{"_id":"5e6b2aba8ebc3ea4ea061f2c","slug":"corona-uttarakhand-hotel-and-tourism-industry-effects-cancellation-of-tour-booking","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड के होटल और पर्यटन उद्योग पर भी कोरोना का कहर, टूर बुकिंग हो रही कैंसिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड के होटल और पर्यटन उद्योग पर भी कोरोना का कहर, टूर बुकिंग हो रही कैंसिल
Fri, 13 Mar 2020 12:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 13 Mar 2020 12:26 PM IST
सार
- टूर बुकिंग हो रही कैंसिल, विदेशी पर्यटकों की संख्या भी घटी
- मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश समेत कई स्थानों पर पर्यटकों की आमद घटी
विज्ञापन
चरधाम यात्रा
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वैश्विक स्तर पर फैले कोरोना संक्रमण की दहशत का असर उत्तराखंड के होटल और पर्यटन उद्योग के ऊपर भी कहर बनकर पड़ा है। हालत यह है कि पर्यटक भीड़भाड़ और खुले स्थानों पर जाने से घबरा रहे हैं। उत्तराखंड में भी पूर्व में की गई टूर बुकिंग कैंसिल की गई हैं। आजकल गुलजार रहने वाले प्रदेश के लगभग सभी छोटे-बड़े होटल पर्यटकों की राह ताक रहे हैं।
विज्ञापन
मार्च-अप्रैल-मई में कई जगह स्कूलों की छुट्टियां होने और चारधाम यात्रा व पर्यटन सीजन की शुरूआत नजदीक होने की वजह से यह समय उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता है। मौसम के हिसाब से भी इस दौरान पर्यटन और तीर्थाटन अधिक रहता है।
विज्ञापन
ऐसे समय में कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर हुई दहशत की स्थिति से पर्यटन उद्योग भी सहम गया है। प्रदेश के छोटे-बड़े तमाम होटलों में 70 से 80 प्रतिशत कमरे खाली हैं। विदेशी टूरिस्ट और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के अलावा स्थानीय पर्यटक भी पर्यटन स्थलों पर जाने से कतरा रहे हैं।
विज्ञापन
स्कूली छात्रों के विभिन्न ग्रुप की बुकिंग कैंसिल
जीआईओ एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के महाप्रबंधक सतीश खंडूड़ी ने बताया कि मार्च-अप्रैल में दिल्ली, लखनऊ आदि शहरों से स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्रों और टीचर्स के ग्रुप बड़ी संख्या में चकराता, उत्तरकाशी, टिहरी, ओली, कुंड, रानीखेत, नैनीताल आदि स्थानों पर पहुंचते हैं। इस बार अब तक कोरोना के डर से सिर्फ उन्हीं की कंपनी के 12 ग्रुप ने पूर्व में की गई बुकिंग कैंसिल करा दी है।
स्थानीय रोजगार पर भी पड़ेगा असर
उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के स्टेट वाइस प्रेजीडेंट एवं देहरादून स्थित मधुबन होटल के संचालक मनु कोचर ने बताया कि कोरोना के डर के चलते उत्तराखंड के होटल और पर्यटन उद्योग को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।
मसूरी, नैनीताल, कार्बेट पार्क जैसे आमतौर पर गुलजार रहने वाले खूबसूरत स्थल भी सूने पड़े हैं। होटल के साथ ही रेस्टोरेंट भी लगभग खाली हैं। यही हाल रहे तो होटल संचालकों को कर्मचारी घटाने पड़ेंगे। जिसका स्थानीय रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
मसूरी में 90 प्रतिशत ग्रुप कांफ्रेंस रद्द
पहाड़ों की रानी मसूरी के पर्यटन व्यवसाय को भी इससे भारी नुकसान पहुंचा है। उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं मसूरी स्थित होटल ब्रैंटवुड के संचालक संदीप साहनी ने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। जबकि 90 प्रतिशत ग्रुप कांफ्रेंस भी अब तक कैंसिल हुई है। हालात न सुधरे तो इसका असर स्थानीय और प्रदेश की आर्थिकी पर भी पड़ेगा।
विदेशी पर्यटकों की भी भारी कमी
पर्यटन विशेषज्ञ एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) लिमिटेड के पूर्व प्रचार अधिकारी प्रशांत नेगी ने बताया कि इस समय पौड़ी, खिर्सू, ऋषिकेश, नैनीताल, कौसानी, रानीखेत आदि हिल स्टेशनों पर पर्यटकों की आमद बढ़नी शुरू हो जाती थी। इस बार यहां हालत उलट हैं। अब नए फैसले से विदेशी पर्यटकों की भी भारी कमी होगी।
जीएमवीएन को तीर्थाटन का सहारा
उत्तराखंड पर्यटन विभाग के निगम जीएमवीएन को तीर्थाटन का सहारा है। जीएमवीएन के महाप्रबंधक (पर्यटन) जितेंद्र कुमार ने बताया कि फिलहाल तो चार धाम यात्रा के लिए बुकिंग अच्छी आ रही है। आने वाले समय में जब मौसम सही हो जाएगा तीर्थाटन और अच्छा होने की उम्मीद है।
मसूरी, नैनीताल, कार्बेट पार्क जैसे आमतौर पर गुलजार रहने वाले खूबसूरत स्थल भी सूने पड़े हैं। होटल के साथ ही रेस्टोरेंट भी लगभग खाली हैं। यही हाल रहे तो होटल संचालकों को कर्मचारी घटाने पड़ेंगे। जिसका स्थानीय रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
मसूरी में 90 प्रतिशत ग्रुप कांफ्रेंस रद्द
पहाड़ों की रानी मसूरी के पर्यटन व्यवसाय को भी इससे भारी नुकसान पहुंचा है। उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं मसूरी स्थित होटल ब्रैंटवुड के संचालक संदीप साहनी ने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। जबकि 90 प्रतिशत ग्रुप कांफ्रेंस भी अब तक कैंसिल हुई है। हालात न सुधरे तो इसका असर स्थानीय और प्रदेश की आर्थिकी पर भी पड़ेगा।
विदेशी पर्यटकों की भी भारी कमी
पर्यटन विशेषज्ञ एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) लिमिटेड के पूर्व प्रचार अधिकारी प्रशांत नेगी ने बताया कि इस समय पौड़ी, खिर्सू, ऋषिकेश, नैनीताल, कौसानी, रानीखेत आदि हिल स्टेशनों पर पर्यटकों की आमद बढ़नी शुरू हो जाती थी। इस बार यहां हालत उलट हैं। अब नए फैसले से विदेशी पर्यटकों की भी भारी कमी होगी।
जीएमवीएन को तीर्थाटन का सहारा
उत्तराखंड पर्यटन विभाग के निगम जीएमवीएन को तीर्थाटन का सहारा है। जीएमवीएन के महाप्रबंधक (पर्यटन) जितेंद्र कुमार ने बताया कि फिलहाल तो चार धाम यात्रा के लिए बुकिंग अच्छी आ रही है। आने वाले समय में जब मौसम सही हो जाएगा तीर्थाटन और अच्छा होने की उम्मीद है।