{"_id":"5a202ec24f1c1bd1408ba1a1","slug":"151205868718-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लालच के खेल में लुट रही जमा-पूंजी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
लालच के खेल में लुट रही जमा-पूंजी
Updated Thu, 30 Nov 2017 09:50 PM IST
विज्ञापन
श्रीनगर। धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किए गए जाकिर हुसैन की कहानी पहाड़ में गैर-कानूनी तरीके से चल रही बैंकिंग का खुलासा करती है। श्रीनगर समेत अन्य क्षेत्रों में गैर-कानूनी तरीके से ऊंचे ब्याज दर पर करोड़ों रुपये कर्ज का खेल चल रहा है।
बैंक जहां सालाना 11 से 14 फीसदी ब्याज लेते हैं, वहीं इस धंधे में लिप्त लोग सालभर में 30 से 40 फीसदी तक ब्याज वसूल रहे हैं। सूदखोरी के इस धंधे में कई लोग कंगाल हो चुके हैं। जाकिर भी इन्ही में से एक है। जब वह श्रीनगर आया था तो उसके पास 50 हजार रुपये थे, लेकिन जब वह कर्जदारों से परेशान होकर भागा तो उस पर करीब 85 लाख रुपये का कर्ज चढ़ चुका था। गैर-कानूनी बैंकिंग भरोसे और जुबान के भरोसे चल रही है। इसके कोई कानूनी दस्तावेज नहीं होते हैं, ऐसे में पुलिस भी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती है।
पहाड़ में लंबे समय से लेन-देन का अवैध धंधा चल रहा है। लालच के इस खेल में काफी संख्या में लोग शामिल हैं। ऊंचे ब्याज दर में बाजार में कर्ज देने वाले कुछ लोग लालच देकर लोगों से रकम ले रहे हैं। यह रकम जरूरतमंद या परेशानी में पड़े व्यापारी या अन्य वर्ग के लोगों को दे दिया जाता है।
विज्ञापन
जाकिर का मामला भी ऐसा ही है। उसने कई लोगों से प्रतिमाह 2 फीसदी ब्याज दर से रकम उठाई और इस रकम को ढाई फीसदी ब्याज दर पर अन्य को दे दिया। लालच में कई लोग इस धंधे में फंस गए। एक आदमी ने तो अपनी जमीन बेचकर 9 लाख रुपये ब्याज के इस धंधे में लगा दिए, लेकिन उसे ब्याज की दो-तीन किस्तों के अलावा वापस कुछ नहीं मिल पाया। सूत्रों के अनुसार जाकिर तो छोटी मछली है। असली सूदखोरों का बाजार में धंधा चल ही रहा है।
विज्ञापन
बैंक जहां सालाना 11 से 14 फीसदी ब्याज लेते हैं, वहीं इस धंधे में लिप्त लोग सालभर में 30 से 40 फीसदी तक ब्याज वसूल रहे हैं। सूदखोरी के इस धंधे में कई लोग कंगाल हो चुके हैं। जाकिर भी इन्ही में से एक है। जब वह श्रीनगर आया था तो उसके पास 50 हजार रुपये थे, लेकिन जब वह कर्जदारों से परेशान होकर भागा तो उस पर करीब 85 लाख रुपये का कर्ज चढ़ चुका था। गैर-कानूनी बैंकिंग भरोसे और जुबान के भरोसे चल रही है। इसके कोई कानूनी दस्तावेज नहीं होते हैं, ऐसे में पुलिस भी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती है।
विज्ञापन
पहाड़ में लंबे समय से लेन-देन का अवैध धंधा चल रहा है। लालच के इस खेल में काफी संख्या में लोग शामिल हैं। ऊंचे ब्याज दर में बाजार में कर्ज देने वाले कुछ लोग लालच देकर लोगों से रकम ले रहे हैं। यह रकम जरूरतमंद या परेशानी में पड़े व्यापारी या अन्य वर्ग के लोगों को दे दिया जाता है।
विज्ञापन
जाकिर का मामला भी ऐसा ही है। उसने कई लोगों से प्रतिमाह 2 फीसदी ब्याज दर से रकम उठाई और इस रकम को ढाई फीसदी ब्याज दर पर अन्य को दे दिया। लालच में कई लोग इस धंधे में फंस गए। एक आदमी ने तो अपनी जमीन बेचकर 9 लाख रुपये ब्याज के इस धंधे में लगा दिए, लेकिन उसे ब्याज की दो-तीन किस्तों के अलावा वापस कुछ नहीं मिल पाया। सूत्रों के अनुसार जाकिर तो छोटी मछली है। असली सूदखोरों का बाजार में धंधा चल ही रहा है।