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Coronavirus in Uttarakhand : संक्रमित होने के बाद भी कम नहीं हुआ सेवा का जज्बा, जीता सभी का दिल

Fri, 01 Jan 2021 12:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 01 Jan 2021 12:37 PM IST
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Coronavirus in uttarakhand latest news today:  Even after being infected by corona spirit of service not decrease
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)

कोरोना संकट के दौरान कई लोगों ने अपने सेवा भाव से लोगों का दिल जीत लिया। शुरूआती दौर में जब लोग मरीजों के पास जाने तक में घबरा रहे थे, तब कोविड दून अस्पताल की टीम ने न केवल मरीजों का उपचार किया।

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बल्कि, काउंसिलिंग कर उन्हें मानसिक रूप से भी बीमारी से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान ये खुद भी संक्रमित हो गए, लेकिन सेवाभाव में कोई कमी नहीं आई। खुद बीमारी से लड़कर ठीक हुए और दोबारा मरीजों की सेवा में जुट गए।
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यूं तो सभी डॉक्टर, सहायक स्टाफ, पीआरओ, सफाईकर्मी इस लड़ाई में एकजुट होकर काम कर रहे थे, लेकिन कुछ लोग ऐसे थे, जिनके जज्बे की सबने सराहना की। 

डॉ. सयाना ने बढ़-चढ़कर किया नेतृत्व

दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने शुरूआत से अपनी टीम का कुशल नेतृत्व करते हुए कोरोना के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने न केवल मरीजों को शारीरिक रूप से मजबूत किया। बल्कि, मानसिक रूप से भी मजबूत करने में जुटे रहे।
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बीमारी की शुरूआत में डॉ. सयाना के नेतृत्व में अस्पताल की टीम दिन रात मरीजों की सेवा में जुटी रही। इस दौरान डॉ. सयाना खुद भी संक्रमित हुए, लेकिन उस दौरान भी वो फोन पर अपनी पूरी टीम को दिशा-निर्देश देते रहे। बाद में वो ठीक होकर लौटे और फिर उसी सेवाभाव से अपने काम में जुट गए। डॉ. सयाना और उनकी टीम के इस समर्पण से प्रभावित होकर कई संस्थाएं उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं।

पीआरओ सेक्शन ने जीता सबका दिल

आमतौर पर किसी भी संस्थान में पीआरओ की भूमिका महज मीडिया मैनेजमेंट तक सीमित होती है, लेकिन कोरोना काल में दून अस्पताल के पीआरओ सेक्शन ने नया अध्याय लिखा। अपने सेवा भाव से उन्होंने मरीजों और उनके तीमारदारों का दिल जीत लिया। इस दौरान उन्होंने 30 हजार से ज्यादा फोन कॉल रिसीव किए।

मुख्य पीआरओ महेंद्र भंडारी और सहायक पीआरओ संदीप राणा खुद दिन रात मरीजों की सेवा में जुटे रहे। संक्रमित होने के दौरान और बाद में भी उनके सेवा भाव में कोई कमी नहीं आई। मरीजों का डाटा अपडेट करना, अधिकारियों तक सूचना पहुंचाना, हर भर्ती होने वाले मरीज के उपचार के लिए समन्वय बनाना उनके रोजाना के काम थे। अपने सेवा भाव से उन्होंने लोगों के दिलों में ऐसी जगह बनाई कि स्वस्थ होकर लौट चुके कई लोग उन्हें आज भी फोन कर आभार जताते हैं।
 

संक्रमित हुए थे डीजीपी अशोक कुमार

डीजीपी अशोक कुमार भी कोरोना संक्रमण का शिकार हुए थे। डीजी लॉ एंड ऑर्डर रहते हुए उन्हें संक्रमण ने घेर लिया था। इस दौरान तय गाइडलाइन के अनुसार क्वारंटीन रहने के बाद डीजी अशोक कुमार फिर पूरे जज्बे के साथ काम पर लौटे और नई ऊर्जा के साथ बागडोर संभाली। इससे पहले पत्नी को कोरोना होने के साथ ही उन्हें भी क्वारंटीन अवधि से गुजरना पड़ा था।

नौकरी में डोभाल दूसरों के लिए भी मिसाल

एसपी देहात परमेंद्र डोभाल भी कोरोना संक्रमण से नहीं बच पाए थे। अपनी टीम के साथ अगली पंक्ति में खड़े रहकर उन्होंने जनता की मदद की। तय अवधि तक क्वारंटीन रहने के बाद वह फिर से काम पर लौट आए और दूसरों को भी इससे बचने की सलाह दी। 24 घंटे मुस्तैद रहने वाली अपनी इस नौकरी में डोभाल दूसरों के लिए भी एक मिसाल हैं।

स्टाफ नर्स की सेवा ने किया जादू सा असर

स्टाफ नर्स प्रतिमा लखेड़ा भी दिन रात मरीजों की सेवा में जुटी रहीं। शुरूआत में डॉक्टर और नर्स भी संक्रमितों के पास जाने में घबरा रहे थे। तब प्रतिमा और उनकी टीम ने हिम्मत दिखाई। डॉक्टरों के साथ वो मरीजों के उपचार और सेवा में जुटे रहे। उन्हीं के प्रयासों का नतीजा रहा कि कोरोना के ज्यादातर मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। इस दौरान प्रतिमा और उनके कई साथी कोरोना संक्रमित हुए, लेकिन नर्सिंग स्टाफ फिर भी हर मरीज की सेवा में जुटा रहा। अस्पताल में भर्ती परिवार से दूर बीमार मरीज के लिए स्टाफ नर्स की सेवा ने जादू सा असर किया।

कोरोना से लड़कर भी काम पर डटे रहे पुलिस योद्धा

बीते साल यानि 2020 में कोरोना संक्रमण ने चौतरफा मार की है। इसमें अगले मोर्चे पर डटने वाली पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी अछूते नहीं रहे। 1500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को कोरोना ने घेरा। इनमें से कई काल के गाल में भी समा गए। बावजूद इसके अधिकारियों के जज्बे को देखते हुए पुलिस फोर्स अगली पंक्ति में लोगों की मदद करने में जुटी रही।

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