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बाल मजदूरी करवाने पर 60 हजार का जुर्माना
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
सेलाकुई। शराब की कैंटीन से छुड़ाए गए आठ बच्चों को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया। सभी आठों बच्चों के माता पिता से मामले में बाल मजदूरी नहीं कराए जाने के शपथ पत्र भराए गए हैं। वहीं श्रम विभाग ने मामले में कार्रवाई करते हुए कैंटीन स्वामी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पूर्व कैंटीन स्वामी के खिलाफ बाल मजदूरी कराए जाने पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
बीते बुधवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम ने बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्यों के साथ मिलकर बुधवार को सेलाकुई स्थित एक शराब की कैंटीन में काम कर रहे आठ बच्चे मुक्त कराए थे। सभी बच्चों की उम्र लगभग 8-14 साल के बीच की है। पुलिस ने सभी बच्चों को अभिरक्षा में ले लिया था। इस मामले में लेबर इंस्पेक्टर पिंकी टम्टा की तहरीर पर कैंटीन मालिक के खिलाफ बाल मजदूरी कराने का मुकदमा दर्ज कराया था। बच्चों को रात को एक गेस्ट हाउस में रखा गया। जहां से बृहस्पतिवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि आयोग बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करने के लिए तैयार है, लेकिन अभिभावकों ने खुद ही बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी ली है। ऐसे में बच्चों पर नजर रखी जाएगी कहीं उनसे दोबारा से बाल मजदूरी न कराई जाए।
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सेलाकुई। शराब की कैंटीन से छुड़ाए गए आठ बच्चों को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया। सभी आठों बच्चों के माता पिता से मामले में बाल मजदूरी नहीं कराए जाने के शपथ पत्र भराए गए हैं। वहीं श्रम विभाग ने मामले में कार्रवाई करते हुए कैंटीन स्वामी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पूर्व कैंटीन स्वामी के खिलाफ बाल मजदूरी कराए जाने पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
बीते बुधवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम ने बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्यों के साथ मिलकर बुधवार को सेलाकुई स्थित एक शराब की कैंटीन में काम कर रहे आठ बच्चे मुक्त कराए थे। सभी बच्चों की उम्र लगभग 8-14 साल के बीच की है। पुलिस ने सभी बच्चों को अभिरक्षा में ले लिया था। इस मामले में लेबर इंस्पेक्टर पिंकी टम्टा की तहरीर पर कैंटीन मालिक के खिलाफ बाल मजदूरी कराने का मुकदमा दर्ज कराया था। बच्चों को रात को एक गेस्ट हाउस में रखा गया। जहां से बृहस्पतिवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।
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बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि आयोग बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करने के लिए तैयार है, लेकिन अभिभावकों ने खुद ही बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी ली है। ऐसे में बच्चों पर नजर रखी जाएगी कहीं उनसे दोबारा से बाल मजदूरी न कराई जाए।
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