सीएम त्रिवेंद्र बोले- हर हाल में पहाड़ में ही बनेगी एनआईटी, छोड़कर गए 900 छात्रों के लौटने का इंतजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के स्थायी परिसर का हर हाल में यहीं निर्माण किया जाएगा। इसे किसी भी सूरत में पहाड़ से बाहर शिफ्ट नहीं किया जाएगा। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से यह बात कही। मुख्यमंत्री गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर में भूगोल विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ को यहां पहुंचे थे। उधर, मंगलवार को एनआईटी छोड़कर गए छात्र-छात्राओं के परिजनों की ओर से एनआईटी प्रबंधन को तीसरे दिन भी ई मेल का कोई रिस्पांस नहीं मिला है। प्रबंधन छात्रों के कक्षाओं में लौटने का इंतजार कर रहा है।
इधर, कार्यक्रम में पहुंचे उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि एनआईटी मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बात हुई है। एनआईटी के स्थायी परिसर का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। संस्थान के लिए जलेथा के ग्रामीणों ने 122 एकड़ जमीन नि:शुल्क दी है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग एनआईटी को पहाड़ से बाहर ले जाने का सपना देख रहे हैं, उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। डा. रावत ने कहा कि एनआईटी के छात्रों के लिए पुराने आईटीआई परिसर में अस्थायी छात्रावास निर्माण पर भी विचार किया जा रहा है। छात्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर आने से दिक्कत है तो उनके लिए शहतूत फार्म से मार्ग बनाया जा सकता है।
जल्द शुरू होगा एनआईटी परिसर का निर्माण कार्य : धन सिंह
एनआईटी के स्थायी परिसर का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। एनआईटी का निर्माण दो चरणों में होगा। कुछ लोग चाह रहे हैं कि एनआईटी पहाड़ से बाहर चली जाए। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मानव संसाधन मंत्री से मिले सांसद बलूनी
एनआईटी श्रीनगर के छात्रों की समस्याओं को लेकर भाजपा राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और सांसद अनिल बलूनी ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात की। सांसद ने एचआरडी मंत्री से छात्रों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने दो दिन के भीतर छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बलूनी ने कहा कि छात्रों के भविष्य तथा उनकी न्यायोचित मांगों और सुरक्षा के विषय में चर्चा करके मांग की कि तत्काल छात्रों को सुरक्षित परिसर उपलब्ध कराया जाए। केंद्रीय मंत्री को सांसद ने बताया कि छात्रों के साथ अभिभावक और एनआईटी संस्थान भी इस विषय को लेकर चिंतित हैं।
सांसद बलूनी ने कहा कि मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि एक दो दिन में छात्रों की मांगों पर अमल करते हुए उनके लिए सुरक्षित परिसर की व्यवस्था कर दी जाएगी। शीघ्र एनआईटी परिसर के लिए भूमि चयन की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
हिमालय संरक्षण हो प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर में भूगोल विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि हिमालय की जरूरत हमें है, हिमालय को हमारी जरूरत नहीं। हमारी पहली प्राथमिकता हिमालय का संरक्षण होना चाहिए। प्रकृति का शोषण किए बिना प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जाना चाहिए।
गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर स्थित एसीएल हॉल में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। विवि का भूगोल विभाग भारतीय हिमालय में पर्यावरण, संसाधन एवं विकास विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित कर रहा है। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण के क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक कार्य जन-जन तक कैसे पहुंचे, इस पर कार्य होना चाहिए। रावत ने कहा कि भारत की संस्कृति को हिमालयी संस्कृति कहा जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान क्या हो सकता है हमें इस ओर ध्यान देना होगा। विशिष्ठ अतिथि देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें किताबों से बाहर आना होगा। जीबी पंत के निदेशक डा. आरएस रावल ने कहा कि हिमालय जलवायु को नियंत्रित करता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने की। इस मौके पर पौड़ी परिसर के निदेशक प्रो. केसी पुरोहित, श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डा. यूएस रावत, गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एमएसएम रावत, डा. बीपी नैथानी आदि मौजूद थे।
घोषणा करने वाला मुख्यमंत्री नहीं हूं
बिड़ला परिसर में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि मैं घोषणा करने वाला मुख्यमंत्री नही, बल्कि काम करने वाला हूं। इसलिए मुझसे घोषणा मत करवाना।