देहरादून: मुक्तिधाम में अस्थियों से फुल होने लगे लॉकर, कर्फ्यू के कारण विसर्जन के लिए अस्थियां नहीं ले जा पा रहे लोग
देहरादून में अंतिम संस्कार के बाद कई लोगों के अस्थि कलश श्मशान घाट में ही लॉकरों में रखे हुए हैं। कर्फ्यू के कारण लोग अस्थि विजर्सन की राह देख रहे हैं।
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हिंदू धर्म के अनुसार पवित्र नदी में अस्थि विसर्जन करने का बड़ा महत्व है। लेकिन 26 अप्रैल से प्रदेश सरकार की ओर से लगाए कोविड कर्फ्यू के चलते लोग अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार नहीं जा पा रहे हैं। जिसके चलते लक्खीबाग स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार होने के बाद रखी गई अस्थियों से सभी 18 लॉकर फुल हो गए हैं।
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ऐसे में अस्थियों को बोरों में रखा जा रहा है। लक्खीबाग स्थित मोक्षधाम में सामान्य मृतकों के शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बीते कुछ दिन से यहां रोजाना करीब 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
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ऐसे में लोग अंतिम संस्कार कराने के बाद अस्थियों को मोक्षधाम के लॉकर में सुरक्षित रख रहे हैं। हालांकि कुछ लोग पंडितों की सलाह पर आसपास की नदियों में ही अस्थियों का विसर्जन कर रहे हैं।
समिति ने किया विसर्जन
लक्खीबाग मुक्तिधाम की संचालक समिति शिवाजी सेवा समिति के मंत्री विनोद गोयल ने बताया कि करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई अस्थियां लेने नहीं आया तो समिति की ओर से एक सप्ताह पहले दो बोरे में रखी सभी अस्थियों को हरिद्वार जाकर विसर्जन किया गया। हालांकि लॉकर में रखी अस्थियां सुरक्षित हैं।
मालदेवता, टपकेश्वर में कर रहे विसर्जन
कोविड कर्फ्यू के चलते हरिद्वार नहीं जा पा रहे लोग मालदेवता और टपकेश्वर नदी में अस्थि विसर्जन कर रहे हैं। पंडित विनोद जोशी ने बताया कि अंतिम संस्कार के दस दिन बाद अस्थि विसर्जन करने की मान्यता होती है। ऐसे में लोग आसपास की नदियों में ही अस्थियों का विसर्जन कर रहे हैं।