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Dehradun News: वन्यजीव हमलों पर केंद्र गंभीर, राज्यों के माध्यम से यथासंभव मदद
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- राज्यसभा में सांसद महेंद्र के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। केंद्र सरकार वन्यजीव हमलों को लेकर गंभीर है। राज्यों के माध्यम से यथासंभव मदद कर रही है। संसद में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के सवाल पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ये जवाब दिया।
केंद्रीय मंत्री यादव ने बताया कि उत्तराखंड राज्य सहित देश के विभिन्न भागों से समय-समय पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की सूचना मिलती रहती है। इस संघर्ष में भालू और तेंदुए सहित विभिन्न वन्य पशु शामिल हैं। हालांकि, मानव-पशु संघर्ष को कम करने सहित वन्यजीवों का प्रबंधन मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मंत्रालय देश में वन्यजीवों व उनके प्रवास के प्रबंधन के लिए केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं वन्यजीव पर्यावासों का विकास और बाघ और हाथी परियोजना के तहत राज्य सरकारी और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जिसमें सहायता प्राप्त कार्यप्रणाली में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की खरीद, जंगली जानवरी को फसल लगे खेती में प्रवेश करने से रोकने के लिए कांटेदार तार की बाड़, सौर ऊर्जा से चलने वाली बिजली की बाड़ जैव-बाड़ सीमा पर दीवारें आदि जैसी भौतिक का निर्माण और स्थापना, मवेशियों की चोरी फसल की क्षति, जान माल की हानि सहित जंगली जानवरों की ओर से किए गए नुकसान के लिए मुआवजा शामिल है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई दल भी तैनात किए जाते हैं। मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में इन योजनाओं के तहत जंगली जानवरों के हमलों से मृत्यु या स्थायी अशक्तता की स्थिति में अनुग्रह राशि को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया। जंगली जानवरों की ओर से किए नुकसान की प्रकृति के अनुसार दी जा रही मदद में मृत्यु या स्थाई अशक्तता में 10 लाख रुपए, गंभीर चोट में दो लाख रुपए, मामूली चोट में 25 हजार रुपए, संपत्ति या फसल हानि में राज्य सरकारें अपने नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। केंद्र सरकार वन्यजीव हमलों को लेकर गंभीर है। राज्यों के माध्यम से यथासंभव मदद कर रही है। संसद में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के सवाल पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ये जवाब दिया।
केंद्रीय मंत्री यादव ने बताया कि उत्तराखंड राज्य सहित देश के विभिन्न भागों से समय-समय पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की सूचना मिलती रहती है। इस संघर्ष में भालू और तेंदुए सहित विभिन्न वन्य पशु शामिल हैं। हालांकि, मानव-पशु संघर्ष को कम करने सहित वन्यजीवों का प्रबंधन मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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मंत्रालय देश में वन्यजीवों व उनके प्रवास के प्रबंधन के लिए केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं वन्यजीव पर्यावासों का विकास और बाघ और हाथी परियोजना के तहत राज्य सरकारी और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जिसमें सहायता प्राप्त कार्यप्रणाली में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की खरीद, जंगली जानवरी को फसल लगे खेती में प्रवेश करने से रोकने के लिए कांटेदार तार की बाड़, सौर ऊर्जा से चलने वाली बिजली की बाड़ जैव-बाड़ सीमा पर दीवारें आदि जैसी भौतिक का निर्माण और स्थापना, मवेशियों की चोरी फसल की क्षति, जान माल की हानि सहित जंगली जानवरों की ओर से किए गए नुकसान के लिए मुआवजा शामिल है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई दल भी तैनात किए जाते हैं। मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में इन योजनाओं के तहत जंगली जानवरों के हमलों से मृत्यु या स्थायी अशक्तता की स्थिति में अनुग्रह राशि को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया। जंगली जानवरों की ओर से किए नुकसान की प्रकृति के अनुसार दी जा रही मदद में मृत्यु या स्थाई अशक्तता में 10 लाख रुपए, गंभीर चोट में दो लाख रुपए, मामूली चोट में 25 हजार रुपए, संपत्ति या फसल हानि में राज्य सरकारें अपने नियमों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।