाले पदनामों वाली नेम प्लेट हटाने के लिए भी दोबारा से अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
बता दें, गत एक जुलाई को धुमाकोट बस हादसे के बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ओवरलोडिंग, शराब पीकर वाहन चलाने, वाहन चलाते वक्त फोन पर बात करने आदि गंभीर मामलों में सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। साथ ही दोपहिया वाहनों पर हेलमेट जरूरी करने का निर्देश दिया है। दरअसल, लंबे समय से अब दोपहिया वाहनों पर पिलियन राइडर (पीछे की सवारी) को भी हेलमेट जरूरी करने की कवायद चल रही है। हालांकि, समय-समय पर किसी न किसी दबाव के चलते सरकार और प्रशासन को इस मामले में पीछे हटना पड़ता है। लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद अब पीछे बैठने वाली सवारी को भी हेेलमेट पहनना जरूरी होगा। इसके लिए बच्चों (पांच साल से अधिक) को छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा चौपहिया वाहनों में क्रश गार्ड और बुल बार को भी पूरी तरह से प्रतिबंधित करने को कहा गया है।
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क्या है क्रश गार्ड और बुल बार के नुकसान
गाड़ियों को टक्कर से होने वाले नुकसान को बचाने के लिए एक्स्ट्रा फ्रंट बंपर यानी बुल बार और क्रश गार्ड का इस्तेमाल किया जाता है। ये क्रश गार्ड और बुल बार कई बार साधारण दुर्घटना में सवारियों के लिए जानलेवा साबित हुए हैं। वाहन विशेषज्ञों के अनुसार चौपहिया वाहनों के अगले हिस्से में जिस जगह बंपर लगाया जाता है वहीं पर एयरबैग के सेंसर होते हैं। गार्ड लगे होने पर जब वाहन की टक्कर होती है तो ये सेंसर काम नहीं करते। इससे एयरबैग नहीं खुल पाते हैं और अंदर बैठी सवारियों की जान पर बन आती है।
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हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद इनका अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन के बाद हाईकोर्ट के आदेशानुसार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। हेलमेट के संबंध में यातायात पुलिस पूरी तरह से गंभीर है। राजधानी और अन्य बड़े शहरों में चालकों पर इसका असर दिखा है।
-केवल खुराना, निदेशक यातायात पुलिस
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