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नाबालिग बेटी के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में झूठी गवाही देने पर पिता के खिलाफ होगा केस
Thu, 16 May 2019 09:00 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2019 09:00 AM IST
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Rape Victim
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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नाबालिग बेटी के अपहरण और दुष्कर्म के मुकदमे में झूठी गवाही देने के आरोप में वादी पिता के खिलाफ न्यायालय ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वादी के साथ-साथ मां भी अपने पूर्व के बयानों से पलट गई और पीड़िता भी खुद को बालिग बताने लगी।
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इन सब गवाहों के पक्षद्रोही होने पर विशेष पोक्सो जज रमा पांडेय की अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। मुकदमा 10 जनवरी 2015 को डोईवाला थाने में दर्ज किया गया था। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि डोईवाला थाने में एक व्यक्ति ने कहा था कि क्षेत्र के ललित उर्फ सोनू नाम के लड़के ने उसकी बेटी का पहले बहला फुसलाकर अपहरण किया उसके बाद उससे दुष्कर्म कर डाला। इस आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
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अगले दिन आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके बाद पुलिस ने पीड़िता, वादी पिता और मां के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए थे। निर्धारित समय पर पुलिस ने मुकदमे में चार्जशीट भी दाखिल की। इसके बाद अभियोजन की ओर से मुकदमे के ट्रायल के दौरान 13 गवाह पेश किए। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इन गवाहों में से ज्यादातर अपने पूर्व के बयानों से मुकर गए।
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ट्रायल के दौरान वादी पिता ने भी आरोपी ललित के पक्ष में गवाही दी और अपनी बेटी को घटना के समय बालिग बताया। साथ ही यह भी कहा कि जो हुआ वह मर्जी से हुआ। इसी तरह मां भी बेटी को बालिग बताने लगी। खुद पीड़िता ने भी आरोपी के पक्ष में गवाही की। पीड़िता अपना एक दस्तावेज भी अदालत लेकर पहुंची, जिसमें वह बालिग दिखाई गई। हालांकि, यह सब बयान और दस्तावेज झूठे पाए गए। अदालत ने पूर्व और ट्रायल के बयानों का परीक्षण कराया, जिसमें पूर्व के बयान सही और बाद के गलत पाए गए। इस आधार पर अदालत ने पीड़िता के पिता के खिलाफ एसएसपी देहरादून को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।