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कैमरे उतारने को लेकर पुलिस और युवकों में विवाद
Updated Thu, 28 Jun 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
यातायात व्यवस्था का सर्वे करने वाली कंपनी के कर्मचारियों और पुलिस के बीच बुधवार को विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार कर्मचारी मंगलवार देर रात घंटाघर के पास से ट्रैफिक व्यवस्था के बाबत लगाए गए कैमरे उतार रहे थे। पूछताछ में युवक वाजिब जवाब नहीं दे सके। इस पर पुलिसकर्मियों ने युवकों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद सर्वे कंपनी के अधिकारियों के पहुंचने पर मामला रफा-दफा कर दिया गया।
कोतवाल बीबीडी जुयाल ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के लिए सीएमपी कंपनी यातायात व्यवस्था का सर्वे करा रही है। सीएमपी ने सर्वे का कुछ कार्य यूपीएमसी कंपनी को सौंपा है। यूपीएमसी कंपनी इन दिनों कई सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव जांच रही है। इसके लिए उन्होंने घंटाघर के आसपास भी कुछ कैमरे लगाए थे। इन्हीं कैमरों को उतारने के लिए मंगलवार देर रात करीब 11 बजे दो कर्मचारी घंटाघर के पास पहुंचे थे। कैमरे उतारने के दौरान पिकेट में मौजूद सिपाहियों ने युवकों से पूछताछ की तो युवक पश्चिम बंगाल के होने के कारण माकूब जवाब नहीं दे सके। शक होने पुलिसकर्मी दोनों को धारा पुलिस चौकी ले गए। पूछताछ में भी युवक आईकार्ड और किसी प्रकार का अनुमति पत्र नहीं दिखा सके। इसके बाद युवकों को हिरासत में ले लिया गया था। बुधवार दोपहर कंपनी के अधिकारी को बुलाया गया था। पूछताछ में पता चला कि युवक मेट्रो रेल के लिए ट्रैफिक व्यवस्था का सर्वे करने वाली कंपनी की सहायक कंपनी के कर्मचारी हैं। कंपनी ने पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली थी। इस बात को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। हालांकि मामले में देर शाम समझौता हो गया है।
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यातायात व्यवस्था का सर्वे करने वाली कंपनी के कर्मचारियों और पुलिस के बीच बुधवार को विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार कर्मचारी मंगलवार देर रात घंटाघर के पास से ट्रैफिक व्यवस्था के बाबत लगाए गए कैमरे उतार रहे थे। पूछताछ में युवक वाजिब जवाब नहीं दे सके। इस पर पुलिसकर्मियों ने युवकों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद सर्वे कंपनी के अधिकारियों के पहुंचने पर मामला रफा-दफा कर दिया गया।
कोतवाल बीबीडी जुयाल ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के लिए सीएमपी कंपनी यातायात व्यवस्था का सर्वे करा रही है। सीएमपी ने सर्वे का कुछ कार्य यूपीएमसी कंपनी को सौंपा है। यूपीएमसी कंपनी इन दिनों कई सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव जांच रही है। इसके लिए उन्होंने घंटाघर के आसपास भी कुछ कैमरे लगाए थे। इन्हीं कैमरों को उतारने के लिए मंगलवार देर रात करीब 11 बजे दो कर्मचारी घंटाघर के पास पहुंचे थे। कैमरे उतारने के दौरान पिकेट में मौजूद सिपाहियों ने युवकों से पूछताछ की तो युवक पश्चिम बंगाल के होने के कारण माकूब जवाब नहीं दे सके। शक होने पुलिसकर्मी दोनों को धारा पुलिस चौकी ले गए। पूछताछ में भी युवक आईकार्ड और किसी प्रकार का अनुमति पत्र नहीं दिखा सके। इसके बाद युवकों को हिरासत में ले लिया गया था। बुधवार दोपहर कंपनी के अधिकारी को बुलाया गया था। पूछताछ में पता चला कि युवक मेट्रो रेल के लिए ट्रैफिक व्यवस्था का सर्वे करने वाली कंपनी की सहायक कंपनी के कर्मचारी हैं। कंपनी ने पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली थी। इस बात को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। हालांकि मामले में देर शाम समझौता हो गया है।
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