Corona in Uttarakhand: 316 नए संक्रमित मिले, चार की मौत, मरीजों का आंकड़ा 63 हजार पार
- मंगलवार को चार कोरोना मरीजों की मौत, 316 संक्रमित मिले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 63 हजार पार हो गया है। बीते 24 घंटे के भीतर चार मरीजों की मौत और 316 नए संक्रमित मिले हैं। वहीं, 409 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को 12481 सैंपल जांच में निगेटिव पाए गए। प्रदेश में 316 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या 63197 हो गई है।
मंगलवार को देहरादून जिले में सबसे अधिक 74 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। ऊधमसिंह नगर में 59, पौड़ी में 43, नैनीताल में 29, हरिद्वार में 21, अल्मोड़ा में 19, पिथौरागढ़ में 19, टिहरी में 14, चमोली में 13, उत्तरकाशी में 12, टिहरी में सात, बागेश्वर व चंपावत जिले में तीन-तीन कोरोना संक्रमित मिले।
यह भी पढ़ें: Unlock 6.0 Guidelines: उत्तराखंड के रानीखेत में स्कूल पहुंचा 12वीं का छात्र निकला कोरोना संक्रमित
प्रदेश में आज चार संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। इसमें दून मेडिकल कॉलेज में एक, कैलाश हॉस्पिटल में एक, हिमालयन हॉस्पिटल में एक, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में एक मरीज ने दम तोड़ा है। अब तक 1033 संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं, 57951 मरीज ठीक हो चुके हैं।
हमें चिंता करनी होगी
उत्तराखंड में अक्तूबर माह के दौरान कोरोना के मामलों में करीब 31 प्रतिशत की कमी आई है। यह खबर राज्य के लोगों के लिए निसंदेह राहत वाली है। लेकिन कोरोना की इस राहत में हमें खतरे की आहट नहीं सुनाई दे रही है। फेस्टिव सीजन की मस्ती में टूट रहे नियम कायदों से प्रदेश सरकार चिंतित है।
प्रदेश में कोरोना को लेकर चिंता करने की आवश्यकता इसलिए भी है कि राज्य में कोरोना से मरने वालों की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। राष्ट्रीय औसत 1.49 प्रतिशत तुलना में राज्य में कोरोना से मारे जाने वालों की दर 1.63 प्रतिशत है।
सियासी कार्यक्रमों में भी ढिलाई
सत्तारूढ़ भाजपा से लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में भी कोरोना की रोकथाम के लिए जरूरी नियम कायदों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। खासतौर पर सामाजिक दूरी के नियम की पूरी तरह से अवहेलना हो रही है। इसकी ताजा मिसाल राजभवन में कांग्रेस का कूच, विधानसभा में राज्यसभा का चुनाव और आम आदमी पार्टी व यूकेडी के कार्यक्रमों में कई कार्यकर्ता मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने के नियम कायदों की अनदेखी करते देखे गए हैं।
अनलॉक के दौरान गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन हर हाल में होना चाहिए। यदि हम यह सोच रहे हैं कि कोरोना खत्म हो गया तो यह हमारी सबसे बड़ी भूल है। हमें फेस्टिव सीजन में खास सावधानी बरतनी है। मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का हर हाल पालन करना होगा। अन्यथा केरल, मिजोरम और दिल्ली उदाहरण हैं, जहां केस बढ़े हैं।
- अनूप नौटियाल, संस्थापक, सोशल डेवलमेंट फॉर कम्युनिकेशन फाउंडेशन