{"_id":"5b5f77384f1c1b51748b7ef5","slug":"121532983096-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने दिए मुकदमे के आदेश","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने दिए मुकदमे के आदेश
Updated Tue, 31 Jul 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोपियों के खिलाफ न्यायालय ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) रमेश सिंह की अदालत ने डालनवाला थाना पुलिस को 24 घंटे में एफआईआर की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले में गंभीरता से जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
डालनवाला निवासी चेतन कंसवाल ने अप्रैल 2018 में पुलिस से अपने साथ हुई ठगी की शिकायत की थी। मगर पुलिस ने मामले में कोई रुचि नहीं दिखाई और मुकदमा दर्ज नहीं किया। चेतन की शिकायत थी कि उसका बड़ा भाई गिरीश कंसवाल किसी रुपेश तिवारी के साथ काम करता था। मार्च 2018 में रुपेश ने गिरीश से कहा कि वह उसके भाई की मर्चेंट नेवी में नौकरी लगवा देगा। इसके लिए कुछ दलालों को रुपये देने होंगे। गिरीश इस पर राजी हो गया। उसने सूरज त्रिपाठी और विवेक कुमार चौबे के खातों में अलग-अलग तिथियों में 1.07 लाख रुपये जमा करा दिए।
इसके बाद जब तय तिथि पर नौकरी नहीं लगी तो उसने अपने पैसे मांगे, लेकिन तीनों युवकों ने पैसा देने से इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। थाने में सुनवाई नहीं होने के कारण चेतन ने न्यायालय की शरण ली। चेतन के अधिवक्ता शिवम वर्मा ने बताया कि न्यायालय ने सूरज त्रिपाठी, रुपेश तिवारी और विवेक कुमार चौबे के खिलाफ धोखाधड़ी एवं अन्य अपराधों में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोपियों के खिलाफ न्यायालय ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) रमेश सिंह की अदालत ने डालनवाला थाना पुलिस को 24 घंटे में एफआईआर की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले में गंभीरता से जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
डालनवाला निवासी चेतन कंसवाल ने अप्रैल 2018 में पुलिस से अपने साथ हुई ठगी की शिकायत की थी। मगर पुलिस ने मामले में कोई रुचि नहीं दिखाई और मुकदमा दर्ज नहीं किया। चेतन की शिकायत थी कि उसका बड़ा भाई गिरीश कंसवाल किसी रुपेश तिवारी के साथ काम करता था। मार्च 2018 में रुपेश ने गिरीश से कहा कि वह उसके भाई की मर्चेंट नेवी में नौकरी लगवा देगा। इसके लिए कुछ दलालों को रुपये देने होंगे। गिरीश इस पर राजी हो गया। उसने सूरज त्रिपाठी और विवेक कुमार चौबे के खातों में अलग-अलग तिथियों में 1.07 लाख रुपये जमा करा दिए।
विज्ञापन
इसके बाद जब तय तिथि पर नौकरी नहीं लगी तो उसने अपने पैसे मांगे, लेकिन तीनों युवकों ने पैसा देने से इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। थाने में सुनवाई नहीं होने के कारण चेतन ने न्यायालय की शरण ली। चेतन के अधिवक्ता शिवम वर्मा ने बताया कि न्यायालय ने सूरज त्रिपाठी, रुपेश तिवारी और विवेक कुमार चौबे के खिलाफ धोखाधड़ी एवं अन्य अपराधों में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन